Delhi: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ इस रैली की तैयारियां की जा रही हैं। वहीं, पुरानी दिल्ली के व्यापारियों ने त्योहारों के सीजन में रैली आयोजित होने से कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई है। व्यापारिक संगठनों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख दिवाली के बाद रखने की अपील की है।
व्यापारियों की इस मांग को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है। इसी मुद्दे पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने दिल्ली में व्यापारियों के समर्थन में पदयात्रा निकाली। चांदनी चौक से टाउन हॉल तक निकाले गए इस मार्च को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम दिया गया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक गतिविधियों के कारण व्यापारियों और आम लोगों को होने वाली परेशानी की अनदेखी कर रही है।
Delhi: नितिन नवीन ने राहुल गांधी पर लगाए आरोप
पदयात्रा के दौरान नितिन नवीन ने स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों को संबोधित किया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस की प्रस्तावित रैली से कारोबारियों को होने वाली परेशानी की उन्हें चिंता नहीं है। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी राजनीतिक विरोध के नाम पर अराजकता फैलाना चाहते हैं और उनके बयानों से कांग्रेस को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा।
नितिन नवीन ने यह भी कहा कि राहुल गांधी जितना अधिक राजनीतिक प्रदर्शन करेंगे और झूठ बोलेंगे, कांग्रेस को उतना ही नुकसान होगा। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया रुकने वाली नहीं है। बीजेपी अध्यक्ष के मुताबिक, पार्टी इस मुद्दे पर अपना रुख कायम रखेगी और विपक्ष के आरोपों का जवाब देती रहेगी।
Delhi: घुसपैठियों के नाम हटाने को लेकर बीजेपी का बयान
मार्च के दौरान नितिन नवीन ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए जाएंगे, जबकि घुसपैठियों के नाम हटाए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के कार्यकर्ता इस प्रक्रिया के समर्थन में संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष को बेनकाब करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी नियमों और निर्वाचन अधिकारियों की जांच के अनुसार होती है। इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, मंत्री प्रवेश वर्मा और पार्टी के कई सांसदों तथा वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की जानकारी दी गई।
Delhi: 2029 के चुनाव को लेकर भी नितिन नवीन का दावा
दिल्ली में प्रस्तावित रैली को लेकर बीजेपी ने राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए दावा किया कि 2029 में भी नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे। उनके इस बयान को आगामी लोकसभा चुनावों के संदर्भ में कांग्रेस और विपक्ष पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है।
दरअसल, इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित रैली को लेकर आयोजकों की ओर से बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का दावा किया गया है। खबर में रैली में 10 लाख लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। वहीं, चांदनी चौक और आसपास के बाजारों के व्यापारियों को आशंका है कि बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है और त्योहारों के दौरान ग्राहकों की आवाजाही कम होने से बिक्री पर असर पड़ सकता है।
Delhi: व्यापारियों ने राहुल गांधी को तीसरी बार लिखा पत्र
रैली की तारीख को लेकर व्यापारियों की चिंता के बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने राहुल गांधी को तीसरी बार पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा है। संगठन चाहता है कि राहुल गांधी व्यापारिक प्रतिनिधियों से बातचीत करें और उनकी समस्याओं को सुनें। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन उनके कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान किसी बड़े आयोजन से बाजारों में आवाजाही प्रभावित होने पर भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष बृजेश गोयल के मुताबिक, संगठन राहुल गांधी से केवल 20 मिनट का समय चाहता है। इस दौरान दिल्ली के 20 बाजारों के 20 प्रतिनिधि अपनी बात रख सकें। व्यापारियों का उद्देश्य यह बताना है कि रैली के कारण बाजारों में यातायात और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने से कारोबार को कितना नुकसान पहुंच सकता है।
व्यापारिक संगठनों की मांग है कि रैली को त्योहारों के व्यस्त समय के बजाय दिवाली के बाद आयोजित किया जाए। उनका कहना है कि वे राजनीतिक कार्यक्रमों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन ऐसे आयोजनों की तारीख और स्थान तय करते समय स्थानीय कारोबारियों की परेशानियों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
Delhi: कांग्रेस ने रैली टालने से किया इनकार
व्यापारियों की अपील के बावजूद कांग्रेस की ओर से रैली को लेकर पीछे हटने के संकेत नहीं दिए गए हैं। पार्टी का रुख है कि चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित कार्यक्रम तय योजना के अनुसार आयोजित किया जाएगा। इससे बीजेपी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर टकराव बढ़ गया है।
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने व्यापारियों की ओर से जताई गई आर्थिक नुकसान की आशंका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के संभावित नुकसान की बात करने वाले व्यापारियों के आयकर रिकॉर्ड की भी जांच की जानी चाहिए और उनकी वित्तीय पारदर्शिता को परखा जाना चाहिए। उनके इस बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
संदीप दीक्षित ने रैली से कारोबार बढ़ने की भी कही बात
संदीप दीक्षित ने व्यापारियों की चिंता के जवाब में यह तर्क भी दिया कि यदि रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं, तो आसपास की दुकानों पर ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है। उनके अनुसार, 10 लाख लोगों के जुटने से दुकानदारों की बिक्री में भी इजाफा हो सकता है।
हालांकि, व्यापारियों और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनती दिखाई नहीं दे रही है। व्यापारी जहां त्योहारों के दौरान कारोबार प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं, वहीं कांग्रेस रैली को चुनाव आयोग से जुड़े अपने राजनीतिक विरोध का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। बीजेपी ने इसी विवाद को आधार बनाकर व्यापारियों के समर्थन में मार्च निकालते हुए कांग्रेस को घेरने की कोशिश की है।
Delhi: चुनाव आयोग के मुद्दे पर सियासी टकराव तेज
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित रैली को लेकर दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक तरफ कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक रैली की तैयारियों में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी व्यापारियों की मांग को सामने रखकर कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। पुरानी दिल्ली के बाजारों में कारोबार और यातायात पर पड़ने वाले संभावित असर ने इस राजनीतिक विवाद को नया मोड़ दे दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि व्यापारिक संगठनों की मांग पर कांग्रेस अपने कार्यक्रम में कोई बदलाव करती है या नहीं। फिलहाल, रैली की तारीख को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं और यह मुद्दा दिल्ली की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
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