Russia- Ukraine: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर अहम मुलाकात हुई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारत-रूस संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत की। अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मुलाकात से जुड़ी जानकारी साझा की है।
विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि रूस की सेना में शामिल किए गए भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी भारत की प्राथमिकता बनी हुई है। भारत इस मुद्दे को लगातार रूसी अधिकारियों के सामने उठा रहा है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के वैश्विक प्रभावों को लेकर भी भारत ने अपनी चिंता जाहिर की है।
Russia- Ukraine: रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के हालात पर हुई बातचीत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जयशंकर और लावरोव के बीच हुई बातचीत में यूरोप और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात प्रमुख मुद्दे रहे। दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कई अन्य विषयों पर विचार साझा किए।
जयशंकर ने 31 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर लावरोव के साथ मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए बताया था कि दोनों के बीच यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। यह मुलाकात अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई थी।
Russia- Ukraine: रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने के लिए भारत की पहल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। भारत ने इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए अपने सुझाव दोनों देशों के साथ साझा किए हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत का मानना है कि युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए।
रणधीर जायसवाल ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ नई दिल्ली और इससे पहले बिश्केक में हुई मुलाकात के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा की थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मॉस्को जाकर लावरोव से बातचीत कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा कर वहां के नेतृत्व के साथ भी संवाद किया था।
भारत का प्रयास है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए सभी पक्षों के साथ बातचीत जारी रखी जाए।
Russia– Ukraine: रूसी सेना में फंसे भारतीयों की वापसी पर क्या है अपडेट?
रूस की सेना में भर्ती किए गए भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण बना हुआ है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि रूस में अभी भी मौजूद भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए मॉस्को के साथ अलग-अलग स्तरों पर बातचीत की जा रही है।
मंत्रालय की ओर से पिछले महीने साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, करीब 259 भारतीय नागरिकों की रूसी सेना में भर्ती हुई थी। इनमें से 139 भारतीयों को सरकारी प्रयासों के जरिए सेना से मुक्त कराकर भारत वापस लाया जा चुका है। वहीं, 69 अन्य भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए रूस के साथ बातचीत जारी है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके पास केवल भारतीय नागरिकों से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। ऐसे में मंत्रालय यह जानकारी नहीं दे सकता कि इन लोगों में से कितने लोगों ने रूसी नागरिकता हासिल कर ली है। DD India+1
Russia- Ukraine: पश्चिम एशिया में युद्ध को लेकर भारत ने जताई चिंता
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भी भारत ने चिंता जाहिर की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत इस क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात पर लगातार नजर रख रहा है। भारत ने संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीतिक रास्तों से विवाद का समाधान निकालें।
मंत्रालय ने कहा कि इस संघर्ष का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। खाद्य पदार्थों, ईंधन, उर्वरकों और वैश्विक वित्तीय गतिविधियों पर युद्ध के कारण दबाव बढ़ा है। इसके अलावा समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं।
भारत ने सभी संबंधित पक्षों से शत्रुता समाप्त करने और क्षेत्र में शांति बहाल करने की अपील की है।
Russia- Ukraine: वैश्विक संघर्षों के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच भारत लगातार विभिन्न देशों के साथ उच्चस्तरीय बातचीत कर रहा है। जयशंकर और लावरोव की मुलाकात इसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है। भारत ने दोनों संघर्षों के समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया है।
भारत के लिए इन युद्धों का असर केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, खाद्य आपूर्ति और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से भी जुड़ा है। ऐसे में रूस के साथ भारतीय नागरिकों की वापसी का मुद्दा और पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की अपील भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।


