BY: MOHIT JAIN
आगरा में दीवाली की तैयारियां जोरों पर हैं। बाजारों में त्योहार की रौनक देखते ही बनती है। इलेक्ट्रिक दीयों के दौर में भी मिट्टी के दीयों की मांग कायम है। पंचकुइयां चौराहे के पास दीए बनाने वाले कारीगरों के अनुसार, दीवाली के समय मिट्टी के दीयों की मांग तेजी से बढ़ जाती है।
कारीगरों की मेहनत और उत्पादन
कारीगरों ने बताया कि इस साल तक उन्होंने लगभग 1 लाख दीयों के ऑर्डर पूरे कर लिए हैं और अब लगभग 50 हजार और बनाने हैं। शहर में दीए बनाने का काम लगभग 100 परिवार कर रहे हैं।
मिट्टी की कमी और बढ़ी लागत

कारीगरों ने कहा कि अब शहर में मिट्टी उपलब्ध नहीं होती, इसलिए उन्हें बाहर से मंगानी पड़ती है। इससे लागत बढ़ जाती है। पहले कंड्डे 100 रुपए पसेरी आते थे, अब यह 300 रुपए हो गए हैं, लेकिन दीयों के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। दीए 50 रुपए के पैक में 100 बिक रहे हैं।
सरकार से उम्मीद और मांग
कारीगरों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें मिट्टी के दीए बनाने के लिए मशीन वाले चरखे दिए जाएं, जिससे उनका काम आसान हो सके और वे अधिक दीए बना सकें। वे अपने पारंपरिक तरीकों पर गर्व महसूस करते हैं और चाहते हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
आगे की उम्मीदें
कारीगरों को उम्मीद है कि इस दिवाली उनके दीए खूब बिकेंगे और वे अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे।





