रिपोर्ट- प्रमोद श्रीवास्तव
Dhirendra Krishna Shastri : भोपाल, धर्म और आस्था के मंच से निकले शब्द अब विवाद की वजह बन गए हैं। बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिस पर संत समाज में नाराजगी फैल गई। मथुरा से अयोध्या तक साधु-संतों ने बयान पर सवाल उठाए। विरोध बढ़ा तो धीरेन्द्र शास्त्री ने वीडियो जारी कर माफी भी मांग ली। लेकिन बयान पर विवाद खत्म होता नजर नहीं आ रहा। धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर सांसद पप्पू यादव संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। पप्पू यादव ने भगवान कृष्ण को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताई है।

Dhirendra Krishna Shastri : ‘शास्त्री’ का श्री कृष्ण पर बयान, माफी के बाद भी जारी है संग्राम
बयान पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया मथुरा और अयोध्या के साधु-संतों की तरफ से आई। संतों का कहना है कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों एक ही परमात्मा के स्वरूप हैं। ऐसे में एक की तुलना दूसरे से करना और टिप्पणी करना उचित नहीं है। कुछ संतों ने इसे धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए भविष्य में ऐसी बयानबाजी से बचने की चेतावनी भी दी।विवाद बढ़ता देख धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी बातों का गलत अर्थ निकाला गया, उनका उद्देश्य भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण में भेद करना नहीं था।
Dhirendra Krishna Shastri : ‘शास्त्री’ का बयान, माफी, शिकायत और विरोध, FIR तक
वे खुद भगवान श्रीकृष्ण और ब्रज के भक्त हैं।यदि उनकी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं।दरअसल मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में रामकथा के दौरान धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए टिप्पणी की। श्रीकृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा और बांसुरी बजाने को लेकर कही गई बातों को कृष्ण भक्तों ने आपत्तिजनक माना।
Dhirendra Krishna Shastri : माफी के बाद भी क्यों नहीं थम रहा कृष्ण पर विवाद ?
वीडियो वायरल हुआ तो विरोध के स्वर तेज हो गए।धार्मिक बयान से शुरू हुआ विवाद अब सियासी गलियारों तक भी पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी टिप्पणी पर कार्रवाई की मांग की, वहीं कांग्रेस के नेताओं ने भी शास्त्री को निशाने पर लिया। ऐसे में सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि धार्मिक मंचों से होने वाली बयानबाजी की जिम्मेदारी और मर्यादा का भी है।लेकिन सवाल है कि क्या माफी से विवाद थम जाएगा ? क्या धार्मिक मंचों से देवी-देवताओं की तुलना करना उचित है ? और क्या कथावाचकों को अपनी भाषा और अभिव्यक्ति की मर्यादा का ध्यान नहीं रखना चाहिए ?
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