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अमेरिकी राजदूत से मुलाकात से पहले Omar Abdullah का दो टूक संदेश, बोले- J&K की समस्याओं का समाधान वॉशिंगटन नहीं, नई दिल्ली करेगी

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Omar Abdullah: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah बुधवार को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ प्रस्तावित मुलाकात से पहले अपने रुख को लेकर पूरी तरह स्पष्ट नजर आए। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों का समाधान भारत सरकार के साथ बातचीत के जरिए ही निकाला जाएगा। उन्होंने साफ किया कि वह किसी विदेशी राजनयिक के सामने अपनी सरकार या केंद्र से जुड़ी शिकायतें रखने के लिए इस बैठक का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

Omar Abdullah: स्थानीय मुद्दों पर होगी बातचीत

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अमेरिकी राजदूत के साथ बैठक में जम्मू-कश्मीर से जुड़े स्थानीय और मौजूदा हालात पर चर्चा जरूर होगी, लेकिन इसका उद्देश्य किसी तरह की शिकायत दर्ज कराना नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की समस्याओं के समाधान के लिए नई दिल्ली के साथ ही संवाद करना होगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी दूसरे देश के प्रतिनिधि के सामने देश के आंतरिक मुद्दों को लेकर शिकायत करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, जम्मू-कश्मीर से जुड़े विषय भारत के आंतरिक मामले हैं और इनका समाधान भी देश के भीतर ही तलाशा जाना चाहिए।

Omar Abdullah: ‘वॉशिंगटन हमारी समस्याओं का समाधान नहीं करेगा’

अब्दुल्ला ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिका या वॉशिंगटन जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत करनी होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह अमेरिकी राजदूत के सामने जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन किसी समस्या के समाधान के लिए उनसे मदद मांगने या शिकायत करने का सवाल नहीं है। उन्होंने बैठक को सामान्य कूटनीतिक संवाद के तौर पर पेश किया।

Omar Abdullah: अमेरिकी राजदूत की बात सुनने पर रहेगा जोर

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह बैठक में अमेरिकी राजदूत की बात सुनना भी पसंद करेंगे। उनके मुताबिक, यह मुलाकात केवल उनकी ओर से अपनी बात रखने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का अवसर होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जानना चाहेंगे कि सर्जियो गोर जम्मू-कश्मीर को लेकर क्या सोचते हैं और किन मुद्दों पर बातचीत करना चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि बैठक का वास्तविक स्वरूप बातचीत के दौरान ही स्पष्ट होगा।

Omar Abdullah: कई वर्षों बाद हो रही ऐसी हाई-प्रोफाइल मुलाकात

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लंबे अंतराल के बाद जम्मू-कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री और अमेरिका के मौजूदा राजदूत के बीच इस स्तर की मुलाकात होने जा रही है। करीब डेढ़ दशक से अधिक समय बाद इस तरह का संपर्क क्षेत्रीय और कूटनीतिक नजरिए से चर्चा में है।

सर्जियो गोर की भूमिका भी इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बनाती है। वह अमेरिका की ओर से दक्षिण और मध्य एशिया से जुड़े मामलों में विशेष जिम्मेदारी संभालते हैं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के साथ उनकी बातचीत को क्षेत्रीय घटनाक्रम के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

Omar Abdullah: राज्य का दर्जा बहाली की मांग के बीच मुलाकात

उमर अब्दुल्ला की अमेरिकी राजदूत से मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठा रही हैं। इसके साथ ही कई दल संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठा रहे हैं।

ऐसे माहौल में अमेरिकी राजदूत के साथ मुख्यमंत्री की बैठक को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, उमर अब्दुल्ला ने बैठक से पहले ही स्पष्ट कर दिया कि वह किसी विदेशी पक्ष से जम्मू-कश्मीर के आंतरिक राजनीतिक मुद्दों का समाधान तलाशने नहीं जा रहे हैं।

Omar Abdullah: उमर अब्दुल्ला ने अटकलों पर लगाया विराम

मुख्यमंत्री के बयान से यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दी कि अमेरिकी राजदूत के साथ होने वाली बातचीत को विदेशी मध्यस्थता या भारत के आंतरिक मामलों में किसी बाहरी भूमिका से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दों पर उनकी प्राथमिकता केंद्र सरकार के साथ संवाद और बातचीत ही रहेगी। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधि के साथ बैठक को उन्होंने विचारों के आदान-प्रदान और स्थानीय परिस्थितियों पर चर्चा का अवसर बताया।

Omar Abdullah: बैठक के नतीजों पर रहेगी नजर

अब सभी की नजर उमर अब्दुल्ला और सर्जियो गोर की बैठक में होने वाली बातचीत पर रहेगी। खासतौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जम्मू-कश्मीर की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, विकास, सुरक्षा और राज्य का दर्जा जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच किस तरह की चर्चा होती है।

फिलहाल उमर अब्दुल्ला ने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह बैठक में जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर बात करने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी विदेशी राजदूत से अपने राजनीतिक या प्रशासनिक मुद्दों के समाधान की अपेक्षा नहीं रखते।

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