BY: Yoganand Shrivastva
अजाक्स के प्रांताध्यक्ष और वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष वर्मा एक विवादित बयान के चलते बड़े विवाद में घिर गए हैं। ब्राह्मण समुदाय से जुड़े बयान को लेकर जहां कई संगठनों ने कड़ी नाराज़गी जताई है, वहीं वर्मा ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि उनकी बात को संदर्भों से काटकर पेश किया गया है।
वर्मा के मुताबिक उनका पूरा भाषण 27 मिनट का था, लेकिन सोशल मीडिया पर सिर्फ 2 सेकंड की क्लिप वायरल की गई, जिससे उनकी बात का असली संदर्भ गायब हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समुदाय की बेटी के बारे में ऐसी टिप्पणी करने का उनका कोई इरादा नहीं था और जिस तरह बात को पेश किया गया, उससे उनकी छवि खराब हुई है।
दरअसल, अजाक्स के कार्यक्रम में प्रांताध्यक्ष चुने जाने के दौरान वर्मा के भाषण में कथित तौर पर उन्होंने कहा था कि, “जब तक मेरे बेटे का किसी ब्राह्मण परिवार से रोटी-बेटी का संबंध नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण लागू रहना चाहिए।”
यही हिस्सा वायरल हुआ और विवाद की शुरुआत यहीं से हुई।
सपाक्स और अन्य संगठनों का कड़ा रुख
सपाक्स के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. हीरालाल त्रिवेदी ने वर्मा के बयान को “घटिया और निंदनीय” बताते हुए कहा कि ऐसे अधिकारी को किसी सार्वजनिक पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मांग की कि पुलिस वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करे।
अतिरेकी बयान और इनाम की घोषणा
राष्ट्रीय सनातन सेना के अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल ने बयान को समाज तोड़ने वाला बताते हुए आईएएस वर्मा को “आतंकवादी मानसिकता” तक कह दिया। उन्होंने घोषणा की कि जो भी वर्मा का “मुंह काला करेगा” उसे 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि ऐसे बयान समाज में जातीय विष फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की एकता को ऐसे लोग कमजोर नहीं कर सकते और बेटियों की मर्यादा सर्वोपरि है।
भाजपा प्रदेश मंत्री लोकेन्द्र पाराशर ने भी इस बयान की निंदा की और कहा कि एक उच्च अधिकारी से ऐसी संकीर्ण सोच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की कि वर्मा के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई हो।
ब्राह्मण संगठनों का तीखा विरोध
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने IAS वर्मा की निलंबन और गिरफ्तारी की मांग की है। संगठन का कहना है कि जब केंद्र और राज्य सरकारें बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चला रही हों, तब किसी उच्च पदस्थ अधिकारी की ऐसी टिप्पणी अस्वीकार्य है।
भोपाल हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने भी बयान को अपमानजनक बताते हुए विरोध जताया है।
मंत्रालय कर्मचारियों का रुख
मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ ने भी वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला को ज्ञापन सौंपा। हालांकि मंत्रालय परिसर में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन अंततः नहीं किया गया।
मामला अभी शांत नहीं
IAS संतोष वर्मा ने माफी तो मांग ली है, लेकिन बयान को लेकर विवाद ठंडा होता नहीं दिख रहा। कई संगठन उनकी गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रशासनिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज है।
अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या फैसला लेते हैं।





