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केरल में सीपीएम सांसद के रिश्तेदार की दबंगई: अस्पताल स्टाफ पर हमला, CCTV में कैद, शिकायत वापस

BY: Yoganand Shrivastva


केरल के पालक्काड़ ज़िले से सत्तारूढ़ पार्टी सीपीएम से जुड़े एक शर्मनाक मामले की जानकारी सामने आई है। घटना चेलक्करा तालुक अस्पताल की है, जहां सीपीएम सांसद के. राधाकृष्णन के जीजा रमेश ने अस्पताल के सुरक्षा गार्ड और महिला अटेंडेंट पर हमला कर दिया। यह पूरी वारदात अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।

चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक पुलिस ने इस घटना में कोई FIR दर्ज नहीं की है, जबकि वीडियो स्पष्ट रूप से मारपीट को दिखा रहा है। इससे राज्य में कानून व्यवस्था और सत्ता के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।


क्या है पूरा मामला?

घटना 11 जुलाई की है, जब पालक्काड़ के चेलक्करा तालुक अस्पताल में एक ऑटो को ICU परिसर के बाहर पार्क किया गया था। अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने जब ऑटो हटाने को कहा, तो वहां मौजूद रमेश (सांसद राधाकृष्णन के बहनोई) और उनके साथियों ने बहस शुरू कर दी। देखते ही देखते यह बहस हिंसक झगड़े में बदल गई और अस्पताल के सुरक्षा गार्ड और महिला अटेंडेंट के साथ मारपीट की गई।


शिकायत दी गई, फिर दबाव में वापस ली गई

अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार ने पुष्टि की है कि उनके दो कर्मचारियों पर हमला हुआ है। पहले अस्पताल प्रशासन ने इस घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में शिकायत वापस ले ली गई, जिसे लेकर अब दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप की अटकलें लगाई जा रही हैं।


वायरल वीडियो और ऑडियो ने खोली पोल

इस घटना का एक वीडियो और एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हो चुका है। वीडियो में हमलावरों को कर्मचारियों पर हमला करते देखा जा सकता है, जबकि ऑडियो में अधीक्षक सुनील कुमार कहते सुनाई दे रहे हैं कि अस्पताल के दो कर्मचारियों के साथ हाथापाई हुई है।

बताया जा रहा है कि ऑटो में रमेश खुद आए थे और पार्किंग को लेकर हुए विवाद ने ही हिंसक रूप ले लिया। उनकी दबंगई की तस्वीरें अब हर तरफ चर्चा का विषय बन गई हैं।


विपक्ष का तीखा हमला

विपक्षी पार्टियों – कांग्रेस और बीजेपी ने इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ एलडीएफ सरकार पर करारा हमला बोला है। दोनों दलों का आरोप है कि राज्य में सीपीएम नेताओं के रिश्तेदार कानून से ऊपर समझे जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस निष्क्रिय बनी हुई है और सरकार सत्ता के दुरुपयोग में लिप्त है।


अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?

यह सवाल अब हर ओर से उठ रहा है कि जब घटना CCTV में कैद हो चुकी है और वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, तब भी पुलिस ने अब तक कोई केस क्यों नहीं दर्ज किया? क्या सत्ता से जुड़े लोगों के लिए कानून अलग है?


निष्कर्ष

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि कैसे सत्ताधारी नेताओं और उनके परिजनों को आम कानून का डर नहीं होता। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर की गई यह दबंगई केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रहनी चाहिए – इसके लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई और जवाबदेही जरूरी है। यदि इस तरह की घटनाओं पर पर्दा डाला गया, तो यह आम जनता में व्यवस्था के प्रति अविश्वास को और गहरा करेगा।

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