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MP: जनसुनवाई में पहुंचा दो पत्नियों से परेशान नेत्रहीन भिखारी, बोला— “भीख मांगने तक की फुर्सत नहीं रही!”

जनसुनवाई में आमतौर पर राशन कार्ड, ज़मीन विवाद या सरकारी योजना की अर्जी लगती है। लेकिन मध्यप्रदेश के खंडवा ज़िले की इस जनसुनवाई में जो हुआ, उसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को कुछ देर के लिए मौन कर दिया। कलेक्टर की मेज़ के सामने एक नेत्रहीन भिखारी खड़ा था — लेकिन उसका मुद्दा पेंशन या रोजगार नहीं था। उसकी समस्या थी… “घर में दो बीवियां हैं और दोनों के झगड़े ने भीख मांगना तक मुश्किल कर दिया है।” भीड़ में हँसी फूटी, पर शफीक के चेहरे पर परेशानी की लकीरें थीं — और उसकी फरियाद दिल से निकली थी।


“दोनों को साथ रखना चाहता हूं, लेकिन मेरी किस्मत ही अलग है…”

खंडवा ज़िले के कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जब नेत्रहीन भिखारी शफीक पहुंचा, तो कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने भी सामान्य शिकायत की उम्मीद की थी। लेकिन शफीक ने जो कहा, वो किसी फिल्म की पटकथा जैसा लग रहा था।

“सर, मेरी दो पत्नियां हैं — शबाना और फेमिदा। दोनों के बीच दिन-रात लड़ाई चलती रहती है। मैं चाहता हूं कि दोनों एक ही छत के नीचे रहें, ताकि मेरा घर बस सके। लेकिन इनके झगड़ों की वजह से मैं ठीक से भीख तक नहीं मांग पा रहा हूं…”

शफीक ने कहा कि उसका धंधा यानी भीख मांगना पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। ट्रेनों और बसों में घूमकर जो 1,000-2,000 रुपये रोज़ कमाता था, अब वह भी घटकर आधा रह गया है।


शादी की कहानी में भी ट्विस्ट है…

जानकारी के मुताबिक, शफीक ने 2022 में पहली पत्नी शबाना से शादी की थी। लेकिन कुछ समय बाद शबाना के मायके वालों ने उसकी कोई मदद नहीं की। नाराज़ होकर शफीक ने 2024 में दूसरी शादी कर ली — इस बार फेमिदा नाम की महिला से।अब हालात ये हैं कि दोनों पत्नियां अलग-अलग घरों में रह रही हैं। जब भी शफीक कोशिश करता है कि दोनों को एक ही घर में रखा जाए, तो बात हाथापाई तक पहुंच जाती है।

“मैं अंधा हूं, खुद खाना नहीं बना सकता। दोनों में कोई भी खाना बनाकर नहीं देती। एक कहती है वो क्यों बनाए, दूसरी कहती है पहले वाली क्यों है साथ। अब आप ही बताइए, क्या करूं?”
– शफीक की मार्मिक अपील।


डीएम ने विभाग को सौंपा मामला, अब होगा समझौता?

कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने शफीक की अजीब लेकिन मानवीय फरियाद को गंभीरता से लिया और मामला महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंप दिया। अब विभाग ने दोनों पत्नियों को गुरुवार को बुलाया है, ताकि उनके बीच समझौता कराया जा सके और शफीक की ‘गृहस्थी’ को पटरी पर लाया जा सके।


जनसुनवाई बनी तमाशा-गृह, सोशल मीडिया पर मच गया बवाल

शफीक की अनोखी शिकायत का वीडियो जैसे ही बाहर आया, सोशल मीडिया पर मीम्स और चुटकुलों की बाढ़ आ गई।

  • कुछ लोगों ने कहा: “MP की जनसुनवाई में अब पारिवारिक धारावाहिक भी चलने लगे हैं।”
  • किसी ने लिखा: “भिखारी नहीं, ‘गृहस्थी मैनेजर’ है ये आदमी।”
  • वहीं, कुछ संवेदनशील यूज़र्स ने शफीक की साहसिक सच्चाई और खुलापन की तारीफ भी की।

“भीख मांगने के लिए भी घर में शांति चाहिए” — शफीक

शफीक की एक लाइन ने सबका ध्यान खींचा —

“घर में शांति होगी, तभी सड़कों पर भीख मांगकर पेट भर सकूंगा। वरना दोनों बीवियों के झगड़े में मैं भूखा मर जाऊंगा।”


ये कोई मज़ाक नहीं, एक व्यक्ति की सच्ची पुकार है

शफीक की कहानी भले ही पहली नजर में हास्यास्पद लगे, लेकिन यह एक नेत्रहीन, निर्धन व्यक्ति की जीवन-संग्राम की व्यथा है। वो मदद नहीं, बल्कि शांति और सहजीवन की उम्मीद लेकर कलेक्टर के पास गया था।
अब देखना यह है कि महिला एवं बाल विकास विभाग इस अनोखी गृहस्थी में सामंजस्य बैठा पाएगा या नहीं।

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