Report: Neha gupta
Dr Kumar Dwijendra Sambhavna School Ara 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के विशेष अवसर पर स्थानीय ‘शान्ति स्मृति’ सम्भावना आवासीय उच्च विद्यालय (शुभ नारायण नगर, मझौवों, आरा) में भव्य ‘सामूहिक योग अभ्यास शिविर’ का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। इस उत्सव का औपचारिक शुभारंभ विद्यालय के प्रबंध निदेशक डॉ० कुमार द्विजेन्द्र और प्राचार्या डॉ० अर्चना सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस योग शिविर में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया।
Dr Kumar Dwijendra Sambhavna School Ara “योग सिर्फ शरीर को नहीं, मानवता को भी जोड़ता है” — प्राचार्या डॉ. अर्चना सिंह
उद्घाटन सत्र के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विद्यालय की प्राचार्या डॉ० अर्चना सिंह ने योग के दार्शनिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक और मानसिक दृढ़ता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी बुद्धि को प्रखर करते हुए पूरी मानवता को आपस में जोड़ता है। प्राचार्या ने जोर देकर कहा, “योग इंसान के भीतर की हिंसा, क्रूरता, कट्टरता और विनाशकारी दृष्टिकोण को बदलकर सात्विक व सकारात्मक विचारों का संचार करता है।” उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक विज्ञान ने भी अब स्वीकार कर लिया है कि नियमित योग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है और विश्व की कई गंभीर समस्याओं का समाधान योग विज्ञान में ही छिपा है।
Dr Kumar Dwijendra Sambhavna School Ara पतंजलि के अष्टांग सूत्रों से सीखें जीवन जीने की कला — प्रबंध निदेशक डॉ. कुमार द्विजेन्द्र
समारोह की अध्यक्षता कर रहे विद्यालय के प्रबंध निदेशक डॉ० कुमार द्विजेन्द्र ने भारतीय शास्त्रों में निहित योग की समृद्ध परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हमारे ऋषियों-मुनियों ने योग के गूढ़ रहस्यों को सूत्रों और मंत्रों के माध्यम से बेहद सरल रूप में समाज के सामने रखा है। महर्षि पतंजलि का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अष्टांग योग के आठ सूत्र— यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि— वास्तव में श्रेष्ठ जीवन जीने की कला हैं। उन्होंने ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ (कर्मों में कुशलता ही योग है) जैसे प्राचीन सुभाषितों के जरिए विद्यार्थियों को अनुशासन और कर्मठता का पाठ पढ़ाया।
Dr Kumar Dwijendra Sambhavna School Ara आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर खरा उतरा भारतीय योग: योग शिक्षक शशीभूषण सिंह
इस शिविर में सामूहिक योगाभ्यास का संचालन विद्यालय के योग शिक्षक श्री शशीभूषण सिंह ने कराया। प्राणायाम और आसनों की बारीकियों को सिखाते हुए उन्होंने कहा कि योग हमें स्वस्थ रहने, सकारात्मक सोचने और आपस में प्रेम से रहने का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा, “भारत की यह प्राचीन विद्या आज आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरकर कुंदन बन चुकी है और यही वजह है कि आज पूरा विश्व इसे स्वीकार कर रहा है।” अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इसी वैश्विक स्वीकार्यता का एक प्रतीकात्मक संदेश है और आने वाले समय में मानव कल्याण के क्षेत्र में इसकी प्रगति की असीम संभावनाएं हैं।





