झारखंड़ में घोटाले का ‘सीजी मॉडल’, CBI के रडार पर सीएम हेमंत सोरेन !  

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'CG model' of scam in Jharkhand, Hemant Soren on CBI's radar!

BY: VIJAY NANDAN

आज बात एक ऐसे मामले कि  जो सिर्फ घोटाले तक सीमित नहीं…बल्कि इसकी गूंज झारखंड से छत्तीसगढ़ और वहां से होते हुए बिहार चुनाव तक जा पहुंची है! 450 करोड़ के कथित शराब घोटाले में अब CBI की एंट्री हो चुकी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि ये जांच वाकई भ्रष्टाचार की परतें खोलेगी… या किसी राजनीतिक स्क्रिप्ट का हिस्सा है? झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक बार फिर जांच के घेरे में हैं…लेकिन FIR छत्तीसगढ़ में क्यों दर्ज हुई? क्या ये सिर्फ सिस्टम की नाकामी है या चुनावी रणनीति का हिस्सा? इस सियासी फिल्म का डायरेक्टर कौन है? और किरदारों का चुनाव किसने किया? इसी पर करेंगे चर्चा  जहां खोलेंगे राजनीतिक चालों के राज…और उठाएंगे..पर्दा उस सिस्टम से, जो सत्ता और शराब के खेल को चलाता है ! )

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक बार फिर मुश्किलों में घिर सकते हैं…इस बार मामला है कथित 450 करोड़ रुपये के शराब घोटाले का…सूत्रों की मानें तो इस घोटाले की जांच अब CBI को सौंपी जा चुकी है, जो जल्द ही पड़ताल शुरू करने वाली है। लेकिन… ये मामला जितना सीधा दिखता है, उतना है नहीं। दरअसल, यह घोटाला झारखंड में हुआ – लेकिन FIR छत्तीसगढ़ में दर्ज हुई। FIR दर्ज करवाई रांची के कारोबारी विकास सिंह द्वारा… और आरोप चौंकाने वाले हैं — कि छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने मिलकर झारखंड में घोटाला किया। यानी… एक राज्य की स्क्रिप्ट, दूसरे राज्य में एक्ट! CBI जांच अगर आगे बढ़ी… तो इसका असर छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा समेत कई अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आएगी।

इसमें ट्विस्ट ये है: कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की जिस शराब नीति को लेकर 2100 करोड़ का घोटाला सामने आया था… उसी नीति की कॉपी-पेस्ट स्कीम झारखंड में भी लागू की गई। इतना ही नहीं, इसके लिए बाकायदा झारखंड विधानसभा से प्रस्ताव पारित कराया गया।

अब सवाल ये है कि… क्या वाकई भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं? या एक बार फिर आदिवासी चेहरों को राजनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है? एक ओर सीएम हेमंत सोरेन पहले से ही जमीन घोटाले में जेल जा चुके हैं…उसके बाद वे जनता की अदालत से बरी होकर फिर मुख्यमंत्री बन गए। पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव भी घिरे हुए हैं.. लेकिन असली सवाल यहां से शुरू होता है

झारखंड़ में घोटाले का ‘सीजी मॉडल’ 

•             ये FIR झारखंड में क्यों नहीं हुई?

•             क्या इसे राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है?

•             क्या ये सब कुछ बिहार चुनाव से पहले की सियासी स्क्रिप्ट का हिस्सा है?

दरअसल, झारखंड और बिहार की सीमाओं पर आदिवासी और झारखंडी प्रवासियों की अच्छी-खासी आबादी है। (GFX IN) ऐसे में झारखंड के ‘भ्रष्टाचार मॉडल’ को उछालना, बीजेपी को सीमावर्ती सीटों पर राजनीतिक लाभ दे सकता है। सीएम हेमंत सोरेन की छवि को कमजोर कर महागठबंधन को चोट पहुंचाना भी इसका मकसद हो सकता है…राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर यही चर्चा जोरों पर है..कहते हैं राजनीति में वक्त का चुनाव सबसे बड़ा दांव होता है…और इस बार, झारखंड का घोटाला..बिहार के वोटों को हिला सकता है! (GFX OUT

झारखंड शराब घोटाले से सियासी लाभ !

  • बीजेपी को सीमावर्ती सीटों पर राजनीतिक लाभ दे सकता है
  •  सीएम हेमंत सोरेन पर निशाना साध, महागठबंधन को चोट पहुंचाना
  • राजनीतिक गलियारों में इस रणनीति पर जोरों की चर्चा
  • राजनीति में वक्त का चुनाव सबसे बड़ा दांव
  • झारखंड का घोटाला, बिहार के वोटों को हिला सकता है

दो राज्यों के अधिकारियों की सांठगांठ से हुए इस कथित शराब घोटाले पर… अब वक्त है जवाब तलाशने का.. क्या वाकई ये सिर्फ घोटाला है… या इसके पीछे रची गई है कोई सियासी पटकथा है। यदि है तो इस सियासी फिल्म का डायरेक्टर कौन है? और किरदारों का चुनाव किसने किया? जुड़िए हमारे साथ… इस एक घंटे की तीखी डिबेट में, जहां खुलेंगे राजनीतिक चालों के राज…और उठेगा पर्दा उस सिस्टम से, जो सत्ता और शराब के खेल को चलाता है!

झारखंड में घोटाल, छत्तीसगढ़ में FIR

छत्तीसगढ़ ACB- EOW ने 7 सितंबर को FIR दर्ज की थी

तत्कालीन IAS अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरूणपति त्रिपाठी

शराब सिंडिकेट झारखंड के अधिकारियों के साथ मिले

साजिश के तहत झारखंड की आबकारी नीति में फेरबदल किया

राज्य में देशी और विदेशी शराब का टेंडर भी सिंडिकेट के लोगों को दिलवाया

झारखंड में बिना हिसाब की डूप्लीकेट होलोग्राम लगी देशी शराब की बिक्री की गई

विदेशी शराब की सप्लाई का काम नियम बनाकर करीबी एजेंसियों को दिलाया

कंपनियों से करोड़ों रुपए का अवैध कमीशन लिया

CBI जांच के नियम

CBI को किसी राज्य में जाकर जांच शुरू करने के लिए राज्य सरकार की सहमति लेनी होती है

सामान्य सहमति: CBI बिना अनुमति लिए राज्य में जांच कर सकती है

विशेष सहमति: राज्य सरकार ने General Consent वापस ले ली हो, तो CBI को अनुमति लेनी पड़ती है

अगर राज्य सरकार CBI को अनुमति नहीं देती, तब बड़ी अदालतें CBI जांच का आदेश दे सकती हैं

मामला केंद्र या कई राज्यों में फैला हो तब केंद्र सरकार CBI को जांच सौंप सकती है

ऐसे मामलों में कोर्ट या संबंधित राज्य की सहमति जरूरी मानी जाती है

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