BY: Yoganand Shrivastva
Pakistan Economy आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के सामने व्यापार घाटे ने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर 2026 के दौरान देश का व्यापार घाटा बढ़कर 14.6 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 1.41 लाख करोड़ रुपये बैठती है। पाकिस्तान के निर्यात में अपेक्षित तेजी नहीं आने और आयात में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह स्थिति बनी है।
पाकिस्तान के अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (PBS) के आंकड़ों के हवाले से बताया कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में व्यापार घाटे में 16 फीसदी की वृद्धि हुई है। इस दौरान पाकिस्तान ने करीब 26 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जबकि निर्यात से केवल 11.4 अरब डॉलर की कमाई हुई।
चार महीने में 12.5 फीसदी बढ़ गया आयात
Pakistan Economy आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई से अक्टूबर के बीच पाकिस्तान का आयात 2.9 अरब डॉलर बढ़कर 26 अरब डॉलर हो गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले करीब 12.5 फीसदी अधिक है।
पाकिस्तान के लिए ऊर्जा आयात का बढ़ता खर्च भी चिंता का विषय बना हुआ है। केंद्रीय बैंक के अनुमान के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में देश का कुल आयात बिल बढ़कर 71 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यदि आयात में इसी तरह तेजी जारी रही तो विदेशी मुद्रा भंडार और भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है।
निर्यात में 8.5 फीसदी की बढ़ोतरी, फिर भी नहीं संभला व्यापार संतुलन
Pakistan Economy पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक, जुलाई से अक्टूबर के बीच देश का कुल निर्यात 11.4 अरब डॉलर रहा। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि से 8.5 फीसदी ज्यादा है। हालांकि, आयात की तुलना में निर्यात की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तानी सरकार ने बजट में बड़े निर्यातकों को सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 88 अरब पाकिस्तानी रुपये की सब्सिडी का प्रावधान किया है। इसके बावजूद निर्यात में बड़ी छलांग देखने को नहीं मिली है। पाकिस्तान का मासिक निर्यात अभी भी करीब 2.5 से 3 अरब डॉलर के बीच बना हुआ है।
पाकिस्तानी रुपये का अवमूल्यन भी नहीं आया काम
Pakistan Economy पाकिस्तान ने अपनी मुद्रा का मूल्य घटाकर निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश की, लेकिन इसका अपेक्षित फायदा नहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये में करीब 100 रुपये का अवमूल्यन होने के बाद भी निर्यात में उल्लेखनीय तेजी नहीं आई।
पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया एक पैसे मजबूत होकर 276.66 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
रक्षा मंत्री ने नौकरशाहों की विदेश में बसने की योजना पर उठाए सवाल
पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों के बीच देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की विदेश में बसने की योजनाओं को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में काबिल और ईमानदार नौकरशाह मौजूद हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कई वरिष्ठ अधिकारियों ने कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों में स्थायी रूप से बसने की तैयारी की है।
‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ख्वाजा आसिफ ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की सेवा करने वाले अधिकारियों का विदेश में स्थायी ठिकाना बनाना चिंता का विषय है।
लगातार बढ़ता व्यापार घाटा, आयात पर निर्भरता और निर्यात की धीमी रफ्तार पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाले महीनों में सरकार के लिए व्यापार संतुलन सुधारना और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करना अहम होगा।


