Baba Bageshwar Bengal Controversy : स्थानीय संस्कृति, खान-पान की परंपरा पर गरमाई सियासत,बाबा बागेश्वर की अपील, ‘बाहरी’ बनाम ‘बंगाली’ कौन भारी ?
Baba Bageshwar Bengal Controversy : आज बात बंगाल में बाबा बागेश्वर की अपील की, मछली मांस न खाने की अपील और उस पर सियासी दलील की। बात बंगाल में दुर्गा पूजा, धर्म और स्थानीय संस्कृति के मुद्दा की, और बात धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से बंगाल में चढ़े सियासी रंग की। दरअसल पश्चिम बंगाल अपनी कथा के दौरान बाबा बागेश्वर की एक अपनी ने बंगाल की राजनीति गरमा दी है। न केवल उनके बयान से राजनीतिक दल आमने सामने हैं, बल्कि बाबा का जमकर विरोध भी हो रहा है। बंगाल में बाबा बागेश्वर सनातन की धर्म ध्वजा लेकर पहुंचे हुए हैं, उनकी कथा में धर्मानंतरण, सनातन, हिंदू धर्म, देशभक्ति और लंबे समय बाद बंगाल में बनी बीजेपी की सरकार का गुणगान हो रहा है। सीएम शुबेंदु अधिकारी भी बाबा बागेश्वर की कथा में पहुंचे, और कथा का श्रवण किया। लेकिन बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान बाबा बागेश्वर की मांस मछली न खाने की अपील ने बवाल मचा दिया। बयान के बात बाबा का विरोध हो रहा है, कांग्रेस ने एफआईआर दर्ज कराने की अपील की है। टीएमसी व अन्य दल भी बाबा के विरोध में हैं तो वहीं बीजेपी ने भी बाबा के बयान से किनारा कर लिया है। क्योंकि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा में मांसाहार—धर्म, परंपरा या बंगाली संस्कृति का हिस्सा है ? ऐसे में धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का बयान से उपजा विवाद सिर्फ मछली-मांस खाने या नही खाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बंगाल में धर्म, स्थानीय संस्कृति और राजनीतिक अस्मिता के टकराव का मुद्दा बन गया है। धीरेंद्र शास्त्री की अपील के बाद कांग्रेस ने शिकायत की, जबकि बंगाल बीजेपी ने भी इसे उनकी निजी राय बताते हुए दूरी बनाई है। अब दुर्गा पूजा में धीरेंद्र शास्त्री का बयान, और उस पर चढ़ा सियास रंग…इसी पर करेंगे चर्चा, लेकिन पहले देखिये ये रिपोर्ट।।।
Baba Bageshwar Bengal Controversy : पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मछली-मांस खाने पर रोक लगाने की अपील को लेकर बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री याने बाबा बागेश्वर विवादों में घिर गए हैं। दरअसल कोलकाता के हावड़ा/लिलुआ में एक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने बंगाल के हिंदुओं से नवरात्र और दुर्गा पूजा के वक्त पंडालों के पीछे मांसाहारी भोजन न पकाने और न खाने की अपील की थी। उन्होंने इस दौरान मांसाहार करने वालों को ‘पाखंडी’ भी कह दिया था।अब बाबा बागेश्वर भले ही नवरात्र और दुर्गा पूजा के वक्त मासाहार न खाने की अपील कर रहे हों, लेकिन बंगाल में दुर्गा पूजा और अन्य त्योहारों के दौरान मछली और मांस खाने की पुरानी परंपरा है। यहां तक कि कई जगहों पर अष्टमी-नवमी पर बलि का प्रसाद भी लिया जाता है। अब पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने इसे बंगाली संस्कृति और खान-पान की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए कोलकाता के भवानीपुर और अन्य पुलिस स्टेशनों में बाबा बागेश्वर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, साथ ही कानूनी कार्रवाई की मांग की है। तो वहीं TMC ने भी इस बयान की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि बंगाल में वही होगा जो यहां के लोग चाहेंगे, किसी बाहरी बाबा का फरमान नहीं चलेगा।
Baba Bageshwar Bengal Controversy : उधर पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और अन्य नेताओं ने इस बयान से किनारा कर लिया है। भाजपा ने स्पष्ट किया कि बंगाली क्या खाएंगे, यह कोई बाहर से आया धर्मगुरु तय नहीं कर सकता और मछली-मांस खाना बंगाल की संस्कृति का हिस्सा है। तो वहीं कुछ बीजेपी नेताओं का कहना है कि बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की स्थिति अन्य जगहों से अलग है। तो वहीं पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने इस साल होने वाली दुर्गा पूजा को लेकर कई बड़े फैसले लिए हैं। इनमें 2017 में पिछली TMC सरकार द्वारा शुरू किए गए सालाना पूजा कार्निवल को रद्द करना और महाअष्टमी के दिन राज्यभर में शराब की बिक्री पर रोक लगाना शामिल है। लेकिन अब यह विवाद सिर्फ मछली-मांस खाने या न खाने का नहीं है, बल्कि बंगाल में धर्म, स्थानीय संस्कृति और राजनीतिक अस्मिता के टकराव का मुद्दा बन गया है। दुर्गापूजा में मछली-मांस पर छिड़े संग्राम और धर्म बनाम संस्कृति की सियासत का है ? ऐसे में देखना होगा कि बाबा बागेश्वर के बयान और उस पर जारी सियासत में पलड़ा किसका भारी रहता है।।।
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