,

India Ethiopia Relations: इथियोपिया अपने वीर शासकों को क्यों कहता है ‘हिंदू राजन’? 500 साल पुरानी है भारत से जुड़ी कहानी

India Ethiopia Relations

by: vijay nandan

India Ethiopia Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इथियोपिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इथियोपिया के ऐतिहासिक रिश्तों की गहराई को रेखांकित किया। उन्होंने इथियोपिया को ‘शेरों की धरती’ बताते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें अपने घर जैसा अनुभव हो रहा है, क्योंकि भारत में उनका गृह राज्य गुजरात भी शेरों के लिए प्रसिद्ध है। इस संबोधन के साथ ही एक बार फिर यह सवाल चर्चा में आया कि इथियोपिया अपने कुछ वीर शासकों को ‘हिंदू राजन’ क्यों कहता है।

India Ethiopia Relations: केब्रा नागस्त और भारत का संदर्भ

इथियोपिया के सांस्कृतिक इतिहास में ‘केब्रा नागस्त’ नामक ग्रंथ को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह एक मध्यकालीन धार्मिक-राजनीतिक महाकाव्य है, जिसमें राजा सुलेमान, शेबा की रानी और मेनेलिक प्रथम की कथाएं मिलती हैं। इस ग्रंथ में ‘पूर्व की समृद्ध भूमि’ का उल्लेख आता है, जिसे कई विद्वान भारत से जोड़कर देखते हैं। मसाले, सुगंधित पदार्थ, ज्ञान और संपन्नता के वर्णन में भारत की छवि एक दूरस्थ लेकिन समृद्ध सभ्यता के रूप में उभरती है।

India Ethiopia Relations: समुद्री व्यापार से जुड़े प्राचीन रिश्ते

इतिहासकारों के अनुसार, इथियोपिया के प्राचीन अक्सुम साम्राज्य और भारत के बीच लाल सागर और हिंद महासागर के रास्ते व्यापार होता था। भारत से मसाले, वस्त्र और रेशम इथियोपिया पहुंचते थे, जबकि वहां से सोना और हाथीदांत भारत लाया जाता था। यह व्यापारिक संपर्क दोनों सभ्यताओं को सांस्कृतिक रूप से भी जोड़ता गया।

India Ethiopia Relations: ‘हिंदू राजन’ की उपाधि कैसे पड़ी

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार, 16वीं शताब्दी में जब पुर्तगालियों ने इथियोपिया पर हमला किया, तब भारत के कालीकट के शासक ने इथियोपिया की सहायता की थी। इस सहयोग से प्रभावित होकर इथियोपिया ने अपने वीर शासकों के लिए ‘हिंदू राजन’ शब्द का प्रयोग किया। इसका आशय था—साहसी योद्धा और शेरों की धरती का रक्षक। यह उपाधि दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बन गई।

India Ethiopia Relations: आधुनिक दौर में संबंधों का विस्तार

आधुनिक काल में भी भारत और इथियोपिया के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। 19वीं शताब्दी में भारतीय शिक्षक और व्यापारी वहां जाकर बसे। आज इथियोपिया में हजारों भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं। शिक्षा, तकनीक, कृषि और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ता गया।

कूटनीतिक रिश्तों की मजबूत नींव

भारत और इथियोपिया के औपचारिक राजनयिक संबंध 1948 में शुरू हुए और 1950 में इथियोपिया ने भारत में अपना दूतावास खोला। यह किसी अफ्रीकी देश द्वारा भारत में खोला गया पहला दूतावास था। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग निरंतर आगे बढ़ता रहा।

आज भी जीवित है सदियों पुराना रिश्ता

प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की याद दिलाता है कि भारत और इथियोपिया के संबंध केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और मानवीय जुड़ाव से बने हैं, जहां ‘हिंदू राजन’ जैसी उपाधि भी साझा इतिहास की गवाही देती है।

ये भी पढिए: EthiopiaParliament: हाथ जोड़कर बोले PM मोदी, तो तालियों से गूंज उठी इथियोपिया की संसद, मिला सर्वोच्च सम्मान

MCB Ganja Smuggling: दो पिकअप वाहनों से 10 क्विंटल गांजा जब्त, 4 करोड़ की खेप के साथ 4 आरोपी गिरफ्तार

संवाददाता:अविनाश चंद्र MCB Ganja Smuggling में नागपुर हाईवे पुलिस की बड़ी कार्रवाई…