by: vijay yadav
Feet Tingling Causes : इंसान स्वस्थ तो है लेकिन पैरों में बार-बार झनझनाहट होना, पैरों का सुन्न पड़ना, सुई चुभने जैसा महसूस होना या पैरों में चींटियां रेंगने का अहसास होना एक आम समस्या है। कई बार लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या पैर दब जाने से भी ऐसा होता है। लेकिन अगर यह परेशानी लगातार बनी रहती है या बार-बार होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पैरों में झनझनाहट शरीर में पोषक तत्वों की कमी, नसों पर दबाव, डायबिटीज और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं का संकेत भी हो सकती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को पेरेस्थीसिया (Paresthesia) कहा जाता है।
Feet Tingling Causes : पैरों में झनझनाहट होने के प्रमुख कारण
- डायबिटीज (मधुमेह)
डायबिटीज के मरीजों में लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इसमें पैरों में झनझनाहट, जलन, सुन्नपन और दर्द हो सकता है। कई बार रात में ये लक्षण ज्यादा महसूस होते हैं। - विटामिन B12 की कमी
विटामिन B12 नसों के स्वास्थ्य और उनके सही कामकाज के लिए जरूरी है। इसकी कमी से हाथ-पैरों में झनझनाहट, कमजोरी, सुन्नपन और चलने में संतुलन की परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक कमी रहने पर नसों को नुकसान भी पहुंच सकता है। - साइटिका (Sciatica)
कमर से निकलने वाली साइटिक नस पर दबाव पड़ने से दर्द और झनझनाहट पैर तक पहुंच सकती है। इसमें आमतौर पर कमर या कूल्हे से शुरू होकर जांघ और पैर तक दर्द, जलन या सुन्नपन महसूस होता है। - थायरॉइड की समस्या
थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम होने यानी हाइपोथायरॉइडिज्म की स्थिति में कुछ लोगों को नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इससे पैरों में झनझनाहट, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। - किडनी की बीमारी
किडनी ठीक से काम नहीं करती तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा हो सकते हैं। गंभीर या लंबे समय से चली आ रही किडनी की बीमारी में नसों पर असर पड़ सकता है। इससे पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट और जलन हो सकती है। - नसों पर दबाव (Peripheral Nerve Compression)
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने, पैर पर पैर रखकर बैठने या किसी नस पर दबाव पड़ने से पैरों में झनझनाहट हो सकती है। कुछ मामलों में नस दबने की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। इससे पैर सुन्न पड़ सकते हैं और मांसपेशियों में कमजोरी भी आ सकती है। - रीढ़ की हड्डी में परेशानी
रीढ़ की हड्डी की डिस्क खिसकने (Slipped Disc) या स्पाइनल स्टेनोसिस यानी रीढ़ की नसों के रास्ते में जगह कम होने से नसों पर दबाव पड़ सकता है। इससे कमर दर्द के साथ पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और कमजोरी महसूस हो सकती है। - शराब का अधिक सेवन
लंबे समय तक अत्यधिक शराब पीने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसे अल्कोहलिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इसमें पैरों में जलन, झनझनाहट, दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी हो सकती है। शराब के कारण पोषण संबंधी कमियां भी इस समस्या को बढ़ा सकती हैं। - शरीर में कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम की कमी
शरीर में कुछ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन होने पर नसों और मांसपेशियों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। इससे पैरों में झनझनाहट, ऐंठन, मांसपेशियों में खिंचाव और कमजोरी हो सकती है। हालांकि, इन लक्षणों का कारण केवल मिनरल्स की कमी ही नहीं होता।

- मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis)
यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। इसके कारण दिमाग और रीढ़ की हड्डी के बीच संदेश पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कुछ मरीजों में हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, मांसपेशियों की कमजोरी और चलने में परेशानी इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
Feet Tingling Causes : पैरों में झनझनाहट के अन्य सामान्य कारण
हर बार पैरों में झनझनाहट किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। इसके कुछ सामान्य कारण भी हो सकते हैं:
लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना।
पैरों पर शरीर का अधिक दबाव पड़ना।
बहुत देर तक खड़े रहना।
गलत मुद्रा में सोना।
कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव।
नसों में अस्थायी दबाव पड़ना।
पैरों में झनझनाहट होने पर कौन से टेस्ट कराने पड़ सकते हैं?
Feet Tingling Causes : डॉक्टर मरीज के लक्षण, मे
डिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
जांच किसकी पहचान में मदद
- ब्लड शुगर और HbA1c डायबिटीज
- विटामिन B12 टेस्ट विटामिन B12 की कमी
- थायरॉइड टेस्ट (TSH) थायरॉइड की समस्या
- किडनी फंक्शन टेस्ट किडनी की कार्यक्षमता
- कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
- नर्व कंडक्शन स्टडी (NCS) नसों की कार्यक्षमता
- MRI Spine रीढ़ की हड्डी और नसों पर दबाव
Feet Tingling Causes : सभी मरीजों को ये सभी जांच कराने की जरूरत नहीं होती। जांच का चुनाव डॉक्टर लक्षणों के अनुसार करते हैं।
पैरों की झनझनाहट से बचने के लिए क्या करें?
नियमित रूप से टहलने और हल्का व्यायाम करने की आदत डालें।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें।
संतुलित भोजन करें और विटामिन B12 युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें।
डायबिटीज है तो ब्लड शुगर नियंत्रित रखें।
शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
पर्याप्त नींद लें और शरीर को आराम दें।
बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन या मिनरल सप्लीमेंट न लें।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
Feet Tingling Causes : अगर पैरों में झनझनाहट बार-बार होती है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासतौर पर इन स्थितियों में देर नहीं करनी चाहिए:
- पैरों में लगातार सुन्नपन या जलन रहना।
- चलते समय संतुलन बिगड़ना।
- पैरों की मांसपेशियों में कमजोरी आना।
- झनझनाहट के साथ कमर से पैर तक तेज दर्द होना।
- रात में परेशानी बढ़ना या नींद प्रभावित होना।
मेडिकल इमरजेंसी अगर अचानक शरीर के एक तरफ हाथ-पैर सुन्न पड़ जाएं, चेहरे पर टेढ़ापन आए या बोलने में परेशानी हो तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लें। इसी तरह पेशाब या मल पर नियंत्रण खत्म होने और पैरों में तेजी से बढ़ती कमजोरी के साथ कमर दर्द हो तो तत्काल अस्पताल जाएं।
पैरों में झनझनाहट को सामान्य थकान समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। यह विटामिन B12 की कमी, डायबिटीज, नसों पर दबाव या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकती है। सही कारण का पता लगाने के लिए समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे डॉक्टर की सलाह या जांच का विकल्प न मानें।


