महादयी विवाद: पर्यावरण कार्यकर्ताओं को ‘एजेंट’ बताने पर बीजेपी सांसद जगदीश शेट्टर घिरे

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कर्नाटक में महादयी परियोजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बेलगावी सांसद जगदीश शेट्टर से सार्वजनिक माफी की मांग की है।


🔍 मुद्दे की शुरुआत: क्या कहा बीजेपी सांसद ने?

बेलगावी से बीजेपी सांसद जगदीश शेट्टर ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान देते हुए कर्नाटक के पर्यावरण कार्यकर्ताओं को ‘गोवा सरकार के एजेंट’ करार दिया। यह बयान महादयी नदी बेसिन परियोजनाओं के विरोध में उठ रही आवाजों के बीच आया।

इस बयान के खिलाफ कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में रोष फैल गया है। वे इसे न सिर्फ अपमानजनक, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला मान रहे हैं।


🌿 पर्यावरण के लिए दशकों से लड़ने वाले कार्यकर्ता

पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे गोवा या किसी राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ रहे हैं। इन प्रमुख नामों को ‘एजेंट’ कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है:

  • दिलीप कामत: 60 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण में लगे हुए हैं। बाबा आमटे के साथ काम किया और 80,000 एकड़ जंगल को बचाया।
  • शिवाजी राव कागनिकर: ‘नॉर्थ कर्नाटक के वॉटर मैन’ कहे जाते हैं। उन्हें राज्योत्सव और देवराज उर्स जैसे सम्मान मिल चुके हैं। वर्षा जल संचयन और हरित अभियान के लिए जाने जाते हैं।
  • लेफ्टिनेंट जनरल श्रीकृष्ण सरदेशपांडे: युद्धवीर, जिन्हें उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, और राज्योत्सव पुरस्कार मिला है। भिमगढ़, कोडाचाद्री और महादयी क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित कराने में अहम भूमिका निभाई।
  • कर्नल रविंद्र सैनी, कैप्टन नितिन धोण्ड, नायला कोएल्हो और शारदा गोपाल: ये सभी सामाजिक कार्यकर्ता, वैज्ञानिक, शिक्षक हैं — और कर्नाटक की मिट्टी से जुड़े सच्चे रक्षक हैं।

📢 कार्यकर्ताओं की मांग: ‘सार्वजनिक माफी दो’

सुझीत मुलगुंड, एक प्रमुख कार्यकर्ता ने कहा:

“जिन व्यक्तियों को शेट्टर साहब ने ‘एजेंट’ कहा, वे वो हैं जिन्होंने बिना किसी राजनीतिक लाभ के जंगल, जल और जन की रक्षा की है। ये insult न केवल असत्य है, बल्कि हमारी लोकतांत्रिक चेतना पर भी आघात है।”

उन्होंने यह भी कहा कि इन कार्यकर्ताओं को कई सरकारों से पर्यावरण मित्र पुरस्कार और मुख्यमंत्री से प्रशंसा मिली है। उन्होंने जो हासिल किया है, वह राजनेता केवल वादा करते हैं।


🌊 ‘महादयी बचाओ आंदोलन’ की चेतावनी

राजू टोपन्ननवर, ‘सेव वॉटर, सेव वेस्टर्न घाट्स’ आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता ने घोषणा की:

“हम 3 जून को बेलगावी में एक रैली आयोजित करेंगे। यह किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति और भविष्य के लिए है।”

उन्होंने बताया कि इस रैली में ऋधिमा पांडे, 17 वर्षीय युवा जलवायु कार्यकर्ता, भी शामिल होंगी। ऋधिमा ने 2017 में भारत सरकार के खिलाफ जलवायु समझौते के उल्लंघन पर याचिका दाखिल की थी और 2019 में ग्रेटा थनबर्ग समेत 15 बच्चों के साथ UN में जलवायु न्याय की लड़ाई लड़ी।


🧭 असली मुद्दा क्या है?

  • महादयी बेसिन परियोजना को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता चिंतित हैं कि इससे वनों की कटाई, जलवायु असंतुलन और भूमि हथियाने की गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
  • वे यह मानते हैं कि बीजेपी सांसद का बयान, असली मुद्दों से ध्यान भटकाने और आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश है।

🔚 निष्कर्ष: किसके लिए लड़ रहे हैं ये कार्यकर्ता?

यह आंदोलन किसी दल के लिए नहीं, न ही किसी राज्य के विरोध में है। यह हमारे जंगलों, नदियों और बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए है। ऐसे कार्यकर्ताओं को ‘एजेंट’ कहना, उनके जीवनभर की मेहनत और प्रतिबद्धता का अपमान है।

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