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वक्फ पर SC में जोरदार बहस: SG तुषार मेहता बोले – “दान सभी धर्मों में है, वक्फ अनिवार्य नहीं”

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BY: Yoganand Shrivastva

नई दिल्ली वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष वक्फ की अवधारणा और इससे जुड़ी कानूनी व धार्मिक बारीकियों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

वक्फ इस्लामिक जरूर, पर इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं: SG मेहता

तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि वक्फ की अवधारणा इस्लामिक है, लेकिन यह इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग नहीं है। उन्होंने कहा, “दान हर धर्म में होता है – हिंदू धर्म में ‘दान’, ईसाइयों में ‘चैरिटी’, सिखों में ‘सेवा’, इसी तरह इस्लाम में वक्फ। लेकिन किसी भी धर्म में इसे पालन करना बाध्यकारी नहीं है।”

SG ने यह भी स्वीकार किया कि वक्फ के वास्तविक अर्थ और इसकी प्रणाली के बारे में उन्हें गहराई से रिसर्च करने के बाद जानकारी मिली।

“वक्फ बोर्ड की भूमिका सीमित है”

सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड केवल निगरानी की भूमिका निभाता है। इसका सीधा संबंध धार्मिक कार्यों से नहीं होता। उन्होंने कहा, “वक्फ बोर्ड किसी मुतवल्ली को तभी हटा सकता है जब वह कानून का उल्लंघन करता हो। बोर्ड में मुस्लिमों की पर्याप्त भागीदारी पहले से ही है।”

मुख्य न्यायाधीश ने पूछा—क्या सेक्शन 3D जेपीसी को दिखाया गया था?

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने पूछा कि क्या वक्फ एक्ट का सेक्शन 3D संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के सामने रखा गया था। जवाब में मेहता ने कहा, “हां, विधेयक संसद में पेश किया गया और पारित भी हुआ।”

“100 साल पुरानी संपत्ति का रिकॉर्ड कहाँ से लाएं?”

तुषार मेहता ने उन आरोपों को खारिज किया जिसमें कहा गया कि वक्फ संपत्तियों के कोई ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अगर कोई कहता है कि वक्फ 100 साल पुराना है, तो वह हालिया वर्षों के दस्तावेज प्रस्तुत करे। पहले के कानून (1923 अधिनियम) के तहत भी कहा गया था कि यदि आपके पास दस्तावेज़ नहीं हैं, तो उपलब्ध जानकारी ही दी जा सकती है।”

“हिंदू मंदिरों में भी सरकारी नियंत्रण है”

SG मेहता ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कई राज्यों में मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति राज्य सरकार तय करती है, वैसे ही वक्फ बोर्ड भी केवल प्रशासनिक भूमिका निभाता है, वह धार्मिक कार्यों में दखल नहीं देता। उन्होंने कहा कि यह एक झूठा नैरेटिव फैलाया जा रहा है कि किसी की संपत्ति हड़प ली जाएगी।

रजिस्ट्रेशन का मौका अब भी खुला है

वर्तमान वक्फ अधिनियम के तहत संपत्ति के रजिस्ट्रेशन को लेकर उठ रहे सवालों पर मेहता ने बताया कि पहले कानून में तीन महीने का समय होता था, अब छह महीने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो रजिस्ट्रेशन अब तक नहीं करवा सके हैं, उन्हें अभी भी मौका दिया जा रहा है। वक्फ बाय यूज़र को रजिस्ट्रेशन से छूट देना, ऐसी प्रक्रिया को स्वीकार करना होगा जो शायद शुरू से ही गलत रही हो।

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