वेटिकन में इतिहास रच गया: अमेरिका से चुने गए पहले पोप की भावुक शुरुआत

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From Chicago to the Vatican: Pope Leo XIV’s Powerful Message of Global Solidarity

हिंदू, सिख और जैन धर्मों के प्रतिनिधि भी रहे उपस्थित

by: vijay nandan

वेटिकन सिटी में शनिवार का दिन इतिहास में दर्ज हो गया, जब 69 वर्षीय लियो 14वें ने कैथोलिक चर्च के नए पोप के रूप में पदभार संभाला। खास बात ये है कि वह अमेरिका से चुने गए पहले पोप हैं। सेंट पीटर्स स्क्वायर में आयोजित भव्य प्रार्थना सभा में उन्होंने दुनिया भर के लोगों को एक संदेश दिया— एकता, शांति और मेल-मिलाप का।

“हमारा चर्च एकता का प्रतीक बने”
पोप लियो ने अपने पहले संबोधन में कहा,

मैं चाहता हूं कि हमारी सबसे पहली और सबसे बड़ी इच्छा एक संयुक्त चर्च की हो। ऐसा चर्च जो एकता का प्रतीक बने और पूरी दुनिया के लिए मेल-मिलाप का उदाहरण पेश करे।”

इस मौके पर उन्हें पारंपरिक पोंटिफिकल अंगूठी और धार्मिक वस्त्र पहनाए गए—जो पोप की पहचान का प्रतीक माने जाते हैं। अंगूठी को देखकर उन्होंने सम्मान से सिर झुकाया और फिर हाथ जोड़कर दुनिया की शांति के लिए प्रार्थना की।

वेटिकन में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था


इस ऐतिहासिक दिन के लिए वेटिकन में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। हजारों श्रद्धालुओं के साथ दुनिया भर से आए कार्डिनल्स, बिशप, और पादरी इस समारोह में मौजूद रहे।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जो दिवंगत पोप फ्रांसिस से मिलने वाले अंतिम विदेशी नेताओं में से एक थे, उन्होंने अर्जेंटीना के पोप की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और अमेरिका से पहले पोप बने लियो 14वें को सम्मानित किया।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी इस दौरान उनके साथ मौजूद थे। रुबियो रोम में रूस-यूक्रेन शांति वार्ता के लिए पहले से ही पहुंचे हुए थे।

वैश्विक प्रतिनिधित्व: एक मंच पर सभी धर्म

इस समारोह में विविधता और एकता की झलक भी देखने को मिली।

कौन-कौन रहा मौजूद:

पेरू की राष्ट्रपति डिना बोलुआर्टे

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की

रूस की संस्कृति मंत्री ओल्गा लियुबिमोवा

36 ईसाई चर्चों के प्रतिनिधि

यहूदी समुदाय का 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल (जिसमें से आधे रब्बी थे)

बौद्ध, मुस्लिम, हिंदू, सिख, पारसी और जैन धर्मों के प्रतिनिधि भी रहे उपस्थित

उम्मीदों से भरी एक नई शुरुआत
पोप लियो 14वें की ताजपोशी सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को एकता का संदेश देने वाला क्षण था। उनका पहला संदेश बेहद साफ था— चर्च को एकजुटता का केंद्र बनाना है।

इस ऐतिहासिक क्षण ने यह साबित कर दिया कि भले ही हम धर्म, देश या संस्कृति से अलग हों, लेकिन शांति और मानवता के लिए एक साथ खड़ा होना ही असली आस्था है।