Sonia Gandhi: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के एक इंटरव्यू को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने बाबरी मस्जिद विध्वंस, देश में लगाए गए आपातकाल और इंदिरा गांधी की हत्या से जुड़े अनुभवों पर अपनी बात रखी। उन्होंने 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को याद करते हुए बताया कि उस समय वह भावुक हो गई थीं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक गलतियों को भी स्वीकार किया, जिनसे भारतीय जनता पार्टी के उभार को कुछ हद तक मदद मिली।
सोनिया गांधी के इस इंटरव्यू पर दिल्ली सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री और बीजेपी नेता प्रवेश वर्मा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बाबरी मस्जिद का मुद्दा उठाए जाने के समय पर सवाल खड़े करते हुए इसे चुनाव से जोड़कर तंज कसा। प्रवेश वर्मा ने सोशल मीडिया पर कविता के अंदाज में अपनी बात रखी और कहा कि 33 साल बाद इस मुद्दे की याद आने के पीछे चुनावी वजह हो सकती है।
Sonia Gandhi: प्रवेश वर्मा ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा?
प्रवेश वर्मा ने सोनिया गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “33 साल बाद आई बाबरी की याद है, फिर वही घड़ियाली आंसू, फिर वही फरियाद है। आज ही क्यों छिड़ी ये पुरानी बात? लगता है कहीं चुनाव है।” उनके इस बयान को सोनिया गांधी के इंटरव्यू में बाबरी मस्जिद विध्वंस का जिक्र किए जाने पर राजनीतिक तंज के तौर पर देखा जा रहा है।
बाबरी विध्वंस को याद कर भावुक हुई थीं सोनिया गांधी
‘द गार्जियन’ को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने टेलीविजन पर इस घटना को देखा, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। सोनिया के मुताबिक, उस समय उन्हें महसूस हुआ कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके सहयोगियों ने जिस धर्मनिरपेक्ष भारत की कल्पना की थी, उसे बनाए रखने के लिए लंबा संघर्ष करना होगा।
उन्होंने यह भी माना कि कांग्रेस की अपनी कुछ राजनीतिक कमियों और लापरवाही ने भी भाजपा तथा उसकी हिंदुत्व आधारित राजनीति के विस्तार में भूमिका निभाई। सोनिया ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी कई मौकों पर परिस्थितियों को लेकर जरूरत से ज्यादा निश्चिंत रही।
Sonia Gandhi: आपातकाल को इंदिरा गांधी की गलती बताया
इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने इसे एक गलत फैसला बताया। सोनिया के अनुसार, उन्हें लगता है कि इंदिरा गांधी को भी बाद में इस निर्णय के नतीजों का एहसास हुआ था और वह इस फैसले को लेकर सहज नहीं थीं।
सोनिया ने उस दौर में परिवार के भीतर मौजूद अलग-अलग विचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके पति राजीव गांधी आपातकाल लगाने के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने इंदिरा गांधी को अगला चुनाव आने तक इंतजार करने की सलाह दी थी। वहीं, संजय गांधी का रुख इससे अलग था। सोनिया ने अपनी किताब में यह भी लिखा है कि संजय गांधी को नियंत्रण में रखा जाता, तो आपातकाल के बाद हुए नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था।
Sonia Gandhi: इंदिरा गांधी की हत्या का दर्दनाक अनुभव भी साझा किया
सोनिया गांधी ने अपनी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को हुई हत्या से जुड़ी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन वह घर पर थीं, तभी उन्हें पटाखों जैसी आवाज सुनाई दी। कुछ ही देर बाद उन्हें इंदिरा गांधी पर गोली चलने की जानकारी मिली।
सोनिया के मुताबिक, जब वह इंदिरा गांधी के कार्यालय पहुंचीं, तो उन्होंने उन्हें गोलियों से छलनी और खून से लथपथ हालत में जमीन पर पड़ा देखा। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। सोनिया ने बताया कि अस्पताल जाते समय वह अपनी सास के पास थीं और उन्हें संभालने की कोशिश कर रही थीं। यह घटना उनके जीवन के सबसे दर्दनाक अनुभवों में से एक रही।
Sonia Gandhi: वंशवाद के सवाल पर सोनिया गांधी ने दिया यह जवाब
इंटरव्यू के दौरान सोनिया गांधी से कांग्रेस में गांधी परिवार के नेतृत्व को लेकर भी सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि पार्टी अपने नेतृत्व को गांधी परिवार से अलग क्यों नहीं कर पा रही है। इस सवाल पर उन्होंने सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि इसका जवाब पार्टी से पूछा जाना चाहिए।
वंशवाद के आरोपों पर भी उन्होंने विस्तार से कुछ कहने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता चुनाव लड़ते हैं और जीतते-हारते रहते हैं। इस तरह इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक जीवन, परिवार से जुड़े अनुभवों और कांग्रेस की चुनौतियों पर कई अहम बातें रखीं।
Sonia Gandhi: सोनिया गांधी की किताब के विमोचन से पहले आया इंटरव्यू
सोनिया गांधी का यह इंटरव्यू उनकी संस्मरण पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ के विमोचन से पहले सामने आया है। इसमें उन्होंने अपने निजी जीवन, गांधी परिवार में आने के अनुभव और भारतीय राजनीति के कई अहम घटनाक्रमों को याद किया है। इंटरव्यू में दिए गए उनके बयानों के बाद बाबरी मस्जिद विध्वंस और आपातकाल जैसे पुराने मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।


