बालासोर केस पर राहुल गांधी का बीजेपी पर निशाना, धर्मेंद्र प्रधान का तीखा पलटवार

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BY: Yoganand Shrivastva

भुवनेश्वर, ओडिशा के बालासोर ज़िले में एक कॉलेज छात्रा की आत्मदाह से मौत ने राजनीतिक हलकों में गर्माहट ला दी है। यह मामला तब और गरमा गया जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जिसे लेकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कड़ा जवाब दिया।


क्या है पूरा मामला?

बालासोर के फकीर मोहन कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा ने कथित रूप से यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर खुद को आग लगा ली थी। गंभीर हालत में उसे एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार रात उसकी मौत हो गई


राहुल गांधी का आरोप: “यह आत्महत्या नहीं, सिस्टम द्वारा हत्या है”

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:

“ओडिशा में इंसाफ की लड़ाई लड़ती एक बेटी की मौत, सीधे तौर पर BJP सिस्टम द्वारा की गई हत्या है। उस बहादुर छात्रा ने यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला, उल्टा डराया-धमकाया गया। जिन पर सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही उसे तोड़ते रहे।”

उन्होंने आगे लिखा:

“यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम द्वारा संगठित हत्या है। मोदी जी, ओडिशा से लेकर मणिपुर तक देश की बेटियां जल रही हैं, टूट रही हैं – और आप खामोश हैं। देश को आपकी चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए।”


धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार: “सस्ती राजनीति बंद करें”

केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए लिखा:

“राहुल गांधी की ओडिशा की बेटी के दुखद अंत पर की गई ओछी राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करना उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाता है।”

उन्होंने आगे कहा:

“इस घटना से पूरा देश आहत है। लेकिन कांग्रेस ने इसे राजनीतिक रोटियां सेंकने का जरिया बना लिया। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए हमेशा ठोस कदम उठाए हैं। ओडिशा सरकार भी इस मामले में पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है और दोषियों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा।”

धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी से यह भी मांग की कि वे पीड़िता के परिवार से माफी मांगे, क्योंकि इस समय जरूरत सहानुभूति और न्याय की है, न कि राजनीतिक बयानबाजी की।


न्याय बनाम राजनीति

बालासोर की यह घटना न केवल महिला सुरक्षा की गंभीरता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि राजनीतिक दल किस तरह संवेदनशील मामलों को मुद्दा बना लेते हैं। जहां एक ओर विपक्ष इसे “सिस्टम की विफलता” करार दे रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे “राजनीतिक अवसरवाद” बता रहा है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी या यह मामला भी सियासी बयानों के शोर में दबकर रह जाएगा।

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