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कोरोना गया नहीं, अभी भी है पास! एम्स भोपाल और आईसीएमआर की रिपोर्ट ने खोली पोल

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कोरोना गया नहीं, अभी भी है पास! एम्स भोपाल और आईसीएमआर की रिपोर्ट ने खोली पोल

आज हम बात करेंगे एक ऐसे सवाल की जो हर किसी के मन में घूम रहा है – क्या कोविड-19 अब सचमुच खत्म हो गया है? पिछले कुछ महीनों से न तो इसके केस सुनाई दे रहे हैं और न ही इसकी ज्यादा चर्चा हो रही है। लेकिन हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और एम्स भोपाल की एक स्टडी ने सबको चौंका दिया है। तो चलिए, इस रिपोर्ट को देसी अंदाज में समझते हैं और जानते हैं कि आखिर माजरा क्या है।


कोरोना की शुरुआत और उसका कहर

याद है ना, 2019 के आखिरी दिनों में जब चीन से ये वायरस निकला था? देखते ही देखते पूरी दुनिया में कोहराम मच गया। खासकर 2021 में डेल्टा वैरिएंट ने तो हाहाकार मचा दिया था। लाखों लोगों की जिंदगी छीन ली इसने। फिर समय के साथ नए-नए वैरिएंट आए, लेकिन धीरे-धीरे इसके मामले कम होते गए। अब तो ऐसा लगता है जैसे ये बस एक पुरानी कहानी बनकर रह गया हो। लेकिन क्या सचमुच ऐसा है?


क्या खत्म हो गया कोरोना का डर?

आजकल तो कोविड की बातें सुनाई ही नहीं देतीं। वैश्विक स्तर पर इसके केस भी बहुत कम हो गए हैं। लेकिन डॉक्टर और वैज्ञानिक बार-बार चेता रहे हैं कि ये वायरस कहीं गया नहीं है। ये आरएनए वायरस है, जो हर बार म्यूटेट करके नया रूप ले सकता है। मतलब, ये चुपके से फिर से हमला बोल सकता है। इसीलिए सावधानी बरतना तो बनता है, भाई!

कोरोना गया नहीं, अभी भी है पास! एम्स भोपाल और आईसीएमआर की रिपोर्ट ने खोली पोल

एम्स भोपाल और आईसीएमआर की चौंकाने वाली रिपोर्ट

आईसीएमआर और एम्स भोपाल की ताजा स्टडी में साफ कहा गया है कि कोरोना अभी भी हमारे आसपास मंडरा रहा है। भले ही इसके मरीज हॉस्पिटल में नजर न आ रहे हों, लेकिन ये वायरस हवा, पानी और गंदगी में जिंदा है। खासकर सीवेज और मल में इसके टुकड़े मिले हैं, जो एक्टिव रह सकते हैं और फिर से फैलने की ताकत रखते हैं।

शोधकर्ताओं ने अलग-अलग जगहों से गंदे पानी और मल के सैंपल लिए और जांच में पाया कि वायरस अभी भी मौजूद है। मतलब, अगर गंदे पानी के संपर्क में आए तो ये फिर से फैल सकता है। अब तो देश के कई हिस्सों में इसकी जांच शुरू हो गई है कि कहीं और तो नहीं छुपा ये शैतान!


वायरस का म्यूटेशन और नया खतरा

वैज्ञानिक कहते हैं कि ये वायरस अपनी जान बचाने के लिए बार-बार रूप बदलता रहता है। नए वैरिएंट का खतरा अभी टला नहीं है। हां, वैक्सीन और हर्ड इम्युनिटी की वजह से इसका असर कम हुआ है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम बेफिक्र हो जाएं। अलर्ट रहना तो पक्का जरूरी है।


सीवेज से नया सिस्टम बनाने की तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईसीएमआर अब एक ऐसा सिस्टम बना रहा है जो पहले ही बता दे कि कहीं कोई नया संक्रमण तो नहीं पनप रहा। कुछ देशों में तो ऐसा सिस्टम पहले से चल रहा है। हमारे यहां भी अगर ये लागू हो गया तो संक्रमण को पहले ही पकड़ना आसान हो जाएगा


पिछले साल की चर्चा: XEC वैरिएंट

पिछले साल अगस्त-सितंबर में यूरोप में एक्सईसी वैरिएंट की खबरें आई थीं। ये वैरिएंट इम्युनिटी को चकमा देने में माहिर था। कमजोर लोगों के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता था। लेकिन धीरे-धीरे इसके केस भी कम हो गए।


चीन से नया वायरस अलर्ट

हाल ही में चीन में एक नया वायरस एचकेयू5-सीओवी-2 मिला है, जो कोविड से मिलता-जुलता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये भी सांस की बीमारियां फैला सकता है और तेजी से इंसानों में पहुंच सकता है। क्या ये नई मुसीबत का संकेत है? अभी इस पर रिसर्च जारी है।


तो क्या करें हम?

दोस्तों, ये रिपोर्ट बताती है कि भले ही कोविड का शोर कम हो गया हो, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। साफ-सफाई रखें, गंदे पानी से बचें और सेहत का ध्यान रखें। वैक्सीन ने हमें ताकत दी है, लेकिन ढील देना ठीक नहीं। अलर्ट रहो, सुरक्षित रहो!

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