संविधान दिवस: एक ही मंच पर प्रधानमंत्री मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, दलों में दिखी एकता

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by: vijay nandan

नई दिल्ली: संविधान दिवस के अवसर पर पुरानी संसद (अब संविधान सदन) के सेंट्रल हॉल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारतीय राजनीति की विविध आवाज़ें एक साथ सुनाई दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और विपक्ष के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई शीर्ष हस्तियां एक ही मंच पर मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की। मंच पर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, राज्यसभा में सत्ता पक्ष के नेता जेपी नड्डा, लोकसभा और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, तथा संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी उपस्थित थे। नेताओं ने इस अवसर पर भारतीय संविधान के मूल्यों न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता को सुदृढ़ बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

दो दिन पहले शपथ ग्रहण पर विवाद, आज दिखा साझा मंच

कार्यक्रम से पहले राजनीति में एक छोटा विवाद भी सामने आया था। 24 नवंबर को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर भाजपा ने उन्हें कठघरे में खड़ा किया था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि इस तरह अनुपस्थित रहना संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. आंबेडकर और संविधान के प्रति अनादर दर्शाता है हालांकि बुधवार के कार्यक्रम में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे भी मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम में राजनीतिक संतुलन और गंभीरता का संदेश गया।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

नेताओं ने अपने वक्तव्यों में कहा कि संविधान केवल विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भारत की आधारशिला है। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर भी जोर दिया गया, और इसे संविधान के आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ने का रास्ता बताया गया।

राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि “भारत का संविधान हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। यह औपनिवेशिक मानसिकता से आगे बढ़कर राष्ट्रवादी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है।” उन्होंने हाल में लागू भारतीय न्याय संहिता का उल्लेख करते हुए कहा कि नई व्यवस्था दंड के भय के बजाय न्याय के मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने संसद सदस्यों को धन्यवाद देते हुए कहा कि कई महत्वपूर्ण सुधार गहन विमर्श के बाद लागू किए गए, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की सार्थकता को दर्शाते हैं।