Report: Alok Bhardwaj
Bhind Garbage Vehicle Purchase भिंड जिले की गोहद जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत शेरपुर में कचरा वाहन की खरीदी को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। सवाल यह है कि जिस कचरा वाहन की बाजार कीमत करीब 8 लाख रुपये बताई जा रही है, उसे आखिर 13 लाख 60 हजार रुपये में क्यों खरीदा गया? यदि बाजार मूल्य का दावा सही है, तो वाहन की खरीदी में 5 लाख 60 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च होने की बात सामने आती है। अब इस कथित महंगी खरीदी को लेकर ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नियमों पर सवाल, फिर भी पांचवें वित्त आयोग की राशि से भुगतान?
Bhind Garbage Vehicle Purchase मामले को और गंभीर बनाता है भुगतान का तरीका। आरोप है कि कचरा वाहन की खरीदी के लिए पांचवें वित्त आयोग की राशि का इस्तेमाल किया गया। वहीं, गोहद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रामपाल बघेल का स्पष्ट कहना है कि इस मद से इस तरह की खरीदी नहीं की जा सकती।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि इस राशि से वाहन खरीदने का प्रावधान नहीं है, तो भुगतान किस आधार पर किया गया? क्या खरीदी से पहले नियमों की जांच की गई थी या फिर सरकारी राशि खर्च करते समय नियमों को नजरअंदाज कर दिया गया? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच और दस्तावेजों से ही सामने आएगा।
जनपद अध्यक्ष की शिकायत, अब कार्रवाई किसकी जिम्मेदारी?
Bhind Garbage Vehicle Purchase गोहद जनपद पंचायत के अध्यक्ष कालीचरण तोमर ने इस मामले की शिकायत जनपद से लेकर जिला स्तर तक की है। शिकायत के बाद अब निगाहें उन अधिकारियों पर हैं, जिनकी जिम्मेदारी सरकारी राशि के इस्तेमाल और पंचायत के कार्यों की निगरानी करना है।
मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि कचरा वाहन की वास्तविक बाजार कीमत क्या थी, खरीदी किस प्रक्रिया से की गई और भुगतान के लिए पांचवें वित्त आयोग की राशि का इस्तेमाल किस आधार पर हुआ? यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब बड़ा सवाल: सरकारी धन खर्च करने में कथित गड़बड़ी के आरोपों पर जांच कब होगी और जिम्मेदारों की जवाबदेही कौन तय करेगा? फिलहाल, शिकायत के बाद कार्रवाई और जांच के नतीजों का इंतजार है।


