लोकेशन: पवई | संवाददाता: अनुरुद्ध खम्परिया
Pawai Paddy Storage Scam : मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के पवई क्षेत्र में धान के भंडारण और उसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पवई मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित रुद्राक्ष वेयरहाउस और आयुसी वेयरहाउस में वर्ष 2025-26 के सीजन में धान का भंडारण किया गया था। अब इन गोदामों में रखी धान की बोरियों में मिट्टी मिलने के आरोप सामने आने के बाद भंडारण व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि बड़ी मात्रा में धान की बोरियों में मिट्टी मिली हुई है। इसकी वजह से भंडारित धान की गुणवत्ता और सरकारी स्तर पर होने वाली निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, मिट्टी किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में धान में पहुंची, यह जांच का विषय है।
Pawai Paddy Storage Scam : वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था पर सवाल
मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन का मुख्य दायित्व कृषि उपज, अनाज और अन्य अधिसूचित वस्तुओं का सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से भंडारण करना है। इसके लिए गोदामों में अनाज की गुणवत्ता की जांच से लेकर नमी की निगरानी और फ्यूमिगेशन जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।
धान को वेयरहाउस में जमा करने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच की जाती है। इसमें नमी, धूल-कचरा और फंगस जैसी चीजों की जांच शामिल है। ऐसे में यदि भंडारण के बाद धान की बोरियों में बड़ी मात्रा में मिट्टी पाए जाने की पुष्टि होती है तो यह सवाल स्वाभाविक है कि गुणवत्ता जांच और निगरानी की प्रक्रिया में चूक कहां हुई।
Pawai Paddy Storage Scam : बोरियों में मिट्टी कैसे पहुंची, कौन है जिम्मेदार?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि धान की बोरियों में मिट्टी आखिर कैसे पहुंची। यदि जांच में धान में मिट्टी मिलाने या मिलावट की पुष्टि होती है तो यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि यह प्रक्रिया भंडारण से पहले हुई या भंडारण के दौरान।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि गोदाम में धान की आवक, स्टैकिंग, रखरखाव और निरीक्षण के दौरान किन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी थी। लाखों क्विंटल धान से जुड़े इस मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष जांच की जरूरत दिखाई देती है।
Pawai Paddy Storage Scam : डिजिटल निगरानी के बावजूद सामने आया मामला
वेयरहाउसिंग व्यवस्था में खाद्यान्न की निगरानी के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। मोबाइल ऐप के जरिए भौतिक सत्यापन, नमी की निगरानी और फ्यूमिगेशन जैसी प्रक्रियाओं को रिकॉर्ड किए जाने की व्यवस्था बताई जाती है।
ऐसे में पवई क्षेत्र के इन दोनों वेयरहाउस को लेकर उठे सवाल यह जानना जरूरी बनाते हैं कि डिजिटल रिकॉर्ड में धान की स्थिति क्या दर्ज की गई थी। यदि निरीक्षण के समय गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया था तो बाद में बोरियों में मिट्टी मिलने की स्थिति कैसे बनी, इसकी जांच आवश्यक है।
Pawai Paddy Storage Scam : सागर से पहुंची जांच टीम ने क्या जांच की?
मामले की जानकारी सामने आने के बाद सागर से जांच टीम के आने की बात कही जा रही है। हालांकि, जांच टीम ने दोनों वेयरहाउस में क्या-क्या जांच की और जांच में अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं, इसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विभागीय जांच के जरिए मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ पाएगी या नहीं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि धान में मिट्टी मिलने के आरोप कितने सही हैं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
Pawai Paddy Storage Scam : भंडारण की जिम्मेदारी किन अधिकारियों पर?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार पवई क्षेत्र में भंडारण से जुड़ी जिम्मेदारियों में केंद्र स्तर पर कनिष्ठ सहायक एवं केंद्र प्रभारी गोविंद कुशवाहा की भूमिका का उल्लेख किया जा रहा है।
वहीं, इसके बाद शाखा स्तर पर वरिष्ठ सहायक एवं शाखा प्रभारी के तौर पर प्रयांस तिवारी की जिम्मेदारी बताई गई है। हालांकि, किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी या लापरवाही जांच के आधिकारिक निष्कर्ष के बाद ही तय की जानी चाहिए।
Pawai Paddy Storage Scam : अध्यक्ष संजय नायगच के गृह जिले से जुड़ा मामला
यह मामला मध्य प्रदेश वेयरहाउस कॉरपोरेशन के वर्तमान अध्यक्ष संजय नायगच के गृह जिले से जुड़ा होने के कारण भी चर्चा में है। ऐसे में विभागीय स्तर पर होने वाली जांच और उसके निष्कर्ष पर लोगों की नजर रहेगी।
मामले में पारदर्शी जांच के जरिए यह सामने आना जरूरी है कि धान की बोरियों में मिट्टी किस स्तर पर मिली, कितनी मात्रा में अनाज प्रभावित हुआ और भंडारण प्रक्रिया के दौरान निर्धारित मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
Pawai Paddy Storage Scam : जांच रिपोर्ट से खुलेगा पूरे मामले का सच
पवई के रुद्राक्ष और आयुसी वेयरहाउस में भंडारित धान को लेकर उठे सवालों का जवाब अब जांच रिपोर्ट से ही मिल सकेगा। यदि धान की बोरियों में मिट्टी मिलने की पुष्टि होती है तो इसके कारण, जिम्मेदार व्यक्ति और निगरानी में हुई संभावित चूक की विस्तृत जांच आवश्यक होगी।
वहीं, संबंधित अधिकारियों और वेयरहाउस प्रबंधन का पक्ष भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। मामले में निष्पक्ष जांच और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।


