Bhagalpur Bhatokhar Pokhar Encroachment : सरकारी भतोखर पोखर पर अवैध कब्जे का आरोप; ग्रामीणों ने DM से लगाई गुहार, कहा- फर्जी कागजातों पर बेच दिया सरकारी तालाब

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Bhagalpur Bhatokhar Pokhar Encroachment

रिपोर्ट: संजीव कुमार शर्मा

Bhagalpur Bhatokhar Pokhar Encroachment बिहार के भागलपुर जिले से सरकारी संपत्तियों और जलाशयों पर अवैध कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आया है। जगदीशपुर प्रखंड के सैनों मौजा में स्थित ऐतिहासिक और सरकारी ‘भतोखर पोखर’ (Bhatokhar Pokhar) पर कुछ भू-माफियाओं द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध कब्जा करने और जमीन की खरीद-बिक्री करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी (DM) को एक विस्तृत आवेदन सौंपकर निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह पोखर क्षेत्र के किसानों की सिंचाई का मुख्य जरिया है, जिसे भू-माफियाओं से बचाना बेहद जरूरी है।

Bhagalpur Bhatokhar Pokhar Encroachment राजस्व रिकॉर्ड और खतियान में दर्ज है सरकारी तालाब

Bhagalpur Bhatokhar Pokhar Encroachment ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र में भतोखर पोखर के सरकारी होने के कई पुख्ता प्रमाण और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं:

  • भूमि का विवरण: यह विवादित स्थल मौजा सैनों (थाना संख्या-429, खाता संख्या-261 और खेसरा संख्या-633, 634 व 635) के अंतर्गत आता है। यह जमीन सरकारी गैरमजरूआ तालाब के रूप में दर्ज है।
  • मत्स्य पालन की सूची में शामिल: ग्रामीणों का दावा है कि यह पोखर जिला मत्स्य पदाधिकारी की जलकर बंदोबस्ती सूची (Fish Farming Settlement List) में भी दर्ज है और वित्तीय वर्ष 2026-27 तक का राजस्व (टैक्स) बाकायदा सरकार के खाते में जमा है।
  • अभिलेखों में हेरफेर का आरोप: आवेदन में कहा गया है कि वर्ष 1966-67 के रिविजनल सर्वे खतियान में यह भूमि स्पष्ट रूप से पोखर के रूप में दर्ज थी। इसके बावजूद कुछ लोगों ने सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ कर एक फर्जी निजी रैयती खाता तैयार कर लिया और बाद में केवाला (रजिस्ट्री) के माध्यम से इसकी अवैध खरीद-बिक्री शुरू कर दी।

Bhagalpur Bhatokhar Pokhar Encroachment ‘चौरमय’ दर्शाकर सरकारी तालाब की रजिस्ट्री का खेल

ग्रामीणों ने इस पूरे फर्जीवाड़े के कानूनी पहलुओं और मुख्य आरोपियों को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं:

  • कानूनी आधार नहीं: बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 (Bihar Land Reforms Act) लागू होने के बाद किसी भी सरकारी गैरमजरूआ तालाब या सार्वजनिक जलाशय को निजी तौर पर बेचने का कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता।
  • पुराने फैसलों का हवाला: आवेदन में वर्ष 1950 के अदालती आदेश, कस्टोडियल सर्वे खतियान, रिविजनल सर्वे अभिलेख और वर्ष 1979 में तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) द्वारा अवैध रूप से मछली पकड़ने के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई का भी जिक्र है, जो इसके सरकारी होने की पुष्टि करते हैं।
  • बांका के खरीदार पर आरोप: ग्रामीणों का आरोप है कि बांका जिले के रजौन थाना क्षेत्र के निवासी लक्ष्मण पासवान ने वर्ष 2005 में कई केवाला के जरिए यह जमीन खरीदी। जिन विक्रेताओं ने यह जमीन बेची, उनके पास स्वामित्व का कोई वैध दस्तावेज नहीं था। इस जालसाजी को छिपाने के लिए रजिस्ट्री के कागजातों में ‘पोखर’ शब्द को हटाकर भूमि को ‘चौरमय’ (दलदली/नीची भूमि) दर्शाया गया।

Bhagalpur Bhatokhar Pokhar Encroachment PMO तक गई शिकायत, पर अब तक कार्रवाई का इंतजार

यह मामला नया नहीं है, बल्कि ग्रामीण पिछले कई वर्षों से इस सरकारी धरोहर को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं:

  • अधिकारियों की उदासीनता: ग्रामीणों ने बताया कि इस भू-माफिया रैकेट की शिकायत उन्होंने वर्ष 2017 में स्थानीय अंचलाधिकारी (CO) समेत कई वरिष्ठ जिला अधिकारियों से की थी।
  • पीएमओ को भी भेजा था पत्र: जिला स्तर से न्याय न मिलने पर ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भी इस संबंध में आवेदन भेजा था। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी धरातल पर अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

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