MP: मध्य प्रदेश में शिक्षकों के वेतनमान और सेवा से जुड़े लाभ को लेकर जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने स्थानीय निकायों के अधीन शिक्षक के रूप में नियुक्त होकर बाद में राज्य के शैक्षणिक संवर्ग में शामिल हुए कर्मचारियों के मामले में उनकी पूर्व सेवा को ध्यान में रखने से जुड़े प्रावधानों पर विचार किया है। अदालत के आदेश में कहा गया कि नियमों के तहत पात्र पाए जाने वाले कर्मचारियों को उनकी पूर्व सेवा के आधार पर संबंधित सेवा लाभ और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ दिए जाने चाहिए।
यह मामला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने शुरुआती दौर में शिक्षाकर्मी या स्थानीय निकाय के अधीन शिक्षक के रूप में सेवा शुरू की थी और बाद में नियमों के तहत नए शैक्षणिक संवर्ग में शामिल हुए। हाईकोर्ट के सामने ऐसे कर्मचारियों की सेवा अवधि, वेतनमान और पेंशन सहित दूसरे लाभों को लेकर सवाल उठा था।
MP: शिक्षाकर्मी के तौर पर शुरू हुई थी सेवा
मामले में याचिकाकर्ता की नियुक्ति वर्ष 1998 में नगर पंचायत के अधीन शिक्षाकर्मी के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्हें अध्यापक संवर्ग में शामिल किया गया और आगे चलकर वर्ष 2018 में राज्य सरकार के नए शैक्षणिक संवर्ग के तहत सेवा में लिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई थी कि उनकी प्रारंभिक नियुक्ति से की गई सेवा को पेंशन, भविष्य निधि और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में शामिल किया जाए।
याचिका में यह भी कहा गया था कि सेवा की गणना केवल वर्ष 2018 से करना उचित नहीं होगा, क्योंकि कर्मचारी ने उससे काफी पहले स्थानीय निकाय के अधीन शिक्षाकर्मी के रूप में अपनी सेवा शुरू कर दी थी। इसी आधार पर प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से सेवा लाभ दिए जाने की मांग अदालत के सामने रखी गई।
MP: पहले के फैसले को बनाया गया आधार
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में शिक्षाकर्मियों से जुड़े पहले के न्यायिक फैसलों का भी उल्लेख किया। अदालत के सामने ऐसे मामलों का संदर्भ आया, जिनमें स्थानीय निकायों के अधीन नियुक्त शिक्षाकर्मियों की सेवा और बाद में उनके शैक्षणिक संवर्ग में विलय से जुड़े अधिकारों पर फैसला दिया जा चुका है।
अदालत ने संबंधित नियमों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1998 के नियमों के तहत स्थानीय निकायों द्वारा नियुक्त शिक्षाकर्मियों के लिए नियुक्ति और सेवा शर्तों का प्रावधान था। बाद में वर्ष 2008 के नियमों के तहत शिक्षाकर्मी संवर्ग को नगरीय निकाय अध्यापक संवर्ग में शामिल किया गया। इसके बाद वर्ष 2018 के नियमों के तहत इस संवर्ग को राज्य स्कूल शिक्षा सेवा के शैक्षणिक संवर्ग में शामिल किया गया।
MP: 2018 के नियमों के बाद बदली सेवा व्यवस्था
हाईकोर्ट के आदेश में बताया गया कि वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा सेवा के शिक्षण संवर्ग से जुड़े नए सेवा शर्त एवं भर्ती नियम लागू हुए। इन नियमों के तहत वर्ष 2008 के नियमों के अंतर्गत स्थानीय निकायों के अधीन कार्य कर रहे अध्यापक संवर्ग को राज्य के नए शैक्षणिक संवर्ग में शामिल किया गया।
अदालत ने इस व्यवस्था को देखते हुए कहा कि नए संवर्ग में शामिल होने के बाद शिक्षकों की सेवा शर्तों पर राज्य सरकार के नियम लागू होते हैं। इसी संदर्भ में पूर्व सेवा की गणना और उससे जुड़े लाभों के सवाल पर अदालत ने पहले से दिए गए न्यायिक निर्णयों को महत्वपूर्ण माना।
MP: पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ का भी मामला
याचिकाकर्ता की मुख्य मांगों में पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ शामिल थे। उनका कहना था कि सेवा की शुरुआत वर्ष 1998 में हुई थी, इसलिए सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में उस सेवा अवधि को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के मामले की जांच पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्णयों के आधार पर की जाए। यदि याचिकाकर्ता उन मामलों के समान स्थिति में पाया जाता है, तो उसे संबंधित पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए जाएं।
MP: अधिकारियों को तीन महीने में फैसला लेने के निर्देश
हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अदालत के आदेश की प्रति मिलने के बाद याचिकाकर्ता के पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े दावे पर निर्धारित समय के भीतर निर्णय लिया जाए। आदेश में संबंधित लाभ दिए जाने की स्थिति में तीन महीने के भीतर कार्रवाई करने की बात कही गई है।
अदालत ने इसी निर्देश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया। इसका अर्थ यह है कि संबंधित कर्मचारी के मामले में लाभ सीधे स्वतः लागू करने के बजाय पहले यह देखा जाएगा कि उसका मामला पूर्व में तय किए गए समान मामलों की श्रेणी में आता है या नहीं।
MP: शिक्षकों की पुरानी सेवा की गणना का मुद्दा अहम
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शिक्षकों की शुरुआती सेवा अवधि को लेकर है। मध्य प्रदेश में स्थानीय निकायों के अधीन शिक्षाकर्मी के रूप में नियुक्त कर्मचारियों को अलग-अलग चरणों में अध्यापक और फिर राज्य के शैक्षणिक संवर्ग में शामिल किया गया। इस बदलाव के दौरान उनकी पूर्व सेवा को किस तरह गिना जाए, यह लंबे समय से सेवा संबंधी विवादों का विषय रहा है।
राज्य विधानसभा में भी शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति से वरिष्ठता, क्रमोन्नति, ग्रेच्युटी और पेंशन जैसे मुद्दों पर सवाल उठ चुके हैं। सरकार की ओर से पूर्व में बताया गया है कि नवीन शैक्षणिक संवर्ग के कर्मचारियों के लिए संबंधित सेवा नियमों के अनुसार पदोन्नति और अन्य लाभों की व्यवस्था की गई है।
MP: आदेश से समान मामलों वाले शिक्षकों की उम्मीदें बढ़ीं
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद ऐसे शिक्षक और पूर्व शिक्षाकर्मी, जिनकी सेवा का सफर समान परिस्थितियों में रहा है, उनकी नजर भी इस तरह के न्यायिक फैसलों पर रहेगी। हालांकि किसी कर्मचारी को लाभ मिलने के लिए उसके नियुक्ति रिकॉर्ड, संवर्ग में विलय, लागू सेवा नियम और संबंधित न्यायिक आदेशों के अनुरूप स्थिति का परीक्षण जरूरी होगा।
फिलहाल जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश ने संबंधित याचिकाकर्ता के मामले में पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर पुनर्विचार का रास्ता स्पष्ट किया है। अधिकारियों को अदालत के निर्देश के अनुसार मामले की जांच कर निर्धारित अवधि में निर्णय लेना होगा।


