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Thai Mangur : यदि आप मछली खाने के शौकीन हैं तो ये फिश है जानलेवा, 26 साल से भारत में है बैन

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by : vijay yadav

Thai Mangur : मछली खाने के शौकीन लोगों के लिए थाई मांगुर का नाम शायद नया नहीं है। कम कीमत और तेजी से बढ़ने की वजह से यह मछली कुछ इलाकों में चोरी-छिपे बेची और पाली जाती रही है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर सरकार ने इस मछली के पालन, प्रजनन, परिवहन और आयात पर रोक क्यों लगा रखी है? हाल ही में महाराष्ट्र के नागपुर में हुई बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर थाई मांगुर को चर्चा में ला दिया है।

नागपुर के पारशिवनी तहसील के चिंचोली-महादुला क्षेत्र में मत्स्य विभाग ने 11 तालाबों पर कार्रवाई करते हुए 36 टन से अधिक प्रतिबंधित थाई मांगुर बरामद की। अधिकारियों के मुताबिक मछलियों को तालाबों से निकालकर गड्ढों में दफन कर नष्ट किया गया। विभाग के अनुसार पिछले तीन महीनों में नागपुर क्षेत्र में करीब 51 टन थाई मांगुर के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

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Thai Mangur : क्या होती है थाई मांगुर?

जिसे आम बोलचाल में थाई मांगुर कहा जाता है, वह मूल रूप से अफ्रीकी कैटफिश यानी Clarias gariepinus है। इसे भारतीय देसी मांगुर Clarias batrachus से अलग समझना जरूरी है। दोनों की पहचान को लेकर कई बार भ्रम की स्थिति सामने आती है।

अफ्रीकी कैटफिश बेहद अनुकूलन क्षमता वाली मछली मानी जाती है। कम ऑक्सीजन वाले और खराब गुणवत्ता वाले पानी में भी इसके जीवित रहने की क्षमता इसे दूसरी कई मछलियों से अलग बनाती है। इसी वजह से अवैध रूप से इसका पालन करने वाले लोग इसे कम लागत में तेजी से बढ़ने वाली मछली के तौर पर देखते हैं।

Thai Mangur : सरकार ने क्यों लगाया प्रतिबंध?

थाई मांगुर पर रोक का सबसे बड़ा कारण केवल इसे खाने से जुड़ा सवाल नहीं, बल्कि जलीय जैव विविधता और देशी मछलियों पर इसका प्रभाव है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण के हालिया दस्तावेजों में दर्ज सरकारी जानकारी के मुताबिक भारत सरकार ने 19 दिसंबर 1997 के पत्र के जरिए विदेशी मांगुर यानी Clarias gariepinus के पालन पर रोक लगाई थी। बाद में 2013 और 2019 में संबंधित विभागों ने इस प्रतिबंध को फिर स्पष्ट किया। वजह यह थी कि यह प्रजाति देश के स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और मत्स्य संसाधनों के लिए खतरा पैदा कर सकती है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इस मछली पर वर्ष 2000 में एनजीटी ने प्रतिबंध लगाया था। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना ही 2010 में हुई थी। प्रतिबंध से जुड़ी शुरुआती सरकारी कार्रवाई इससे पहले की है।

Thai Mangur : देशी मछलियों के लिए क्यों खतरा?

अफ्रीकी कैटफिश एक शिकारी प्रजाति है। यदि यह खुले जलस्रोतों में फैल जाए तो छोटी देशी मछलियों और दूसरे जलीय जीवों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे स्थानीय मछली प्रजातियों की संख्या प्रभावित होने की आशंका रहती है।

भारत में विदेशी जलीय प्रजातियों को लेकर वैज्ञानिकों ने लंबे समय से चिंता जताई है। एक शोध में उत्तर प्रदेश के कई तालाबों में Clarias gariepinus के अवैध पालन और उसे बूचड़खानों, चिकन व मछली के कचरे से खिलाए जाने की जानकारी दर्ज की गई थी। शोधकर्ताओं ने इसके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी चेतावनी दी थी।

Thai Mangur : क्या इसे खाने से कैंसर होता है?

थाई मांगुर को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जाते हैं, जिनमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का सीधा खतरा बताया जाता है। ऐसे दावों को बिना वैज्ञानिक प्रमाण के निश्चित तथ्य मानना सही नहीं है।

असल चिंता यह है कि मछली जिस पानी में पाली जाती है और उसे क्या खिलाया जाता है, उससे उसकी खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। प्रदूषित पानी में रहने वाली किसी भी मछली में दूषित पदार्थों के जमा होने का जोखिम हो सकता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में मछलियों में भारी धातुओं के जैव-संचय और उससे मानव स्वास्थ्य पर संभावित जोखिम का अध्ययन किया गया है।

इसके अलावा 2026 के एक अध्ययन में अफ्रीकी कैटफिश में भारी धातुओं और परजीवी संक्रमण के संयुक्त प्रभावों से स्वास्थ्य संबंधी जैव-रासायनिक बदलाव दर्ज किए गए हैं।

इसलिए यह कहना ज्यादा उचित है कि प्रतिबंधित थाई मांगुर को खरीदना या खाना खाद्य सुरक्षा और कानूनी दोनों दृष्टि से जोखिमपूर्ण हो सकता है, खासकर जब उसके पालन और पानी की गुणवत्ता का कोई भरोसेमंद रिकॉर्ड न हो।

Thai Mangur : खरीदते समय रहें सावधान

मछली खरीदते समय केवल कम कीमत देखकर फैसला न करें। दुकानदार से मछली की प्रजाति और उसके स्रोत के बारे में जानकारी लें। थाई मांगुर और देसी मांगुर के बीच अंतर को लेकर भ्रम हो सकता है, इसलिए शक होने पर स्थानीय मत्स्य विभाग या संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेना बेहतर है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिबंधित प्रजाति की खरीद-बिक्री या पालन से बचें। नागपुर की हालिया कार्रवाई बताती है कि प्रशासन अवैध थाई मांगुर पालन के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है।

थाई मांगुर का मामला केवल मछली खाने या न खाने का सवाल नहीं है। इसके पीछे पर्यावरण संरक्षण, देशी मछलियों की सुरक्षा, अवैध मत्स्य पालन और खाद्य सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे जुड़े हैं। इसलिए बाजार में मछली खरीदते समय जागरूक रहना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

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