BCCI: भारतीय क्रिकेट टीम में लगातार बढ़ रही चोटों और खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सख्त रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड ने टीम के मुख्य फिजियो कमलेश जैन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी खिलाड़ी की फिटनेस में कमी नजर आने पर बिना किसी दबाव के इसकी जानकारी दें। बताया जा रहा है कि खिलाड़ियों के नाम, अनुभव या स्टारडम से ऊपर टीम की फिटनेस और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी।
BCCI: लगातार चोटों ने बढ़ाई बीसीसीआई की चिंता
पिछले कुछ समय में भारतीय टीम के कई अहम खिलाड़ी चोटों के कारण महत्वपूर्ण सीरीज और बड़े टूर्नामेंट से बाहर रहे हैं। इससे टीम के प्रदर्शन पर असर पड़ा है। इसी को देखते हुए बीसीसीआई अब खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर पहले से ज्यादा गंभीर नजर आ रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार बोर्ड का मानना है कि फिटनेस के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही भविष्य में टीम के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
BCCI: फिटनेस मानकों को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में अलग-अलग खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग फिटनेस मानक अपनाए जा रहे थे। आरोप है कि कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को फिटनेस टेस्ट पास करने के लिए अपेक्षाकृत आसान मानदंड दिए गए, जबकि अन्य खिलाड़ियों के लिए अलग स्तर निर्धारित किए गए थे।
हालांकि इन दावों पर बीसीसीआई की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
BCCI: ब्रोंको टेस्ट बना नया फिटनेस पैमाना
रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रूक्स के आने के बाद पारंपरिक यो-यो टेस्ट की जगह अब ब्रोंको टेस्ट को अधिक महत्व दिया जा रहा है।
ब्रोंको टेस्ट को खिलाड़ियों की स्पीड, स्टैमिना और रिकवरी क्षमता मापने का बेहतर पैमाना माना जाता है। बताया जा रहा है कि इस बदलाव के बाद खिलाड़ियों के लिए फिटनेस मानकों को पूरा करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
BCCI: कुछ खिलाड़ियों को आसान पैरामीटर मिलने का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पिछले एक वर्ष के दौरान कुछ खिलाड़ियों के लिए बेस फिटनेस पैरामीटर अलग-अलग तय किए गए थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टीम की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ खिलाड़ियों को फिटनेस क्लीयरेंस देने में अपेक्षाकृत नरमी बरती गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
BCCI: मैदान पर प्रदर्शन को लेकर भी चिंता
बीसीसीआई की चिंता सिर्फ चोटों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार बोर्ड खिलाड़ियों की मैदान पर गति, फुर्ती और फील्डिंग स्तर को लेकर भी गंभीर है।
बताया गया है कि कुछ वरिष्ठ बल्लेबाज लंबी पारी खेलने के बाद विकेटों के बीच दौड़ने में संघर्ष करते नजर आए हैं। वहीं फील्डिंग के दौरान भी खिलाड़ियों की चुस्ती और मूवमेंट को लेकर सवाल उठे हैं।
BCCI: कमलेश जैन को दिए गए स्पष्ट निर्देश
रिपोर्ट के मुताबिक, टीम के मुख्य फिजियो कमलेश जैन से कहा गया है कि फिटनेस के मामले में किसी भी खिलाड़ी के कद या अनुभव को ध्यान में न रखा जाए।
यदि किसी खिलाड़ी की फिटनेस या मूवमेंट संतोषजनक नहीं लगती है, तो उसकी जानकारी तुरंत बोर्ड और टीम प्रबंधन तक पहुंचाई जाए। बोर्ड चाहता है कि खिलाड़ियों की उपलब्धता और प्रदर्शन से पहले उनकी फिटनेस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
BCCI: फिटनेस संस्कृति को मजबूत करना चाहता है बोर्ड
भारतीय क्रिकेट में लगातार बढ़ते मुकाबलों और व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को देखते हुए बीसीसीआई अब फिटनेस संस्कृति को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
माना जा रहा है कि आने वाले समय में खिलाड़ियों की फिटनेस जांच, रिहैब प्रक्रिया और मैच फिटनेस से जुड़े मानकों को और अधिक सख्त बनाया जा सकता है, ताकि टीम के प्रमुख खिलाड़ी लंबे समय तक फिट रहें और बड़े टूर्नामेंट में लगातार उपलब्ध रह सकें।



