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Raipur Dangerous Buildings: 137 जर्जर इमारतें, नोटिस के बाद भी कार्रवाई का इंतजार! दिल्ली हादसे के बाद रायपुर की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

Raipur Dangerous Buildings : रायपुर। दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना ने देशभर में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हादसे के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि जब किसी इमारत की हालत पहले से खराब हो और उसके खतरनाक होने की जानकारी जिम्मेदार विभाग को हो, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? यही सवाल अब राजधानी रायपुर से भी जुड़ गया है।

Contents
Raipur Dangerous Buildings: नगर निगम के रिकॉर्ड में 137 जर्जर भवन चिन्हितRaipur Dangerous Buildings: रायपुर के अलग-अलग जोन में मौजूद हैं जर्जर इमारतेंRaipur Dangerous Buildings: भाठागांव में सबसे ज्यादा 36 जर्जर भवन होने का दावाRaipur Dangerous Buildings: मोतिबाग, महोबा बाजार और भाठागांव में 84 जर्जर भवनRaipur Dangerous Buildings: जर्जर भवनों में चल रही दुकानें और व्यावसायिक गतिविधियांRaipur Dangerous Buildings: नोटिस चस्पा करने के बाद कार्रवाई कहां तक पहुंची?Raipur Dangerous Buildings: हादसे का इंतजार क्यों?Raipur Dangerous Buildings: नगर निगम की निगरानी और जवाबदेही पर उठे सवालRaipur Dangerous Buildings: दिल्ली की घटना से रायपुर को क्या सबक लेना चाहिए?Raipur Dangerous Buildings: 137 जर्जर भवनों पर अब कार्रवाई का इंतजारRaipur Dangerous Buildings: नोटिस से आगे बढ़कर जमीन पर कार्रवाई की जरूरत

रायपुर में भी कई साल पुरानी और जर्जर इमारतें आबादी वाले इलाकों में मौजूद हैं। इनमें कुछ स्थानों पर लोगों के रहने के साथ-साथ दुकान, होटल और दूसरे व्यावसायिक काम भी संचालित होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल सिर्फ इमारतों की उम्र का नहीं, बल्कि इनके आसपास रहने और गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा का भी है।

Raipur Dangerous Buildings: नगर निगम के रिकॉर्ड में 137 जर्जर भवन चिन्हित

रायपुर नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में कुल 137 जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं। यह आंकड़ा अपने आप में यह बताने के लिए काफी है कि शहर में पुरानी और कमजोर इमारतों की समस्या कितनी गंभीर हो सकती है।

सवाल यह नहीं है कि नगर निगम को इन भवनों की जानकारी है या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि जिन इमारतों को जर्जर या खतरनाक माना गया है, उनके खिलाफ जमीन पर कितनी प्रभावी कार्रवाई हुई है। क्या केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त है या फिर वास्तविक खतरे को देखते हुए भवनों की मरम्मत, खाली कराने अथवा आवश्यक होने पर जमींदोज करने की कार्रवाई भी समय पर होनी चाहिए?

Raipur Dangerous Buildings: रायपुर के अलग-अलग जोन में मौजूद हैं जर्जर इमारतें

रायपुर नगर निगम को अलग-अलग जोन में बांटा गया है और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कई जोन में जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार खमतराई जोन में 10, फाफाडीह में 8 और शंकरनगर क्षेत्र में 9 पुरानी इमारतें चिन्हित हैं।

वहीं मोतीबाग जोन में 24, ईदगाहभाठा में 12, भाठागांव में 36, समता कॉलोनी में 14 और महोबा बाजार क्षेत्र में 24 जर्जर भवन बताए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि समस्या किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है।

Raipur Dangerous Buildings: भाठागांव में सबसे ज्यादा 36 जर्जर भवन होने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक रायपुर के भाठागांव क्षेत्र में सबसे ज्यादा 36 पुराने और जर्जर भवन चिन्हित हैं। इसके बाद मोतीबाग और महोबा बाजार जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें मौजूद हैं।

इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। बाजार, सड़क और रिहायशी क्षेत्रों के बीच जर्जर भवनों की मौजूदगी को लेकर अब नगर निगम की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।

Raipur Dangerous Buildings: मोतिबाग, महोबा बाजार और भाठागांव में 84 जर्जर भवन

रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों के अनुसार मोतीबाग, महोबा बाजार और भाठागांव क्षेत्र को मिलाकर 84 जर्जर भवन बताए गए हैं। ये तीनों इलाके शहर के ऐसे हिस्सों में शामिल हैं जहां बड़ी आबादी रहती है और रोजाना लोगों की आवाजाही होती है।

ऐसे में यदि किसी जर्जर भवन का हिस्सा अचानक गिरता है तो आसपास मौजूद दुकानदारों, ग्राहकों, राहगीरों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

Raipur Dangerous Buildings: जर्जर भवनों में चल रही दुकानें और व्यावसायिक गतिविधियां

रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि कुछ जर्जर इमारतों में अब भी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। कहीं किराना दुकान, कहीं मिठाई की दुकान तो कहीं होटल या रेस्टोरेंट जैसी गतिविधियां चलने की बात सामने आई है।

कुछ इमारतों की बाहरी संरचना भले ही सामान्य या अपेक्षाकृत नई दिखाई दे, लेकिन यदि भवन की मूल संरचना कमजोर है तो ऊपर की मंजिलों पर दरार या क्षति गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे भवनों में काम करने वाले लोगों के साथ-साथ ग्राहकों और राहगीरों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

Raipur Dangerous Buildings: नोटिस चस्पा करने के बाद कार्रवाई कहां तक पहुंची?

जर्जर भवनों को लेकर नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आती रही है। भवन मालिकों को मरम्मत कराने, भवन खाली कराने या आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने का दावा किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि नोटिस जारी होने के बाद वास्तविक कार्रवाई कितनी हुई?

रिपोर्ट में सामने आए एक आंकड़े के मुताबिक 38 जर्जर भवनों में सिर्फ एक भवन गिराए जाने की बात कही गई है। यदि यह आंकड़ा सही है, तो नोटिस और वास्तविक कार्रवाई के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

Raipur Dangerous Buildings: हादसे का इंतजार क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी भवन को नगर निगम ने खतरनाक या जर्जर मान लिया है, तो फिर उस भवन को लेकर अंतिम कार्रवाई में देरी क्यों हो? क्या किसी संभावित हादसे के बाद ही प्रशासन सक्रिय होगा?

दिल्ली की घटना ने यह दिखाया है कि जर्जर भवनों की अनदेखी कितनी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। हालांकि हर जर्जर भवन का जोखिम एक जैसा नहीं होता और किसी इमारत की वास्तविक स्थिति तकनीकी निरीक्षण से ही निर्धारित की जा सकती है, लेकिन चिन्हित खतरनाक भवनों का समय पर मूल्यांकन और आवश्यक कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है।

Raipur Dangerous Buildings: नगर निगम की निगरानी और जवाबदेही पर उठे सवाल

रायपुर में स्मार्ट सिटी और आधुनिक विकास की तस्वीर लगातार बदल रही है। शहर में नई और ऊंची इमारतें बन रही हैं, लेकिन इनके बीच वर्षों पुरानी कमजोर इमारतों की मौजूदगी शहरी सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकती है।

अब सवाल नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर है कि क्या शहर की सभी जर्जर इमारतों का नियमित सर्वे और रिकॉर्ड अपडेट किया जाता है? क्या भवनों की स्थिति के आधार पर उन्हें अलग-अलग जोखिम श्रेणियों में बांटा गया है? और सबसे अहम, क्या अत्यधिक जोखिम वाले भवनों को समय रहते खाली कराने या हटाने की कार्रवाई की जा रही है?

Raipur Dangerous Buildings: दिल्ली की घटना से रायपुर को क्या सबक लेना चाहिए?

दिल्ली में हुई इमारत गिरने की घटना के बाद रायपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों के लिए भी यह समय अपनी पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का है। केवल नई इमारतों और सड़क-पुलों का विकास ही शहर की तस्वीर नहीं बदलता, बल्कि पुराने और कमजोर ढांचों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

जर्जर भवनों की पहचान के बाद उनकी संरचनात्मक जांच, जोखिम का आकलन और जरूरत पड़ने पर समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी संभावित हादसे से पहले खतरे को टाला जा सके।

Raipur Dangerous Buildings: 137 जर्जर भवनों पर अब कार्रवाई का इंतजार

रायपुर में 137 जर्जर भवन चिन्हित होने की जानकारी के बाद अब लोगों की नजर नगर निगम की अगली कार्रवाई पर है। क्या इन भवनों का दोबारा तकनीकी निरीक्षण होगा? क्या अत्यधिक जोखिम वाले भवनों को खाली कराया जाएगा? क्या जरूरत के मुताबिक उन्हें गिराने या मरम्मत कराने की कार्रवाई होगी?

फिलहाल ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि जर्जर इमारत का खतरा तब तक दिखाई नहीं देता, जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए। लेकिन हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय खतरे को पहले पहचानकर कदम उठाना ही बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की पहचान होगी।

Raipur Dangerous Buildings: नोटिस से आगे बढ़कर जमीन पर कार्रवाई की जरूरत

रायपुर की जर्जर इमारतों का मामला अब केवल कागजी नोटिस तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नगर निगम को यह स्पष्ट करना होगा कि चिन्हित 137 भवनों में से कितने भवनों की जांच पूरी हुई, कितनों को नोटिस जारी किया गया और कितनों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई की गई।

शहर के लोगों के लिए उम्मीद यही है कि दिल्ली जैसे हादसों से सबक लेते हुए रायपुर में भी संभावित खतरनाक इमारतों को लेकर समय रहते ठोस कदम उठाए जाएंगे। क्योंकि एक जर्जर इमारत तब तक सिर्फ एक पुरानी इमारत होती है, जब तक वह हादसे का कारण नहीं बनती। हादसे के बाद वही इमारत कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है।

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