Indore: मानसून के दौरान इन्फ्लुएंजा-ए (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन घबराने की नहीं। होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की मध्यप्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य एवं CCRH, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य प्रोफेसर डॉ. ए.के. द्विवेदी ने कहा कि सावधानी, समय पर चिकित्सकीय परामर्श और संक्रमण से बचाव के उपायों को अपनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है।
डॉ. द्विवेदी के अनुसार, होम्योपैथी में रोगी के लक्षणों और व्यक्तिगत स्वास्थ्य-स्थिति के आधार पर चिकित्सक द्वारा उपयुक्त औषधि का चयन किया जाता है। H1N1 या अन्य मौसमी श्वसन संक्रमणों के संदर्भ में कुछ लोग निवारक (preventive) होम्योपैथिक उपचार के बारे में चिकित्सकीय सलाह लेते हैं, लेकिन ऐसी औषधियों का सेवन स्वयं से न करके योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “डरना नहीं है, लेकिन संभलना जरूर है। बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और आवश्यकता होने पर समय पर चिकित्सकीय जांच कराएं। होम्योपैथिक उपचार को भी लक्षणों के आधार पर व्यक्तिगत रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए।”
उन्होंने लोगों से हाथों की स्वच्छता बनाए रखने, खांसते-छींकते समय मुंह-नाक ढंकने, भीड़भाड़ वाले बंद स्थानों में सावधानी बरतने और बीमार होने पर घर पर आराम करने की सलाह दी।
विशेषज्ञों के अनुसार H1N1 एक वायरल संक्रमण है, इसलिए सामान्य वायरल बीमारी में एंटीबायोटिक स्वयं से लेना उचित नहीं है। एंटीबायोटिक केवल चिकित्सक द्वारा बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि या उचित चिकित्सकीय आकलन के बाद ही दी जानी चाहिए। एंटीवायरल दवाओं का उपयोग भी चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार किया जाना चाहिए।
सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना, खून वाली खांसी, अत्यधिक सुस्ती/भ्रम, लगातार उल्टी या पानी न पी पाना जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तत्काल अस्पताल में चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि जागरूकता और समय पर चिकित्सा सलाह ही सबसे महत्वपूर्ण है—“डरना नहीं, संभलना होगा।”


