सर्प दोष निवारण के लिए प्रसिद्ध है स्थल
संवाददाता: प्रयास कैवर्त
जिला – गौरेला पेंड्रा मरवाही
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही क्षेत्र स्थित मां नागेश्वरी मंदिर आस्था का एक ऐसा केंद्र है, जिसकी महिमा अत्यंत रहस्यमयी और चमत्कारी मानी जाती है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां भक्तों का तांता लगा हुआ है, विशेषकर अष्टमी तिथि पर मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
यह मंदिर कुम्हारी गांव में स्थित है, जहां मां नागेश्वरी के साथ-साथ भगवान शंकर-पार्वती, श्रीराम-जानकी, श्री हनुमान, श्री राधे-श्याम और भगवान विश्वकर्मा की भी मूर्तियाँ स्थापित हैं। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहाँ की चमत्कारी घटनाएं लोगों को आश्चर्यचकित भी करती हैं।

रात में स्वयं बजते हैं मंदिर के घंटी-घड़ियाल
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मां नागेश्वरी मंदिर में रात के समय अचानक अपने आप घंटे और घड़ियाल बजने लगते हैं, जबकि उस समय मंदिर में कोई उपस्थित नहीं होता। यह रहस्य आज तक अनसुलझा बना हुआ है और इसे मां की अलौकिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
सर्प दोष निवारण के लिए प्रसिद्ध
मां नागेश्वरी मंदिर विशेष रूप से सर्प दोष से मुक्ति के लिए जाना जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं और सर्पदोष के बंधन से मुक्ति पाने की प्रार्थना करते हैं।
नवरात्रि पर भक्तों की भारी भीड़
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अवसर पर मां नागेश्वरी मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यहाँ मनोकामना ज्योति कलश स्थापित करने की परंपरा भी है, जिसके लिए छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और देश के कोने-कोने से भक्त यहां पहुंचते हैं।

गुनी महाराज की तपोभूमि
यह मंदिर तपस्वी बाबा गुनी महाराज की तपोस्थली मानी जाती है, जिन्होंने वर्षों तक यहां साधना की और मां नागेश्वरी के दर्शन प्राप्त किए। कहा जाता है कि मां नागेश्वरी स्वयंभू रूप में यहां प्रकट हुई थीं।
मां नागेश्वरी मंदिर श्रद्धा, आस्था और चमत्कार का ऐसा संगम है, जो भक्तों को न सिर्फ अध्यात्म से जोड़ता है, बल्कि उन्हें एक अलौकिक अनुभव भी कराता है। नवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में जो दिव्यता और ऊर्जा महसूस होती है, वह वाकई अद्वितीय है।





