BY: Yoganand Shrivastva
Firecracker Smoke दिवाली का त्योहार रोशनी और खुशियों के साथ मनाया जाता है, लेकिन पटाखों से निकलने वाला धुआं सेहत के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। आतिशबाजी के दौरान हवा में PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कणों के साथ सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और विभिन्न धातुओं के कण भी फैल सकते हैं। ये प्रदूषक सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर आंखों और गले में जलन, खांसी तथा सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकते हैं।
जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी या दिल से जुड़ी बीमारी है, उनके लिए पटाखों का धुआं ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को भी इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसे में कुछ आसान उपाय अपनाकर जहरीले धुएं के संपर्क को कम किया जा सकता है।
1. बाहर निकलना हो तो N95 या N99 मास्क पहनें
Firecracker Smoke प्रदूषण के दौरान बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी गुणवत्ता वाला और चेहरे पर ठीक से फिट होने वाला N95 या N99 मास्क इस्तेमाल करें। मास्क नाक और मुंह को पूरी तरह ढकना चाहिए और किनारों से हवा अंदर नहीं जानी चाहिए।
साधारण कपड़े का मास्क, रुमाल या स्कार्फ बेहद छोटे प्रदूषण कणों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते। ध्यान रखें कि N95 मास्क सूक्ष्म कणों से बचाव में मदद करता है, लेकिन सभी हानिकारक गैसों से पूरी सुरक्षा नहीं देता।
2. पटाखे जलने के दौरान घर के अंदर रहें
Firecracker Smoke दिवाली की रात जब आसपास ज्यादा आतिशबाजी हो रही हो, तब अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें, ताकि धुआं अंदर न आए। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से धुएं वाली जगहों से दूर रखें।
3. घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें
Firecracker Smoke यदि घर में एयर प्यूरीफायर उपलब्ध है तो कमरे के आकार के अनुसार HEPA फिल्टर वाला उपकरण इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके फिल्टर की सफाई और बदलाव निर्माता के निर्देशों के अनुसार करें। ओजोन पैदा करने वाले एयर क्लीनर से बचें, क्योंकि वे घर के अंदर प्रदूषण बढ़ा सकते हैं।
4. प्रदूषण बढ़ने पर मॉर्निंग वॉक और एक्सरसाइज से बचें
दिवाली के आसपास हवा की गुणवत्ता खराब होने पर खुले में दौड़ना, साइकिल चलाना और भारी व्यायाम करना टाल दें। प्रदूषण के स्तर की जानकारी के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) चेक करें। हवा की गुणवत्ता खराब होने पर बाहर शारीरिक गतिविधियां कम रखें।
5. अस्थमा और सांस के मरीज दवाएं साथ रखें
अस्थमा, सीओपीडी और दूसरी सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी नियमित दवाएं लेते रहना चाहिए। यदि डॉक्टर ने इन्हेलर या रेस्क्यू मेडिसिन दी है तो उसे अपने पास रखें। पटाखे जलाने वाली जगहों पर जाने से बचें।
6. घर के अंदर भी धुएं से बचें
जब बाहर का प्रदूषण बढ़ा हो, तब घर के अंदर अगरबत्ती, धूप, मच्छर भगाने वाली कॉइल और अन्य धुआं पैदा करने वाली चीजों का इस्तेमाल कम करें। घर में धूल साफ करने के लिए सूखी झाड़ू लगाने के बजाय गीले कपड़े से सफाई और पोछा लगाना बेहतर है।
7. बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, जबकि बुजुर्गों में पहले से सांस या दिल की बीमारी होने की आशंका अधिक हो सकती है। इसलिए उन्हें पटाखों के धुएं और भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूर रखें। प्रदूषण ज्यादा होने पर बच्चों को बाहर खेलने न भेजें।
8. सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
पटाखों के धुएं के संपर्क में आने के बाद लगातार खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न, चक्कर या सांस फूलने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। सांस लेने में गंभीर परेशानी या सीने में दर्द होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
ग्रीन दिवाली मनाना भी है बेहतर विकल्प
फेफड़ों और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका पटाखों का इस्तेमाल कम करना या उनसे परहेज करना है। दीपक, सजावटी लाइट और अन्य धुआं रहित विकल्पों से भी दिवाली को खूबसूरत बनाया जा सकता है। यदि आतिशबाजी की जाए तो स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करें और कम प्रदूषण वाले अनुमोदित ग्रीन पटाखों को प्राथमिकता दें।
स्वास्थ्य संबंधी सलाह: मास्क और एयर प्यूरीफायर प्रदूषण के संपर्क को कम कर सकते हैं, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं करते। इसलिए धुएं से दूरी बनाना सबसे जरूरी बचाव है।


