Baby Diaper Rash : बच्चों में डायपर रैश एक आम समस्या है। डायपर पहनने वाले शिशुओं की त्वचा बेहद नाजुक और संवेदनशील होती है, इसलिए लंबे समय तक नमी, पेशाब या मल के संपर्क में रहने से त्वचा पर लालिमा, जलन और रैशेज हो सकते हैं। कई बार टाइट डायपर या त्वचा पर बार-बार रगड़ लगने से भी परेशानी बढ़ जाती है।डायपर रैश होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि बच्चे की साफ-सफाई में कमी रखी गई है। शिशुओं की त्वचा अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए नमी और घर्षण का असर उस पर जल्दी दिखाई दे सकता है। ऐसे में बच्चे की त्वचा की सही देखभाल करना बेहद जरूरी है। डर्मेटोलॉजिस्ट के बताए कुछ आसान उपायों को अपनाकर डायपर रैश के खतरे को कम किया जा सकता है।
Baby Diaper Rash : डायपर रैश क्यों होता है?
डायपर एरिया में लंबे समय तक नमी बनी रहने से त्वचा की सुरक्षा परत कमजोर हो सकती है। पेशाब और पॉटी के लगातार संपर्क में आने से त्वचा में जलन होने लगती है। इसके अलावा टाइट डायपर से होने वाली रगड़ भी लालिमा और रैश को बढ़ा सकती है।शिशुओं की त्वचा वयस्कों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती है। इसलिए डायपर बदलने में देरी, ज्यादा रगड़कर सफाई करना या तेज खुशबू वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी त्वचा को परेशान कर सकता है।
Baby Diaper Rash : समय पर डायपर बदलना है सबसे जरूरी
डायपर केवल तब बदलना सही नहीं है जब वह पूरी तरह भारी हो जाए। बच्चे के पॉटी करने के बाद डायपर तुरंत बदल देना चाहिए। इसके अलावा डायपर गीला होने पर भी उसे ज्यादा देर तक पहने न रहने दें।डायपर जितनी देर तक गीला रहेगा, उतनी देर तक बच्चे की त्वचा नमी के संपर्क में रहेगी। इससे जलन और रैश का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित अंतराल पर डायपर चेक करते रहना जरूरी है।
Baby Diaper Rash : सफाई करते समय त्वचा को न रगड़ें
डायपर बदलते समय बच्चे की त्वचा को साफ करने के लिए बहुत ज्यादा रगड़ने से बचें। अत्यधिक सफाई या जोर से पोछने पर त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत प्रभावित हो सकती है।सफाई के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर वाइप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं तो बिना खुशबू और अल्कोहल वाले वाइप्स चुनना बेहतर है। त्वचा को साफ करने के बाद उसे रगड़कर सुखाने के बजाय हल्के हाथ से थपथपाकर सुखाएं।नया डायपर पहनाने से पहले कुछ मिनट बच्चे की त्वचा को खुली हवा में रहने देना भी मददगार हो सकता है।
Baby Diaper Rash : जिंक ऑक्साइड या पेट्रोलियम जेली वाली क्रीम
डायपर एरिया की त्वचा को नमी से बचाने के लिए बैरियर क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है। जिंक ऑक्साइड या पेट्रोलियम जेली वाली क्रीम त्वचा और नमी के बीच एक सुरक्षा परत बनाने में मदद करती है।क्रीम की बहुत मोटी परत लगाने की जरूरत नहीं होती। त्वचा साफ और सूखी करने के बाद हल्की परत लगाई जा सकती है। अगर बच्चे की त्वचा पर पहले से गंभीर रैश है, तो किसी भी मेडिकेटेड क्रीम का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करें।
Baby Diaper Rash : डायपर का सही साइज चुनना जरूरी
बच्चे को बहुत टाइट डायपर पहनाने से बचें। टाइट डायपर त्वचा से लगातार रगड़ खा सकता है और इसके कारण गर्मी व नमी अंदर फंस सकती है।डायपर ऐसा होना चाहिए जो बच्चे को आराम से फिट आए और त्वचा पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डाले। बच्चे के बढ़ने के साथ डायपर का साइज भी बदलते रहें।
Baby Diaper Rash : खुशबूदार पाउडर और घरेलू नुस्खों से बचें
बच्चे की नाजुक त्वचा पर खुशबूदार पाउडर, एंटीसेप्टिक लिक्विड या बिना चिकित्सकीय सलाह के घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। कुछ उत्पादों में मौजूद पदार्थ त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं और रैश को और बढ़ा सकते हैं।इसी तरह बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड या कॉम्बिनेशन क्रीम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बच्चों की त्वचा पर किसी भी दवा या मेडिकेटेड प्रोडक्ट का उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
Baby Diaper Rash : डायपर रैश होने पर क्या ध्यान रखें?
अगर बच्चे की त्वचा पर हल्की लालिमा या रैश दिखाई देता है तो डायपर बदलने की आवृत्ति बढ़ाएं और डायपर एरिया को साफ व सूखा रखने पर ध्यान दें। त्वचा को अनावश्यक रूप से रगड़ने से बचाएं और जरूरत के अनुसार बैरियर क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है।बच्चे को कुछ समय बिना डायपर के रखने से भी डायपर एरिया को सूखा रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अगर रैश लगातार बढ़ रहा है तो केवल घरेलू देखभाल पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
Baby Diaper Rash : इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
अगर रैश बहुत ज्यादा बढ़ गया हो, त्वचा पर छाले दिखाई दें, मवाद बनने लगे या रैश त्वचा की परतों तक फैल जाए तो बच्चे को चर्म रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। इसी तरह उचित देखभाल के बावजूद अगर रैश 2 से 3 दिनों में ठीक नहीं होता है या लगातार बिगड़ता जाता है, तो चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।कुछ मामलों में डायपर एरिया का रैश फंगल या बैक्टीरियल संक्रमण से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को सही जांच और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार की जरूरत पड़ सकती है।
Baby Diaper Rash : बच्चे की त्वचा की सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान
डायपर रैश से बचाव के लिए बार-बार त्वचा को धोना जरूरी नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है कि बच्चे की त्वचा को ज्यादा देर तक नमी के संपर्क में न रहने दें। समय पर डायपर बदलना, हल्के हाथ से सफाई करना, त्वचा को अच्छी तरह सुखाना और सही बैरियर क्रीम का इस्तेमाल करने से रैश के जोखिम को कम किया जा सकता है।अगर बच्चे को बार-बार डायपर रैश हो रहा है या रैश सामान्य देखभाल से ठीक नहीं हो रहा है, तो इसका कारण जानने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ या डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर रहेगा।


