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AI and Jobs: क्या AI खा रहा है नौकरियां? सच्चाई यह है कि अभी किसी के पास इसका पक्का जवाब नहीं

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AI and Jobs

AI and Jobs आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या यह नौकरियां खत्म कर रहा है या नई नौकरियां पैदा कर रहा है। हाल ही में देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS ने एक तिमाही में 9,000 से अधिक कर्मचारियों की भर्ती की और 14,000 फ्रेशर्स को शामिल किया। जबकि एक साल पहले इसी कंपनी ने करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की थी। ऐसे में AI के रोजगार पर प्रभाव को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह तय करने के लिए पर्याप्त आंकड़े मौजूद नहीं हैं कि AI वास्तव में नौकरियां खत्म कर रहा है, पैदा कर रहा है या सिर्फ काम के स्वरूप को बदल रहा है।

AI and Jobs फ्रेशर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि AI का सबसे बड़ा प्रभाव नए नौकरी तलाशने वाले युवाओं पर पड़ सकता है। आईटी कंपनियों ने फ्रेशर्स की भर्ती में कटौती की है और कई क्षेत्रों में एंट्री-लेवल नौकरियों की संख्या घटी है। रिपोर्टों के अनुसार, 2026 में एंट्री-लेवल टेक्नोलॉजी जॉब्स में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। कई कंपनियां अब AI आधारित टूल्स के जरिए पहले किए जाने वाले शुरुआती स्तर के कार्यों को स्वचालित कर रही हैं, जिससे नए उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित हो सकते हैं।

AI and Jobs AI नई नौकरियां भी बना रहा है

दूसरी ओर AI ने कई नए रोजगार अवसर भी पैदा किए हैं। डेटा एनोटेशन, मशीन लर्निंग, AI ट्रेनिंग, डेटा साइंस और भाषा आधारित डिजिटल कार्यों में नई मांग बढ़ी है। बेंगलुरु की कंपनी ‘कार्य’ जैसी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, खासकर महिलाओं को डिजिटल रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) और तकनीकी कंपनियां भी AI और डेटा कौशल वाले पेशेवरों की भर्ती बढ़ा रही हैं।

AI and Jobs सिर्फ नौकरी की संख्या नहीं, गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कितनी नौकरियां गईं और कितनी बनीं। एक उच्च वेतन पाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर और कम आय वाले डेटा लेबलिंग कर्मचारी दोनों को रोजगार के आंकड़ों में एक ही नौकरी माना जाता है, जबकि आर्थिक रूप से दोनों की स्थिति अलग होती है। इसलिए AI के प्रभाव का आकलन करते समय रोजगार की गुणवत्ता, वेतन और करियर ग्रोथ जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

AI and Jobs सरकार को पहले आंकड़े जुटाने की जरूरत

लेख में सुझाव दिया गया है कि भारत को AI के प्रभाव को समझने के लिए बेहतर डेटा संग्रह प्रणाली विकसित करनी चाहिए। केवल यह जानना पर्याप्त नहीं कि लोग रोजगार में हैं या नहीं, बल्कि यह भी समझना जरूरी है कि AI किस तरह काम की प्रकृति बदल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को बड़े पैमाने पर स्किलिंग कार्यक्रम शुरू करने से पहले यह स्पष्ट करना होगा कि लोगों को किन नौकरियों से हटाकर किन नए क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

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