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Naseeruddin Shah के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर विवाद, किरेन रिजिजू ने बताया लोकतंत्र के लिए खतरा

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Naseeruddin Shah: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। वीडियो में शाह ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और विद्यार्थियों के साथ हो रहे व्यवहार पर सवाल उठाए। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेता की आलोचना की और उनके बयान को भारतीय लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक बताया।

रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि वह पहले नसीरुद्दीन शाह को एक सामान्य अभिनेता समझते थे और उनका सम्मान भी करते थे। हालांकि, उनके मुताबिक, उन्हें बाद में पता चला कि शाह एक ‘खतरनाक दिमागी नक्सल’ हैं। केंद्रीय मंत्री ने अभिनेता के कथित वैचारिक रुख को लोकतंत्र के लिए हानिकारक बताया। यह रिजिजू की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, न कि किसी कानूनी या न्यायिक निष्कर्ष का हिस्सा।

Naseeruddin Shah: वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा?

नसीरुद्दीन शाह ने अपने वीडियो में कहा कि उन्हें खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहने पर गर्व है। उन्होंने ‘एंटी नेशनल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे शब्दों का भी जिक्र किया और कहा कि उनके जैसे लोगों को ऐसे नाम दिए जाते हैं। अपने बयान के जरिए अभिनेता ने उन आरोपों और राजनीतिक विशेषणों पर कटाक्ष किया, जिनका इस्तेमाल सरकार के आलोचकों के लिए किया जाता रहा है।

I thought Naseeruddin Shah was just an ordinary actor. I used to respect & like him.. I never knew that he was a dangerous urban Dimagi Naxal !

मुझे उसके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला।। भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है। https://t.co/McSDNBJjPt— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) October 28, 2026

वीडियो में शाह ने केंद्र सरकार से सवाल करते हुए आरोप लगाया कि युवाओं का हौसला तोड़ने, शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और लोकतंत्र को खतरे में डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े घटनाक्रमों को याद रखा जाएगा। अपने संदेश में अभिनेता ने विरोध कर रहे छात्रों के प्रति समर्थन भी जताया।

Naseeruddin Shah: जामिया के विद्यार्थियों के समर्थन में आया वीडियो

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नसीरुद्दीन शाह का यह वीडियो जामिया मिल्लिया इस्लामिया के विद्यार्थियों के आंदोलन के समर्थन में सामने आया। विश्वविद्यालय के छात्र अपनी छात्रसंघ व्यवस्था को बहाल करने और चुनाव कराने की प्रक्रिया को लेकर मांग उठा रहे हैं। शाह ने अपने संदेश में विद्यार्थियों के साथ हो रहे व्यवहार पर सवाल उठाए और केंद्र सरकार की आलोचना की।

अभिनेता ने अपने वीडियो में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू, सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट और जामिया मिल्लिया इस्लामिया का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में विद्यार्थियों से जुड़े घटनाक्रमों को भुलाया नहीं जाएगा। इस तरह उनका संदेश केवल जामिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के विभिन्न शैक्षणिक परिसरों में चल रहे छात्र आंदोलनों और सरकार की प्रतिक्रिया पर भी केंद्रित रहा।

Naseeruddin Shah: ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर क्या है विवाद?

‘दिमागी नक्सल’ और ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भारतीय राजनीति में वैचारिक बहस के दौरान किया जाता रहा है। आम तौर पर ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जिन पर आरोप लगाया जाता है कि वे शहरों में रहकर नक्सली या माओवादी विचारधारा को समर्थन देते हैं। हालांकि, इस शब्द का इस्तेमाल कई बार सरकार के आलोचकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े लोगों पर राजनीतिक टिप्पणी करने के लिए भी किया जाता है।

इस शब्द को लेकर विवाद इसलिए भी है क्योंकि अलग-अलग राजनीतिक पक्ष इसका अलग अर्थ निकालते हैं। कुछ लोग इसे माओवादी गतिविधियों से कथित वैचारिक या संगठनात्मक संबंधों के संदर्भ में इस्तेमाल करते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह के विशेषणों का इस्तेमाल असहमति जताने वालों को बदनाम करने के लिए भी किया जा सकता है। किसी व्यक्ति के लिए इस शब्द का इस्तेमाल अपने आप में उसके किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने का प्रमाण नहीं है।

Naseeruddin Shah: ‘अर्बन नक्सल’ शब्द चर्चा में कैसे आया?

शहरी क्षेत्रों में माओवादी विचारधारा के प्रसार और संगठनात्मक गतिविधियों पर बहस कई वर्षों से होती रही है। वर्ष 2004 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े एक दस्तावेज में शहरों में काम करने, मजदूरों, विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों के बीच समर्थन जुटाने जैसे विषयों पर चर्चा की गई थी। हालांकि, उस दस्तावेज को आज इस्तेमाल होने वाले ‘अर्बन नक्सल’ शब्द की शुरुआत मानना पूरी तरह सटीक नहीं होगा।

वर्ष 2017 में फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री ने अपने लेखों और सार्वजनिक टिप्पणियों में ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया। इसके बाद भीमा कोरेगांव मामले और उससे जुड़ी गिरफ्तारियों के दौरान यह शब्द राजनीतिक और मीडिया बहस का हिस्सा बना। समय के साथ इसका इस्तेमाल माओवादी गतिविधियों के कथित शहरी नेटवर्क के साथ-साथ सरकार की आलोचना करने वाले लोगों पर राजनीतिक आरोप लगाने के संदर्भ में भी किया जाने लगा।

Naseeruddin Shah का परिवार और निजी जीवन

नसीरुद्दीन शाह हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेताओं में शामिल हैं। उन्होंने अपने लंबे करियर में कला फिल्मों, सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों और मुख्यधारा के सिनेमा में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। अभिनय के अलावा वह समय-समय पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय भी रखते रहे हैं।

नसीरुद्दीन शाह की पहली शादी मनारा सिकरी से हुई थी, जिन्हें परवीन मुराद के नाम से भी जाना जाता है। बाद में दोनों अलग हो गए। वर्ष 1982 में उन्होंने अभिनेत्री रत्ना पाठक से विवाह किया। रत्ना पाठक और नसीरुद्दीन शाह के दो बेटे हैं—इमाद शाह और विवान शाह। दोनों ने भी अभिनय और मनोरंजन जगत में काम किया है।

Naseeruddin Shah की चर्चित फिल्मों में शामिल हैं ये नाम

नसीरुद्दीन शाह ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जिन्हें अभिनय और विषयवस्तु के लिहाज से खास पहचान मिली। उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं:

  • अ वेडनेसडे (2008): इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे आम आदमी की भूमिका निभाई, जो व्यवस्था और आतंकवाद से जुड़े सवालों के बीच अपनी बात सामने रखता है।
  • इकबाल (2005): इस फिल्म में शाह ने क्रिकेट कोच की भूमिका निभाई, जो एक सुनने और बोलने में असमर्थ युवा खिलाड़ी को आगे बढ़ने में मदद करता है।
  • सरफरोश (1999): आमिर खान अभिनीत इस फिल्म में शाह ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • आक्रोश (1980): सामाजिक अन्याय और आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर आधारित इस फिल्म में उनका अभिनय उल्लेखनीय रहा।
  • स्पर्श (1980): इस फिल्म में उन्होंने दृष्टिबाधित विद्यालय के प्रधानाचार्य की भूमिका निभाई थी। फिल्म को संवेदनशील विषय और अभिनय के लिए सराहना मिली।

Naseeruddin Shah: बयान पर राजनीतिक बहस तेज

नसीरुद्दीन शाह के वीडियो और किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। एक ओर शाह ने विद्यार्थियों के समर्थन में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री ने उनके बयान और वैचारिक रुख की कड़ी आलोचना की है।

इस पूरे विवाद में मुख्य मुद्दा छात्र आंदोलनों, शैक्षणिक संस्थानों में विरोध-प्रदर्शन और सरकार की भूमिका को लेकर अलग-अलग विचारों का है। शाह के बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल और उनके अर्थ को लेकर बहस भी जारी है।

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