BY: MOHIT JAIN
इजराइल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा मोड़ सामने आया है। 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा से ठीक पहले यूरोपीय देश पुर्तगाल ने आधिकारिक रूप से घोषणा कर दी है कि वह फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देगा। यह फैसला इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
पुर्तगाल का ऐलान
पुर्तगाल के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि 21 सितंबर (रविवार) को वह फिलिस्तीन को मान्यता देगा। लिस्बन ने पहले ही साफ कर दिया था कि गाज़ा में लगातार बिगड़ते हालात, मानवीय संकट और इजराइल की कड़ी नीतियों के बीच यह कदम अब जरूरी हो गया है।
इजराइल की आपत्ति

इजराइल ने पुर्तगाल सहित उन सभी देशों के फैसले का विरोध किया है, जो फिलिस्तीन को मान्यता देने की ओर बढ़ रहे हैं।
- इजराइल का कहना है कि यह फैसला हमास को इनाम देने जैसा है।
- तेल अवीव के मुताबिक, इससे आतंकवाद को बढ़ावा मिलेगा और शांति प्रक्रिया कमजोर होगी।
- इजराइल का आरोप है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से ही गाज़ा युद्ध की शुरुआत हुई थी।
कौन-कौन देश मान्यता देने की तैयारी में?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सलाहकार के मुताबिक कई देश इस कदम का समर्थन करने वाले हैं। इनमें शामिल हैं:
- एंडोरा
- ऑस्ट्रेलिया
- बेल्जियम
- लक्समबर्ग
- माल्टा
- सैन मरीनो
इसके अलावा, ब्रिटेन, कनाडा और फ्रांस भी इस बार महासभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने की घोषणा कर सकते हैं। फिलहाल, संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से करीब तीन-चौथाई देश पहले ही फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं।
महासभा में होगा दो-राष्ट्र समाधान पर एजेंडा
22 सितंबर से न्यूयॉर्क में शुरू हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा में दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) मुख्य एजेंडा होगा। इसी दौरान फ्रांस और सऊदी अरब की अगुवाई में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी होगा, जिसमें नॉर्वे और स्पेन की भी भागीदारी होगी।
इस सम्मेलन का मकसद फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) को आर्थिक संकट से बाहर निकालना है। दरअसल, इजराइल ने पिछले चार महीनों से पीए के लिए वसूले गए करोड़ों डॉलर रोक रखे हैं, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति गंभीर संकट में पहुंच गई है।
पुर्तगाल का यह फैसला न सिर्फ इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष को नया मोड़ देगा, बल्कि 22 सितंबर की संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाली चर्चा को और अधिक अहम बना देगा। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कितने बड़े पश्चिमी और यूरोपीय देश फिलिस्तीन को मान्यता देने की घोषणा करते हैं।





