भारत ने SCO जॉइंट स्टेटमेंट पर साइन क्यों नहीं किया? जानिए पूरा मामला

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SCO विवाद

हाल ही में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) की डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग के दौरान भारत ने एक ऐसा स्टैंड लिया जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ा संदेश दिया। भारत ने जॉइंट स्टेटमेंट पर साइन करने से इनकार कर दिया। इसकी वजह सिर्फ डिप्लोमैटिक मतभेद नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ी चिंताएं थीं। आइए पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं।


क्या है शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO)?

SCO एक यूरेशियन पॉलिटिकल, इकोनॉमिक और सिक्योरिटी अलायंस है, जिसकी स्थापना 2001 में हुई थी। शुरुआत में इसे ‘शंघाई फाइव’ कहा जाता था। वर्तमान में इसके स्थायी सदस्य निम्नलिखित देश हैं:

  • भारत
  • चीन
  • रूस
  • पाकिस्तान
  • कजाकिस्तान
  • उज़्बेकिस्तान
  • किर्गिस्तान
  • तजाकिस्तान
  • ईरान (2023 में शामिल)

इस संगठन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाना, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयास करना, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना है।

SCO के अंतर्गत आतंकवाद से निपटने के लिए “रीजनल एंटी टेररिस्ट स्ट्रक्चर (RATS)” भी स्थापित किया गया है, जिसका मुख्यालय ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) में है।


विवाद की शुरुआत: पहलगाम हमले का जिक्र न होना

भारत की नाराज़गी की मुख्य वजह रही जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2024 में हुआ आतंकी हमला। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। माना जाता है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैसे जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा शामिल थे।

इस हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया, जिसमें आतंकियों के कई ठिकानों को नष्ट कर दिया गया।


चिंगडाओ में SCO डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग

डिफेंस मिनिस्टर्स की यह बैठक चीन के चिंगडाओ में आयोजित हुई। भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया। अपने भाषण में उन्होंने:

  • पहलगाम हमले का जिक्र किया
  • क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म की कड़ी आलोचना की
  • पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश आतंकवाद को अपनी नीति का औज़ार बना रहे हैं
  • कहा कि आतंकवाद पर न्यूट्रल रहना अब संभव नहीं

राजनाथ सिंह ने साफ संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।


जॉइंट स्टेटमेंट पर क्यों हुआ विवाद?

SCO सम्मेलनों में आमतौर पर एक संयुक्त घोषणापत्र (Joint Statement) जारी किया जाता है, जिससे सदस्य देशों की एकता और साझा दृष्टिकोण का संदेश जाता है। लेकिन इस बार दो बड़े कारणों से भारत ने दस्तखत करने से इनकार किया:

1. पहलगाम हमले का जिक्र नहीं

भारत ने आधिकारिक रूप से अनुरोध किया था कि जॉइंट स्टेटमेंट में पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र हो। लेकिन चीन और पाकिस्तान ने इसका विरोध किया।

2. बलूचिस्तान का जिक्र

इसके विपरीत, पाकिस्तान ने चीन की मदद से बलूचिस्तान का मुद्दा जॉइंट स्टेटमेंट में शामिल करा दिया। यह भारत के लिए आपत्तिजनक था, क्योंकि बलूचिस्तान में पाकिस्तान अक्सर भारत पर आरोप लगाता है, जबकि भारत इससे इनकार करता रहा है।

भारत को यह कदम आतंकवाद के नैरेटिव को कमजोर करने की सोची-समझी साज़िश लगा। इसी वजह से भारत ने घोषणा की कि वह ऐसे किसी दस्तावेज़ पर दस्तखत नहीं करेगा, जिसमें उसके सुरक्षा हितों और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों की अनदेखी की जाए।


SCO में भारत के इस रुख के मायने

भारत के इस फैसले के कई बड़े संदेश हैं:

  • भारत ने साफ कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर कोई समझौता नहीं होगा।
  • SCO जैसी बड़ी संस्था में भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच की खाई और गहरी हो गई।
  • चीन द्वारा पाकिस्तान का खुलकर समर्थन करना एक बार फिर सामने आया।
  • SCO की एकता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए, क्योंकि जॉइंट स्टेटमेंट जारी नहीं हो सका।
  • भारत ने वैश्विक स्तर पर फिर दोहराया कि उसकी ‘जीरो टॉलरेंस ऑन टेररिज्म’ की नीति में कोई नरमी नहीं आएगी।

आगे क्या?

अब निगाहें SCO की लीडरशिप समिट पर टिकी हैं, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी पर भी सवाल है। क्या भारत आने वाले दिनों में SCO के भीतर अपना दबदबा बनाए रखेगा या संस्था में मतभेद और गहरे होंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

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निष्कर्ष

भारत ने SCO के मंच पर एक बार फिर दिखा दिया कि आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे उसके लिए सर्वोपरि हैं। दोस्ती, डिप्लोमेसी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूदगी अपनी जगह, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा की हो, भारत किसी भी कीमत पर अपने हितों से समझौता नहीं करेगा।

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