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NCERT का बड़ा बदलाव: कक्षा 8 की किताब में इतिहास की नई परिभाषा

NCERT का बड़ा बदलाव: कक्षा 8 की किताब में इतिहास की नई परिभाषा

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (सोशल साइंस) की किताब “समाज की खोज: भारत और उससे आगे – भाग 1” में कई अहम बदलाव किए हैं। नई किताब को जुलाई 2025 में जारी किया गया है, और यह मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए मान्य है।

बदलाव विशेष रूप से 13वीं से 17वीं शताब्दी के भारतीय इतिहास को लेकर हैं, जिसमें दिल्ली सल्तनत, मुगल साम्राज्य और उनके प्रतिरोध की घटनाओं को नया रूप दिया गया है।


बाबर, अकबर और औरंगजेब की नई व्याख्या

नई किताब में मुगल शासकों को पारंपरिक छवि से हटकर इस प्रकार दर्शाया गया है:

  • बाबर: क्रूर और निर्दयी विजेता के रूप में चित्रित किया गया है।
  • अकबर: सहिष्णुता और क्रूरता के मिश्रण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • औरंगजेब: मंदिरों और गुरुद्वारों को तोड़ने वाला और गैर-मुस्लिमों पर टैक्स लगाने वाला बताया गया है।

इन व्याख्याओं को किताब में ऐतिहासिक असहिष्णुता के उदाहरणों के साथ जोड़ा गया है।


किताब में कौन-कौन से अध्याय जोड़े गए हैं?

नई सामाजिक विज्ञान की किताब में निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित अध्याय जोड़े गए हैं:

  • भारत का राजनीतिक मानचित्र: पुनर्निर्माण
  • दिल्ली सल्तनत का उदय और पतन
  • मुगलों का आगमन और उनके विरोध
  • विजयनगर साम्राज्य की कहानी
  • सिख धर्म और उनके नेतृत्व का उत्थान

इन अध्यायों में ऐतिहासिक घटनाओं की गहराई से व्याख्या की गई है, और छात्रों को भारत के मध्यकालीन इतिहास की जटिलताओं को समझाने की कोशिश की गई है।


स्पेशल नोट: इतिहास को वर्तमान से जोड़ने की चेतावनी

किताब में एक विशेष टिप्पणी (Special Note) भी शामिल की गई है, जिसमें कहा गया है:

“अतीत की घटनाओं के लिए आज किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।”

यह संदेश विद्यार्थियों को यह समझाने के लिए है कि इतिहास का अध्ययन उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए, न कि किसी समुदाय या व्यक्ति के प्रति पूर्वाग्रह जगाने के लिए।


पहले 7वीं में पढ़ाया जाता था, अब 8वीं में होगा शामिल

NCERT के अनुसार, पहले दिल्ली सल्तनत, मुगलों और मराठों का इतिहास कक्षा 7 की किताबों में पढ़ाया जाता था, लेकिन अब इसे हटाकर कक्षा 8 के नए पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इसके पीछे तर्क यह दिया गया है कि इस कालखंड की गंभीरता और ऐतिहासिक महत्व को समझने के लिए छात्रों की आयु और समझ का स्तर जरूरी है।


विवादों पर अभी NCERT की चुप्पी

हालांकि इन बदलावों को लेकर चर्चा और आलोचना शुरू हो गई है, लेकिन NCERT ने अभी तक कोई औपचारिक बयान या सफाई नहीं दी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह बदलाव अकादमिक समीक्षकों की सलाह पर किए गए हैं या किसी और उद्देश्य से।


बदलावों के पीछे उद्देश्य क्या है?

कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में ये बदलाव छात्रों को भारत के इतिहास का एक नया दृष्टिकोण देने के लिए किए गए हैं। धार्मिक असहिष्णुता, सत्ता का संघर्ष, और समाज में हुए बदलावों को स्पष्ट रूप से बताया गया है, जिससे छात्रों में आलोचनात्मक सोच और इतिहास की समग्र समझ विकसित हो सके।

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