RSS Gen Z Strategy : चल पड़ी नई बयार, देश की राजनीति में Gen- Z की भूमिका पर बात,भागवत का युवाओं से जुड़ने का उद्देश्य,कितना खत्म करेगा असंतोष ?
RSS Gen Z Strategy : दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए युवा आंदोलन के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नई पीढ़ी यानी ‘जेन-जी’ (Gen-Z) और ‘जेन अल्फा’ (Gen Alpha) के रुख को भांपते हुए अपनी संवाद शैली में बदलाव करना शुरू कर दिया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत अब नई पीढ़ी के सीधे सवालों से जुड़ने और उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए विशेष संवाद कार्यक्रमों की तैयारी कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर युवाओं के मुखर प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि अब पुरानी पीढ़ी की तरह केवल ‘आज्ञाकारिता’ या आंख मूंदकर समर्थन करने का दौर खत्म हो चुका है। युवाओं ने सीधे तौर पर पारदर्शिता, रोजगार और शिक्षा तंत्र में खामियों को लेकर सत्ता के सामने कड़े सवाल खड़े किए। इस नए तेवर वाले आंदोलन ने राजनीतिक दलों और वैचारिक संगठनों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि वे नई पीढ़ी के मिजाज को नजरअंदाज नहीं कर सकते। और इसलिए ये माना जा रहा है कि विरोध के स्वर को काउंटर करने या केवल आलोचना करने के बजाय आरएसएस अब नई जनरेशन के बीच जाकर उनकी भाषा और आकांक्षाओं को समझने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में संघ की इस रणनीति के क्या मायने है और भविष्य में कितना प्रभाव देखने को मिलेगा ? इसी पर करेंगे चर्चा उससे पहले देखिये ये रिपोर्ट |
RSS Gen Z Strategy : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मुंबई में देश की युवा पीढ़ी यानी Gen- Z और Gen-Alpha के हजारों छात्रों के साथ एक विशेष संवाद किया | इस संवाद को राजनीतिक और सामाजिक जानकार भारतीय संघ व्यवस्था का एक ऐतिहासिक मोड़ मान रहे हैं. खासकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलनों के बाद हुए विवाद के बाद देश की भावी राजनीति और संघ के स्वरूप को लेकर कई बड़े संकेत आ सकते हैं… इस आंदोलन में Gen- Z की राजनीतिक सक्रियता और उनके तीखे तेवर स्पष्ट रूप से देखने को मिले थे… इस आंदोलन का समापन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म तो हो गया लेकिन आरएसएस को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर कहां और कैसे चूक हुई? जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था, ‘आज के युवा भटके नहीं हैं, बल्कि उन्हें सही मार्गदर्शन और संवाद की जरूरत है,’ उन्होंने स्पष्ट रूप से माना था कि अब केवल ‘आज्ञाकारिता का दौर खत्म हो चुका है’ और युवाओं से संवाद स्थापित करने के लिए उनसे सीधे सवाल-जवाब की संस्कृति को अपनाना होगा…
RSS Gen Z Strategy : जंतर मंतर के प्रदर्शन के बाद एक सवाल सभी के जहन में आया कि आने वाला समय क्या इन genz और जेन अल्फा का होगा और इसलिए आरएसएस प्रमुख ने बिना देरी किये आज का ये संवाद रखा जिसमे उन्होंने छात्रों से संवाद कर कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर बात की |इस समय नई पीढ़ी केवल पारंपरिक नारों या विचारधारा के आधार पर साथ नहीं आएगी, बल्कि उनके जमीनी मुद्दों, जैसे शिक्षा, रोजगार, निष्पक्ष परीक्षाएं और डिजिटल लाइफस्टाइल पर खुलकर बात करनी होगी…विशेषज्ञ मानते है कि जिस तरह 1925 में समाज की जरूरतें अलग थीं, आज 2026 के भारत में युवाओं की सोच, आकांक्षाएं और प्रश्न पूरी तरह अलग हैं. जंतर-मंतर जैसे छात्र आंदोलनों ने यह साबित कर दिया है कि यदि संवाद में गैप रहेगा, तो युवा आक्रोशित होंगे. मोहन भागवत का सीधे Gen- Z से मिलना यह दर्शाता है कि संघ युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उन्हें सुनने और उनका नेतृत्व करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है….जिसका देश की भावी राजनीति में अहम रोल होगा |
RSS Gen Z Strategy : कुल मिलाकर, जंतर-मंतर पर नीट छात्रों के आंदोलन के बाद संघ प्रमुख का सीधे Gen- Z और Gen- Alpha से जुड़ने का फैसला यह साबित करता है कि भारतीय राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में अब नई पीढ़ी का दबदबा बढ़ रहा है और देश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन भी इस नई बयार के साथ खुद को ढालने के लिए पूरी तरह तैयार है…संघ प्रमुख मोहन भागवत के मुंबई और अन्य मंचों पर युवाओं से सीधे जुड़ने के कार्यक्रम इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा हैं, ताकि युवाओं के असंतोष को पाटा जा सके। ऐसे में संघ की ये रणनीति कितनी सफल होगी ये देखने वाली बात होगी |

