UP PDA Politics : ‘A’ अल्पसंख्यक से आदिवासी का शोर, किसका चलेगा जोर ? 2027 की चुनावी बिसात,PDA पर बनेगी बात ?
UP PDA Politics : उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का दबदबा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भारी सफलता के बाद समाजवादी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए इसे अपना मुख्य हथियार बना लिया है। इसके ‘A’ को आदिवासियों से जोड़कर समाजवादी पार्टी नए समीकरण साध रही है, समाजवादी पार्टी के इस फॉर्मूले ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। अखिलेश यादव का दावा है कि पीडीए शोषितों और वंचितों की आवाज है पीडीए…. 24 जून को अखिलेश यादव ने आदिवासी समाज के नेताओं को महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस कार्यक्रम में बुलाया और इस रणनीति को तेज करने की दिशा कदम बढ़ाया…इस दौरान सपा चीफ ने बदहाली और समस्याओं के लिए बीजेपी पर ठीकरा फोड़ा है.
UP PDA Politics : साथ ही कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनने पर अनुसूचित जनजाति आयोग बनाया जाएगा. वहीं लोहिया आवास और दो फीसदी आरक्षण देने का भी वादा किया…उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अनुसूचित जनजाति के लोग रहते हैं. जहां अनुसूचित जनजातियों की आबादी कुल जनसंख्या की लगभग आधा प्रतिशत है. वहीं बलिया, महोबा, चित्रकूट, ललितपुर, सोनभद्र, चंदौली, लखीमपुर, मिर्जापुर और श्रावस्ती में इसका प्रभाव अहम माना जाता है. इन जिलों में गोंड, थारू, बैगा, चेरो, कोल, सहरिया, खरवार जैसी जनजातियां शामिल हैं. हालांकि बीजेपी इनमें ज्यादा एक्टिव है…भाजपा ने भी इस काट के रूप में ओबीसी और अन्य वंचित वर्गों को अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी में 50% से अधिक प्रतिनिधित्व दिया है, सभी राजनितिक दल दिग्गाजों को पूर्व में दी गई जिम्मेदारियों में बदलाव कर रहे है और एक नई रणनीति के तहत तैयारियां की जा रही है …ऐसे में पीडीए फैक्टर का किसको कितना मिलेगा लाभ इसी पर करेंगे चर्चा……
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