Report: Prem Shrivastva
Jharkhand High Court झारखंड के पूर्व खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री सरयू राय से जुड़े आहार पत्रिका प्रकाशन और वितरण में कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी मामले की फाइल कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग के पास अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखी जा सकती। यदि संबंधित प्राधिकारी ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है, तो उससे जल्द उचित निर्णय लेने की अपेक्षा की जाती है। न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने 4 नवंबर 2026 को मनोज सिंह की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका संख्या 663/2025 का निष्पादन करते हुए यह टिप्पणी की।
3.38 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता से जुड़ा है मामला
Jharkhand High Court यह मामला अक्टूबर 2017 से मार्च 2019 के बीच खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘आहार’ के मुद्रण, प्रकाशन और वितरण से संबंधित है। याचिकाकर्ता मनोज सिंह ने आरोप लगाया है कि पत्रिका के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया और 3 करोड़ 38 लाख 26 हजार 473 रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता हुई। याचिका में तत्कालीन मंत्री सरयू राय सहित अन्य संबंधित लोगों पर पद के दुरुपयोग और सरकारी धन की हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और हाईकोर्ट के आदेश में किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं किया गया है।
सरकार के शपथपत्र में पांच लोगों के खिलाफ आरोप सही पाए जाने का उल्लेख
Jharkhand High Court मनोज सिंह की शिकायत पर 6 सितंबर 2024 को रांची के अरगोड़ा थाने में कांड संख्या 228/2024 दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 403, 406, 408, 409, 420 और 120बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं का भी उल्लेख है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने राज्य सरकार के जवाबी शपथपत्र का हवाला दिया। अदालत के आदेश में उद्धृत शपथपत्र के पैराग्राफ 18 के अनुसार, पुलिस जांच और पर्यवेक्षण के दौरान नामजद आरोपियों के खिलाफ IPC की संबंधित धाराओं के तहत मामला सही पाया गया था।
शपथपत्र में तत्कालीन मंत्री सरयू राय, उनके निजी सचिव आनंद कुमार, सुनील शंकर, बाबा कंप्यूटर्स के मालिक रितेश गुप्ता और जेपीपीएल के प्रबंध निदेशक का नाम शामिल है। हालांकि, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति प्राप्त करना जरूरी बताया गया है।
एसीबी को जांच सौंपने का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित
Jharkhand High Court मामले की जांच एसीबी को सौंपने की प्रक्रिया के संबंध में पुलिस मुख्यालय ने 4 जून 2025 को पत्रांक 1385/X के माध्यम से कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग से आवश्यक निर्देश मांगे थे। सरकार के पूरक शपथपत्र के मुताबिक, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की आगे की जांच एसीबी द्वारा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने और मामला अपने हाथ में लेने के बाद की जाती है। याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि नवंबर 2025 में दाखिल पूरक शपथपत्र से भी स्पष्ट था कि मामला विभाग के पास लंबित है और निर्णय नहीं होने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद याचिका का निष्पादन
Jharkhand High Court राज्य सरकार के जवाबी और पूरक शपथपत्रों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि एसीबी को आगे की जांच सौंपने के लिए आवश्यक निर्देश का प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग के पास अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकता। संबंधित प्राधिकारी से शीघ्र उचित निर्णय लेने की अपेक्षा जताते हुए हाईकोर्ट ने आपराधिक रिट याचिका का निष्पादन कर दिया। इसके साथ ही अंतरिम आवेदन संख्या 1488/2026 सहित अन्य लंबित अंतरिम आवेदनों को भी समाप्त कर दिया गया।
सीबीआई ने उठाया याचिका में पक्षकार नहीं बनाए जाने का सवाल
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार भारती उपस्थित हुए। उन्होंने याचिका में तकनीकी खामी की ओर अदालत का ध्यान दिलाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है और जिसकी जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की जा रही है, उसे रिट याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से जांच में देरी और स्वतंत्र एजेंसी को जांच सौंपने की मांग की गई थी।


