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BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के दिग्गज, पुतिन पहुंचे भारत; मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर टिकी नजर

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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच चुकी हैं। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाली इस अहम बैठक में भारत समेत ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों के शीर्ष नेता शामिल होंगे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को भारत पहुंचेंगे। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुतिन और जिनपिंग के साथ होने वाली बातचीत पर खास नजर रहेगी।

BRICS Summit 2026: पुतिन दिल्ली पहुंचे, मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत पर नजर

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार सुबह नई दिल्ली पहुंच गए। एयरपोर्ट पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया। पुतिन के भारत दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा, कारोबार, रणनीतिक सहयोग और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

भारत और रूस के रिश्तों के लिहाज से भी यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है।

BRICS Summit 2026: सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को भारत पहुंचेंगे। उनकी यह भारत यात्रा करीब सात वर्षों बाद हो रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी दिलचस्पी है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में भारत-चीन संबंधों के साथ सीमा से जुड़े मुद्दे, व्यापार और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग जैसे विषयों के उठने की संभावना है।

भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ समय में तनाव के बाद धीरे-धीरे संवाद बढ़ा है। ऐसे में BRICS सम्मेलन दोनों देशों को उच्चस्तरीय बातचीत के लिए एक अहम मंच उपलब्ध करा रहा है। विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि मोदी-जिनपिंग मुलाकात से द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर क्या नया संकेत सामने आता है।

BRICS Summit 2026: पश्चिम एशिया संकट भी रहेगा अहम मुद्दा

इस बार का BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव गंभीर बना हुआ है। ईरान से जुड़े संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति ने BRICS के भीतर भी अलग-अलग देशों के हितों को प्रभावित किया है। भारत के सामने चुनौती यह होगी कि वह विभिन्न सदस्य देशों के अलग-अलग रुख के बीच एक संतुलित सहमति बनाने की कोशिश करे।

ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे BRICS सदस्य देशों के बीच मौजूदा तनाव के कारण पश्चिम एशिया संकट सम्मेलन के एजेंडे में खास महत्व रख सकता है। इसके अलावा ऊर्जा सुरक्षा और तेल की आपूर्ति से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है।

BRICS Summit 2026: व्यापार और आर्थिक सहयोग पर भी होगा जोर

BRICS सम्मेलन केवल भू-राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहने वाला है। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, सप्लाई चेन और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर भी सदस्य देशों का ध्यान रहेगा। दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum में भी आर्थिक नेटवर्क को मजबूत करने और सदस्य देशों की क्षमताओं को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया गया।

BRICS देशों के बीच ऐसा आर्थिक ढांचा विकसित करने पर चर्चा हो रही है, जिसमें एक देश के संसाधनों का दूसरे देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के साथ बेहतर इस्तेमाल हो सके। इसी तरह तकनीक, पूंजी और बाजारों को आपस में जोड़ने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर है।

BRICS Summit 2026: ग्लोबल ट्रेड और डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश

BRICS के विस्तार के साथ समूह की आर्थिक और रणनीतिक भूमिका लगातार बढ़ी है। सम्मेलन में वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाने, स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

हालांकि, सदस्य देशों की आर्थिक नीतियों और राजनीतिक हितों में काफी अंतर है। इसलिए किसी बड़े साझा वित्तीय ढांचे पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद छोटे और व्यावहारिक आर्थिक कदमों के जरिए सहयोग बढ़ाने की कोशिश इस सम्मेलन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।

BRICS Summit 2026: दिल्ली में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम

BRICS सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेताओं के पहुंचने को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। राजधानी में करीब 15 हजार दिल्ली पुलिसकर्मियों के अलावा अर्धसैनिक बलों की करीब 200 कंपनियां तैनात की गई हैं। निगरानी के लिए 500 से ज्यादा CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

राष्ट्राध्यक्षों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। सम्मेलन स्थल भारत मंडपम और प्रमुख राजनयिक इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। अलग-अलग देशों से आने वाले नेताओं के लिए भी विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किए गए हैं।

BRICS Summit 2026: रेलवे और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी असर

BRICS सम्मेलन की सुरक्षा और वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए दिल्ली-NCR में रेल संचालन पर भी असर पड़ा है। नॉर्दर्न रेलवे ने 11 से 13 सितंबर के बीच कई लोकल EMU और MEMU ट्रेनों को रद्द या डायवर्ट करने की योजना बनाई है। कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों के रूट और टर्मिनल में भी बदलाव किया गया है।

यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी ट्रेन के समय और रूट की जानकारी पहले से जांच लें, क्योंकि सम्मेलन के दौरान राजधानी में सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के कारण सामान्य संचालन प्रभावित हो सकता है।

BRICS Summit 2026: भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम सम्मेलन

भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का सामना कर रही है। यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया संकट, अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता, व्यापारिक तनाव और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों के बीच भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

भारत एक तरफ रूस और चीन के साथ BRICS जैसे मंच पर सहयोग बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भी अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में नई दिल्ली सम्मेलन भारत की संतुलित विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता का भी बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है।

BRICS Summit 2026: 11 सदस्य देशों के बीच बनेगी आगे की रणनीति

BRICS अब शुरुआती पांच देशों के समूह से आगे बढ़कर 11 सदस्य देशों का बड़ा मंच बन चुका है। विस्तार के बाद समूह की आर्थिक, ऊर्जा और जनसंख्या संबंधी ताकत काफी बढ़ी है, लेकिन इसके साथ सदस्य देशों के हितों और प्राथमिकताओं में अंतर भी बढ़ा है।

नई दिल्ली में होने वाली बैठक में कोशिश होगी कि इन मतभेदों के बावजूद आर्थिक सहयोग, विकास, तकनीक, व्यापार और वैश्विक शासन व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में साझा एजेंडा तैयार किया जाए। सम्मेलन के नतीजे यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि विस्तारित BRICS आने वाले वर्षों में कितनी प्रभावी और एकजुट भूमिका निभा पाता है।

BRICS Summit 2026: मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मुलाकातों पर दुनिया की नजर

18वें BRICS सम्मेलन की सबसे बड़ी कूटनीतिक तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकातों से बन सकती है। पुतिन के भारत पहुंचने और जिनपिंग के शनिवार को दिल्ली आने के साथ ही इन बैठकों को लेकर अटकलें और उम्मीदें बढ़ गई हैं।

BRICS के मंच पर भारत की प्राथमिकता आर्थिक और विकास संबंधी सहयोग के साथ-साथ वैश्विक संकटों पर संतुलित रुख बनाए रखना है। ऐसे में दिल्ली सम्मेलन से निकलने वाले संदेश का असर केवल BRICS देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक कूटनीति, व्यापार और रणनीतिक समीकरणों पर भी इसकी नजर रहेगी।

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