Collectorate Mosque Demolition : सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित 100 साल से अधिक पुरानी बताई जा रही मस्जिद को प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्त किए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सुबह करीब 5 बजे मस्जिद पर बुलडोजर चलाया गया। कार्रवाई के विरोध की आशंका के बीच कई नेताओं को उनके घरों में नजरबंद किए जाने की बात भी सामने आई है।मस्जिद को लेकर रात में भी ध्वस्तीकरण की सूचना फैल गई थी। इसके बाद जिलाधिकारी की ओर से लोगों को मस्जिद सील किए जाने की जानकारी देकर स्थिति शांत करने का प्रयास किया गया था। हालांकि, सुबह होते-होते मस्जिद का ढांचा पूरी तरह जमींदोज हो चुका था। कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा, जबकि भाजपा की ओर से इसे कानून के तहत अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश किया जा रहा है।
Collectorate Mosque Demolition : सुबह तड़के प्रशासन ने की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद पर प्रशासन की कार्रवाई सुबह करीब 5 बजे की गई। मौके पर भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कार्रवाई के बाद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।रात के समय मस्जिद तोड़े जाने की खबर फैलने के बाद लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई थी। उस समय जिलाधिकारी की ओर से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई थी। लेकिन सुबह जब लोग मौके पर पहुंचे तो मस्जिद का ढांचा ध्वस्त हो चुका था।
Collectorate Mosque Demolition : कार्रवाई के विरोध में नेताओं को किया गया नजरबंद
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के विरोध में राजनीतिक नेताओं के पहुंचने की आशंका के बीच कई नेताओं को उनके घरों में नजरबंद किए जाने की जानकारी सामने आई। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को भी कैराना स्थित उनके आवास से बाहर नहीं निकलने दिया गया।इकरा हसन ने कार्रवाई को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच विवाद पैदा करना चाहती है। उनके बयान के बाद इस मामले ने और अधिक राजनीतिक रंग ले लिया।
Collectorate Mosque Demolition : इमरान मसूद बोले- संविधान और कानून पर बुलडोजर चला रहे
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई के जरिए संविधान और कानून पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।मसूद ने कहा कि विपक्ष इस कार्रवाई को नजीर नहीं बनने देगा और मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही। कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगते हुए कानूनी रास्ता अपनाने के संकेत दिए गए हैं।
Collectorate Mosque Demolition : मायावती ने कार्रवाई रोकने की मांग की
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सरकार से ऐसे कदमों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने विवादों के समाधान के लिए दूसरे रास्ते अपनाने की बात कही।मायावती का कहना है कि किसी भी विवाद को कानून और आपसी सहमति के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद यह मुद्दा प्रदेश की सियासत में और चर्चा का विषय बन गया।
Collectorate Mosque Demolition : ओवैसी ने भी सरकार पर साधा निशाना
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि किसी की नाराजगी या खुन्नस निकालने के लिए मस्जिद को निशाना नहीं बनाया जा सकता।ओवैसी के बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। अलग-अलग विपक्षी दलों ने कार्रवाई की प्रक्रिया और इसके पीछे की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
Collectorate Mosque Demolition : अखिलेश यादव ने भी योगी सरकार को घेरा
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सहारनपुर की कार्रवाई को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक दूसरे मामले में हुई कथित कार्रवाई से ध्यान हटाने के लिए इस पूरे प्रकरण को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है।अखिलेश यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जनता अब ऐसे लोगों की कार्यशैली को समझ चुकी है। उनके बयान के बाद सपा और भाजपा के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है।
Collectorate Mosque Demolition : बीजेपी ने कार्रवाई को बताया कानून के तहत कदम
विपक्षी दल जहां ध्वस्तीकरण को लेकर सरकार पर राजनीतिक और सांप्रदायिक दृष्टिकोण अपनाने के आरोप लगा रहे हैं, वहीं भाजपा इस कार्रवाई को कानून के राज और अवैध कब्जों के खिलाफ उठाया गया कदम बता रही है।भाजपा की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि यदि कोई निर्माण सरकारी परिसर में नियमों के विपरीत या अवैध तरीके से किया गया है तो प्रशासन को कानून के तहत कार्रवाई का अधिकार है। ऐसे में सरकार की ओर से मामले को राजनीतिक या धार्मिक विवाद के बजाय प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
Collectorate Mosque Demolition : मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद के पुराने होने का किया दावा
मस्जिद को लेकर मुस्लिम पक्ष की ओर से अलग दावा किया गया है। उनका कहना है कि अंग्रेजों के शासनकाल में कलेक्ट्रेट में काम करने वाले मुस्लिम कर्मचारियों की सुविधा के लिए यह मस्जिद बनवाई गई थी, ताकि उन्हें नमाज अदा करने के लिए दूर नहीं जाना पड़े।मुस्लिम पक्ष का दावा है कि कलेक्ट्रेट परिसर के अस्तित्व में आने से पहले से ही यहां मस्जिद मौजूद थी। इसी दावे को साबित करने के लिए मस्जिद कमेटी की ओर से 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई है।
Collectorate Mosque Demolition : बिजली कनेक्शन को लेकर प्रशासन और कमेटी के दावे अलग
मस्जिद की पुरानियत को लेकर प्रशासन और मस्जिद कमेटी के दावों में अंतर सामने आया है। मस्जिद कमेटी ने 1911 के बिजली बिल को आधार बनाकर दावा किया कि कलेक्ट्रेट से पहले ही वहां मस्जिद मौजूद थी।वहीं जिला प्रशासन की ओर से यह दलील दी गई कि सहारनपुर में बिजली की शुरुआत वर्ष 1912 में हुई थी। इसी वजह से 1911 के बिजली बिल के दावे पर सवाल उठाया गया। यही विवाद मस्जिद की ऐतिहासिक मौजूदगी और निर्माण की वैधता से जुड़े सवालों के केंद्र में है।
Collectorate Mosque Demolition : 16 जुलाई को प्रशासन ने निर्माण को बताया था अवैध
जिला प्रशासन की ओर से 16 जुलाई को मस्जिद के निर्माण को अवैध माने जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद से ही मस्जिद को लेकर विवाद बना हुआ था। आखिरकार प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त कर दिया।इस कार्रवाई के बाद अब विवाद केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
Collectorate Mosque Demolition : स्वामी चक्रपाणि महाराज ने कार्रवाई को सही ठहराया
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने इसे उचित कदम बताया है।इस तरह एक ही कार्रवाई को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से बिल्कुल अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष इसे अवैध निर्माण पर प्रशासनिक कार्रवाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देख रहा है।
Collectorate Mosque Demolition : 2027 के चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में बढ़ी सियासी गर्मी
सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद इस मुद्दे का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाट और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में सहारनपुर से जुड़े इस विवाद का असर आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
Collectorate Mosque Demolition : धार्मिक मुद्दे से राजनीतिक अस्मिता तक पहुंचा विवाद
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मामला अब केवल निर्माण की वैधता और प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। राजनीतिक दल इसे अपने-अपने नजरिए से उठा रहे हैं और इससे धार्मिक पहचान, कानून-व्यवस्था तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल भी चर्चा में आ गए हैं।सपा, कांग्रेस, बसपा और एआईएमआईएम की ओर से आई प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे को विपक्षी राजनीति के केंद्र में ला दिया है। वहीं भाजपा इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रही है।
Collectorate Mosque Demolition : 2027 की सियासत पर पड़ सकता है असर
सियासी जानकारों के अनुसार, सहारनपुर की घटना उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यदि यह विवाद लंबे समय तक राजनीतिक चर्चा में बना रहता है तो विभिन्न दल इसे अपने-अपने वोट बैंक और राजनीतिक संदेश के लिहाज से इस्तेमाल कर सकते हैं।हालांकि आने वाले समय में इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया, प्रशासन का पक्ष और राजनीतिक दलों की आगे की रणनीति क्या रहती है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल कलेक्ट्रेट मस्जिद का ध्वस्तीकरण उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया विवादित मुद्दा बन चुका है, जिसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दिखाई दे सकता है।


