Kohinoor Return : लंदन की धरती से सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी की मांग
Kohinoor Return : लंदन में आयोजित संत संसद के दौरान जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को देश वापस लाने की मांग उठाई। अपने संबोधन में उन्होंने कोहिनूर हीरे के साथ भोजशाला से जुड़ी श्वेत वाग्देवी प्रतिमा को भी भारत लौटाने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत देश की पहचान और आत्मसम्मान से जुड़ी हुई है, इसलिए ऐसी महत्वपूर्ण धरोहरों की स्वदेश वापसी पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
Kohinoor Return : कोहिनूर को भारत की सांस्कृतिक पहचान बताया
स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि कोहिनूर को भारत की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है और इसकी वापसी को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के बाद अब ब्रिटेन को भारत से जुड़ी महत्वपूर्ण सांस्कृतिक वस्तुओं को सम्मानपूर्वक वापस करने की दिशा में पहल करनी चाहिए।उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने हमेशा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को महत्व दिया है। भारत की संस्कृति पूरी दुनिया को परिवार के रूप में देखने की सीख देती है, लेकिन इसके साथ अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा करना भी जरूरी है।
Kohinoor Return : भोजशाला की वाग्देवी प्रतिमा लौटाने की मांग
संत संसद में भोजशाला से संबंधित श्वेत वाग्देवी प्रतिमा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि यह प्रतिमा वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में सुरक्षित है और इसे भारत वापस लाया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि भोजशाला से जुड़ी इस प्रतिमा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। उनके अनुसार, भारत की ऐसी धरोहरों को देश में वापस लाकर उन्हें उनके ऐतिहासिक संदर्भ और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ा जाना चाहिए।
Kohinoor Return : भारत की विरासत और सम्मान का मुद्दा
स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि किसी भी देश के लिए उसकी सांस्कृतिक विरासत केवल पुरानी वस्तुओं का संग्रह नहीं होती, बल्कि वह उसके इतिहास, परंपरा और पहचान का हिस्सा होती है। ऐसे में भारत से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी को सांस्कृतिक न्याय के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत ने स्वतंत्रता के बाद दुनिया के सामने अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को मजबूती से प्रस्तुत किया है। ऐसे में विदेशों में मौजूद भारत से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहरों को वापस लाने की मांग को भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
Kohinoor Return : लंदन में तिरंगे के साथ गूंजा वंदे मातरम्
संत संसद के दौरान भारतीय तिरंगा फहराया गया और वंदे मातरम् का सामूहिक गायन हुआ। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भारत माता की जय के नारे भी लगाए। इस दौरान भारतीय राष्ट्रगान जन गण मन का भी सम्मान किया गया।स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि ब्रिटेन की धरती पर तिरंगे का फहराना भारतीय स्वतंत्रता और राष्ट्र की गौरवशाली यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के उन क्रांतिकारियों को भी याद किया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।
Kohinoor Return : वंदे मातरम् के साथ स्वतंत्रता सेनानियों को किया याद
अपने संबोधन में स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की भावनाओं से जुड़ा हुआ प्रतीक है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक देशभक्तों ने इसी भावना के साथ अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया था।उन्होंने कहा कि लंदन में भारतीय समुदाय और अन्य लोगों की मौजूदगी में वंदे मातरम् का गायन भारत की राष्ट्रीय भावना को प्रदर्शित करने वाला अवसर रहा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने एकजुट होकर राष्ट्रभक्ति के नारे लगाए।
Kohinoor Return : ब्रिटेन की धरती पर भारतीय संस्कृति का संदेश
संत संसद में भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर भी चर्चा हुई। स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने कहा कि भारत की सभ्यता ने हमेशा मानवता, शांति और विश्व कल्याण का संदेश दिया है।उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा और उनके मूल देश से संबंध को समझना वैश्विक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी हिस्सा है।
Kohinoor Return : सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी का मुद्दा फिर चर्चा में
लंदन में आयोजित इस कार्यक्रम के बाद कोहिनूर और वाग्देवी प्रतिमा की भारत वापसी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आया है। स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने इसे भारत की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक गौरव से जोड़ते हुए अपनी मांग रखी।कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। तिरंगे, वंदे मातरम् और भारत माता की जय के नारों के बीच आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना को लेकर संदेश देने वाला रहा।
Kohinoor Return : भारत को अपनी विरासत वापस मिलने की उम्मीद
स्वामी चक्रपाणि जी महाराज ने उम्मीद जताई कि भारत से जुड़ी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी को लेकर भविष्य में सकारात्मक पहल होगी। उन्होंने कहा कि कोहिनूर और वाग्देवी प्रतिमा जैसे विषय केवल भावनाओं से जुड़े नहीं हैं, बल्कि भारत के इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से भी उनका गहरा संबंध है।लंदन की धरती पर उठी यह मांग अब भारत की सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी से जुड़े विमर्श को आगे बढ़ाने वाला एक और महत्वपूर्ण प्रसंग बन गई है।




