Price Index India : WPI नहीं, अब PPI से देश की चाल तय होगी ,सरकार का नया प्लान, क्या होगा बड़ा बदलाव ?
Price Index India : भारत में महंगाई दर मापने का दशकों पुराना तरीका अब बदलने जा रहा है। केंद्र सरकार अर्थव्यवस्था में महंगाई के वास्तविक रुझानों को समझने के लिए थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) को धीरे-धीरे खत्म करके उसकी जगह प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) लागू करने जा रही है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय 15 जून को साल 2022-23 के नए बेस ईयर के साथ इस नए सिस्टम की शुरुआत करेगा। दरअसल केंद्र सरकार ने देश में थोक महंगाई के आंकलन में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने का एलान किया है। सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने की मंजूरी दे दी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, नई सीरीज को 15 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ ही वैश्विक मानकों को अपनाते हुए भारत पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स PPI भी जारी करने जा रहा है।भारत में कई बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट्स और मूल्य वृद्धि के मामलों में थोक मूल्य सूचकांक का व्यापक इस्तेमाल होता है।

Price Index India : इसलिए सरकार इसे अचानक बंद नहीं कर रही है। नई सीरीज जारी होने की तारीख यानी 15 जून से अगले 5 सालों तक WPI और PPI दोनों को एक साथ जारी किया जाएगा। 5 साल बाद WPI को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा, ताकि उद्योगों और उपयोगकर्ताओं को WPI से PPI पर स्विच करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। WPI से PPI की ओर बढ़ना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली सबसे बेहतरीन पद्धतियों के अनुकूल है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कच्चा माल महंगा होने पर उत्पादक उसका बोझ तैयार माल पर कैसे डालते हैं। पहले चरण में डेटा की उपलब्धता के आधार पर बैंकिंग, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन, इंश्योरेंस, पेंशन फंड मैनेजमेंट, रेलवे, हवाई यात्री, टेलीकॉम जैसी 7 प्रमुख सर्विस के लिए भी सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स जारी किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, इस नई सीरीज में डेटा की गणना करने की तकनीक और गायब होने वाले प्राइस डेटा को भरने की कार्यप्रणाली को पहले से काफी बेहतर और आधुनिक बनाया गया है।
Price Index India : यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बड़े व्यापारिक अनुबंधों पर भी पड़ेगा। वर्तमान में कई ठेकों में कीमत वृद्धि के क्लॉज डब्ल्यूपीआई से जुड़े होते हैं। प्रवीण महतो ने स्पष्ट किया है कि व्यय विभाग जल्द ही एक सर्कुलर जारी करेगा, जिसमें सभी हितधारकों को सलाह दी जाएगी कि वे अपने भविष्य के दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट्स में डब्ल्यूपीआई के बजाय नए पीपीआई सिस्टम का ही इस्तेमाल करें।भारत में थोक महंगाई को मापने के लिए 1942 से डब्ल्यूपीआई का इस्तेमाल हो रहा है, जिसमें अब तक सात बार संशोधन हो चुके हैं। हाल ही में अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर 8.3 प्रतिशत के 42 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। ऐसे में, पीपीआई की ओर यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक पैमानों के समकक्ष लाने और नीति निर्माताओं को महंगाई के खिलाफ अधिक पारदर्शी और सटीक रणनीति बनाने में बड़ी मदद करेगा।

