Intangible Cultural Heritage : मैहर बैंड को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किया गया
Intangible Cultural Heritage : मध्यप्रदेश की विश्वविख्यात संगीत परंपरा मैहर बैंड (मैहर वाद्यवृंद) को भारत सरकार ने राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage-ICH) की सूची में शामिल कर लिया है। यह उपलब्धि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सांस्कृतिक संरक्षण नीति के तहत संस्कृति विभाग के प्रयासों से यह सम्मान प्राप्त हुआ है।

Intangible Cultural Heritage : मुख्यमंत्री ने जताई खुशी, कलाकारों को दी बधाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि को मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा सामान्य प्रशासन श्री शिव शेखर शुक्ला ने मैहर बैंड के कलाकारों और शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर को बधाई दी। इससे पहले प्रदेश की भगोरिया नृत्य और गोंड चित्रकला को भी राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में स्थान मिल चुका है।
Intangible Cultural Heritage : संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए बनेगा गुरुकुल
मैहर बैंड की गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संस्कृति विभाग शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर के माध्यम से गुरुकुल की स्थापना कर रहा है। इस गुरुकुल में युवा कलाकारों को गुरु-शिष्य परंपरा के तहत शास्त्रीय संगीत, रागों और मैहर बैंड की विशिष्ट शैली का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
Intangible Cultural Heritage : 108 वर्षों का गौरवशाली इतिहास
मैहर बैंड की स्थापना वर्ष 1918 में महान संगीताचार्य उस्ताद अलाउद्दीन खाँ ने मैहर रियासत के तत्कालीन महाराजा बृजनाथ सिंह जूदेव की प्रेरणा से की थी। इसे भारतीय शास्त्रीय संगीत का विश्व का पहला शास्त्रीय ऑर्केस्ट्रा माना जाता है। पिछले 108 वर्षों में इस वाद्यवृंद ने देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
Intangible Cultural Heritage : नलतरंग है मैहर बैंड की सबसे बड़ी पहचान
मैहर बैंड की सबसे अनूठी विशेषता इसका दुर्लभ वाद्य नलतरंग है। उस्ताद अलाउद्दीन खाँ ने बंदूक की नालियों को स्वरबद्ध कर इस अद्भुत वाद्य का निर्माण किया था। इसके अलावा सितार, सरोद, इसराज, वायलिन, चेलो, हारमोनियम, सितार-बैंजो और तबला जैसे वाद्य भी इस ऑर्केस्ट्रा का हिस्सा हैं। नलतरंग आज भी दुनिया में केवल मैहर बैंड की पहचान माना जाता है।
Intangible Cultural Heritage : राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बनाई पहचान
वर्ष 1924 में लखनऊ के प्रसिद्ध भातखंडे समारोह में मैहर बैंड की प्रस्तुति ने इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई। इसके बाद से यह देश के प्रमुख संगीत समारोहों में लगातार प्रस्तुति देता रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2016 में मैहर बैंड को राज्य के सर्वोच्च शिखर सम्मान से भी सम्मानित किया था।
Intangible Cultural Heritage : मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया आयाम
राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होने के बाद मैहर बैंड को संरक्षण, प्रचार और वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा के लिए भी गर्व का विषय है।
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