Report: Prem Shrivastva
Jamshedpur Diwali जमशेदपुर में प्रकाश और खुशियों के पर्व दीवाली की पूर्व संध्या पर झारखंड की पूर्व सांसद सुमन महतो ने स्थानीय कुम्हारों के बीच पहुंचकर उनके साथ समय बिताया। मिट्टी के दीयों को सहेजने और इस पारंपरिक कला से जुड़े कारीगरों के श्रम को सम्मान देने के उद्देश्य से उन्होंने कुम्हारों की बस्ती का दौरा किया। इस दौरान पूर्व सांसद खुद कुम्हार के चाक पर बैठीं और मिट्टी के दीये तैयार कर कारीगरों का उत्साह बढ़ाया।
कुम्हारों के संघर्ष और हुनर को करीब से समझा
Jamshedpur Diwali सुमन महतो ने कुम्हारों की मेहनत, उनकी कलात्मक क्षमता और पुश्तैनी हुनर के पीछे छिपे संघर्ष को करीब से जाना। उन्होंने कहा कि मिट्टी को आकार देकर दीये बनाना केवल एक कला नहीं है, बल्कि इससे कुम्हार परिवारों की सालभर की उम्मीदें और सपने जुड़े होते हैं।
उन्होंने कहा, “यह केवल मिट्टी की गढ़ाई नहीं है, बल्कि चाक पर घूमता हर दीया इन मेहनतकश कुम्हार परिवारों के सालभर के सपनों और उम्मीदों को आकार देता है। जब हम स्थानीय स्तर पर बने दीये खरीदते हैं, तो हम केवल रोशनी नहीं लाते, बल्कि किसी जरूरतमंद परिवार के घर में भी सच्चे अर्थों में दीवाली की खुशियां प्रज्वलित करते हैं।”
स्थानीय दीये खरीदने की अपील
Jamshedpur Diwali आधुनिकता और चाइनीज झालरों के बढ़ते चलन के बीच अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे मिट्टी के कारीगरों का पक्ष रखते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि स्थानीय कुम्हारों को उनके श्रम का उचित मूल्य देना ही उनके प्रति सच्ची संवेदना है।
उन्होंने जमशेदपुर के लोगों, विशेषकर युवाओं से स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को मजबूत करने की अपील की।


