BY: Yoganand Shrivastva
ED Investigation भारत के घरेलू मामलों में कथित तौर पर हस्तक्षेप करने के उद्देश्य से विदेश से भेजी गई संदिग्ध फंडिंग को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी के मुताबिक, करीब 15 लाख अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 14.1 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं। आशंका है कि इस रकम को कई देशों के माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर कर भारत तक पहुंचाया गया। ED दो विदेशी संस्थाओं की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जर्मन ट्रस्ट से शुरू हुई फंडिंग, लिथुआनिया के रास्ते रकम ट्रांसफर
ED Investigation ED की जांच में सेंट किट्स एंड नेविस में पंजीकृत कंपनी TCC Digital Markets Ltd का नाम सामने आया है। एजेंसी के अनुसार, इस कंपनी को 10 लाख अमेरिकी डॉलर की रकम जर्मनी के Dr Matthias Karl Vogt Trust से प्राप्त हुई थी।
जांच में दावा किया गया है कि जर्मन ट्रस्ट ने यह रकम पहले लिथुआनिया की कंपनी XBase Digital UAB को भेजी थी। ED को संदेह है कि इस प्रक्रिया के जरिए फंडिंग के वास्तविक स्रोत और लेनदेन की प्रकृति को छिपाने की कोशिश की गई। हालांकि, इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की भूमिका और उद्देश्य की जांच अभी जारी है।
दुबई और डिजिटल एसेट्स के जरिए भारत तक पहुंची रकम
ED Investigation जांच एजेंसी को आशंका है कि संदिग्ध फंडिंग को दुबई और लिथुआनिया के रास्ते डिजिटल एसेट्स तथा हवाला नेटवर्क के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। इसके बाद सेंट किट्स एंड नेविस की कंपनी ने कथित तौर पर दो किस्तों में ब्रिटेन की एक कंपनी को ग्रांट के रूप में रकम ट्रांसफर की।
इसके अलावा कनाडा में पंजीकृत ZBase Digital Inc के जरिए भी 5 लाख अमेरिकी डॉलर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। यह रकम फरवरी 2026 में उसी ब्रिटिश कंपनी के खाते में ट्रांसफर की गई थी। दोनों लेनदेन को मिलाकर कुल संदिग्ध राशि 15 लाख डॉलर बताई जा रही है। ED इन ट्रांजैक्शन से जुड़े रिकॉर्ड की Airwallex के माध्यम से भी पुष्टि कर रही है।
विदेशी फंडिंग पर सरकार की सख्ती, FCRA नियमों में भी बदलाव
ED Investigation विदेश से आने वाले धन के इस्तेमाल और उसके उद्देश्य को लेकर केंद्र सरकार पहले से ही नियमों को सख्त कर रही है। इसी साल विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत NGO और अन्य संगठनों के लिए नियमों में बदलाव किए गए थे।
नए प्रावधानों के तहत विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों को अपने काम के उद्देश्य, गतिविधियों और कार्यक्षेत्र की स्पष्ट जानकारी देनी होती है। विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
ED की मौजूदा जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि विदेश से आई संदिग्ध रकम का वास्तविक लाभार्थी कौन था और इसका इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया जाना था। फिलहाल एजेंसी के संदेह और जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।


