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गृहमंत्री अमित शाह के दौरे से पहले शांति की अपील, नक्सलियों ने लिखा संघर्ष विराम का पत्र

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Appeal for peace before Home Minister Amit Shah's visit

रिपोर्ट: सुधीर वर्मा, मनीष सिंह, by:vijay nandan

जगदलपुर: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे से पहले माओवादियों ने भारत सरकार को पत्र जारी कर संघर्ष विराम और शांति वार्ता की पेशकश की है। यह पत्र सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने जारी किया है, जो तेलुगु भाषा में लिखा गया है।


नक्सलियों के पत्र में लिखी गई प्रमुख बातें:

1. संघर्ष विराम की मांग

“हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि वह तत्काल प्रभाव से सभी सैन्य अभियानों को रोके। हमारी ओर से भी हम लड़ाई रोकने को तैयार हैं, लेकिन यह तभी संभव होगा जब सरकार अपने सुरक्षा बलों को माओवादी इलाकों से हटाए और उग्रवाद विरोधी अभियानों को निलंबित करे।”

2. ऑपरेशन ‘कागर’ का विरोध

“‘ऑपरेशन कागर’ के तहत हमारे साथियों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। निर्दोष आदिवासियों को झूठे मामलों में फंसाकर जेलों में डाला जा रहा है। यह सरकार की आदिवासी विरोधी और दमनकारी नीति का हिस्सा है। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं।”

3. माओवादी इलाकों से सुरक्षा बलों की वापसी

“हम मांग करते हैं कि सरकार सुरक्षा बलों को उन क्षेत्रों से तत्काल वापस बुलाए, जहां वे निर्दोष ग्रामीणों को प्रताड़ित कर रहे हैं। सैनिकों की तैनाती से हमारे समुदायों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।”

4. आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा

“हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह आदिवासी इलाकों में खनन परियोजनाओं को रोके, क्योंकि ये परियोजनाएं जल, जंगल और जमीन को नष्ट कर रही हैं। हमारी लड़ाई गरीबों और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए है।”

5. मानवाधिकार हनन के आरोप

“‘ऑपरेशन कागर’ के तहत हजारों आदिवासियों को जबरन हिरासत में लिया गया है। कई निर्दोष महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और अत्याचार की घटनाएं सामने आई हैं। हम सरकार से इन जुल्मों को बंद करने की मांग करते हैं।”

6. बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार संगठनों से अपील

“हम देश के बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों, छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं से अपील करते हैं कि वे इस दमन के खिलाफ आवाज उठाएं और सरकार पर शांति वार्ता शुरू करने के लिए दबाव डालें।”

7. शांति वार्ता के लिए शर्तें

“अगर सरकार वास्तव में शांति चाहती है, तो उसे निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:

  • सभी सैन्य अभियानों को रोकना होगा।
  • जेलों में बंद निर्दोष ग्रामीणों और हमारे साथियों को रिहा करना होगा।
  • सुरक्षाबलों की नए इलाकों में तैनाती पर रोक लगानी होगी।”

8. सरकार से वार्ता की इच्छा

“हम शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार को पहले यह दिखाना होगा कि वह शांति प्रक्रिया को लेकर गंभीर है। जैसे ही सरकार अपने सैन्य अभियान बंद करेगी, हम संघर्ष विराम की घोषणा करने के लिए तैयार हैं।”

लाल आतंक पर सरकार का एक्शन प्रभावी साबित हो रहा है. भारत नक्सलवाद मुक्त होने की तरफ बढ़ रहा है, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जानकारी दी है कि, जहां 2024 में देश के 4 राज्यों के 12 जिले नक्सल प्रभावित थे, अब 2025 में इनकी संख्या कम होकर 6 रह गई है। उन्होंने टारगेट फिक्स कर दिया है कि 31 मार्च 2026 तक भारत नक्सलवाद मुक्त हो जाएगा। जिस तरह से लाल आतंक पर एक के बाद एक प्रहार हो रहा है उसे देखकर लगता है कि सुरक्षा बल 31 मार्च 2026 से पहले ही लाल आतंक का खात्मा कर देंगे।


गृहमंत्री अमित शाह के दौरे से ठीक पहले आया यह पत्र संकेत देता है कि माओवादी अब सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव में हैं। सरकार की रणनीति अब तक सख्त रही है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार माओवादियों की इस शांति वार्ता की अपील को स्वीकार करेगी या ऑपरेशन ‘कागर’ को और तेज किया जाएगा।

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