Khairagarh Illegal Mining : खैरागढ़। जिले में कथित अवैध मुरुम खनन और बिना रॉयल्टी मुरुम परिवहन को लेकर खनिज विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्राम पंचायत पांडुका में मुरुम खनन को लेकर की गई शिकायत को करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी शिकायतकर्ता के मुताबिक अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। शिकायत में चार हाईवा और दो जेसीबी मशीनों से कथित तौर पर मुरुम उत्खनन किए जाने का आरोप लगाया गया था।
Khairagarh Illegal Mining: शिकायत में चार हाईवा और दो जेसीबी का जिक्र
शिकायतकर्ता के अनुसार पांडुका क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मुरुम निकाले जाने और उसे बिना रॉयल्टी परिवहन किए जाने की शिकायत खनिज विभाग से की गई थी। शिकायत में कथित तौर पर मौके पर इस्तेमाल हो रहे चार हाईवा और दो जेसीबी मशीनों की जानकारी भी दिए जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि मामले को लेकर उपलब्ध जानकारी और वाहनों से जुड़े नंबर विभाग के संज्ञान में लाए गए थे, इसके बावजूद कार्रवाई की गति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
Khairagarh Illegal Mining: मुरुम खनन की तस्वीरों और वीडियो को लेकर भी उठे सवाल
मामले में शिकायतकर्ता द्वारा मौके की तस्वीरें और वीडियो होने की बात कही गई है। इन तस्वीरों में पांडुका क्षेत्र में मुरुम उत्खनन और परिवहन किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन तस्वीरों और वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत के बाद भी अब तक मामले की जांच को लेकर उसे स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उसका यह भी कहना है कि करीब तीन महीने गुजरने के बावजूद उसका बयान तक दर्ज नहीं किया गया।
Khairagarh Illegal Mining: खनिज अधिकारी बोले- वीडियो फुटेज और गाड़ी नंबर नहीं मिले
वहीं, इस पूरे मामले में खनिज विभाग के अधिकारी बबलू पांडे का अलग पक्ष सामने आया है। उनका कहना है कि विभाग को अभी तक वीडियो फुटेज और संबंधित गाड़ी नंबर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
अधिकारी के इस बयान के बाद शिकायतकर्ता और विभाग के दावों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। एक तरफ शिकायतकर्ता की ओर से वाहन नंबर शिकायत में दर्ज होने की बात कही जा रही है, वहीं विभाग की ओर से इन नंबरों के उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है।
Khairagarh Illegal Mining: तीन महीने बाद भी जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं
शिकायत को लगभग तीन महीने का समय बीत चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि शिकायत विभाग के पास पहुंची थी तो अब तक मामले की जांच किस स्तर तक पहुंची है। क्या विभागीय टीम ने मौके का निरीक्षण किया या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है।
वहीं शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे जांच की प्रगति के बारे में जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में कथित अवैध मुरुम खनन की शिकायत पर विभाग की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Khairagarh Illegal Mining: अगर वाहन नंबर शिकायत में थे तो जांच क्यों नहीं हुई?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल शिकायत में दर्ज बताए जा रहे वाहनों के नंबर को लेकर है। यदि शिकायतकर्ता द्वारा वास्तव में वाहनों के नंबर उपलब्ध कराए गए थे, तो क्या विभाग ने उन नंबरों के आधार पर वाहनों की पहचान और जांच की? यदि जांच नहीं हुई तो इसकी वजह क्या रही?
इसके अलावा यह भी सवाल है कि शिकायत मिलने के बाद खनिज विभाग की टीम ने पांडुका पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया था या नहीं।
Khairagarh Illegal Mining: क्या मौके पर पहुंची खनिज विभाग की टीम?
कथित अवैध खनन की शिकायतों में मौके का निरीक्षण जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में पांडुका में शिकायत के बाद विभागीय टीम द्वारा स्थल निरीक्षण, खनन की मात्रा, मशीनों के इस्तेमाल और मुरुम परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई या नहीं, यह जानकारी सामने आना बाकी है।
यदि मौके पर नियमों के विपरीत खनन या परिवहन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
Khairagarh Illegal Mining: शिकायतकर्ता के बयान को लेकर भी सवाल
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले में अब तक उसका बयान दर्ज नहीं किया गया है। यदि यह दावा सही है तो जांच प्रक्रिया में शिकायतकर्ता का पक्ष दर्ज किए जाने को लेकर भी सवाल उठता है।
वहीं विभाग की ओर से मामले को लेकर उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर जांच किए जाने की स्थिति स्पष्ट की जानी बाकी है।
Khairagarh Illegal Mining: जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति
पांडुका में कथित अवैध मुरुम खनन को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति खनिज विभाग की जांच और मौके के निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब देखना होगा कि खनिज विभाग इस शिकायत पर कब तक मौके की जांच करता है, शिकायतकर्ता का पक्ष दर्ज करता है और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। तीन महीने से लंबित बताई जा रही शिकायत के कारण अब विभाग की कार्रवाई और जवाबदेही पर निगाहें टिकी हुई हैं।
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