National Teachers Awards 2026 : नई दिल्ली में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 समारोह में मध्यप्रदेश के दो शिक्षकों को उनके उल्लेखनीय शैक्षणिक कार्यों और नवाचारों के लिए सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशभर से चयनित उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मान प्रदान किया। मध्यप्रदेश से भोपाल की डॉ. अर्चना शुक्ला और सीधी जिले के शैलेंद्र प्रताप सिंह को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि उनका राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

National Teachers Awards 2026 : MP के दो शिक्षकों का सम्मान
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित शासकीय महात्मा गांधी सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की विज्ञान एवं जीव विज्ञान शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला को शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया।
वहीं, सीधी जिले के शासकीय माध्यमिक विद्यालय कंझवार, मझौली के अंग्रेजी शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक शैलेंद्र प्रताप सिंह को भी उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रपति ने सम्मानित किया।
National Teachers Awards 2026 : डॉ. अर्चना शुक्ला ने शिक्षा और पर्यावरण में किए नवाचार
डॉ. अर्चना शुक्ला ने प्रोजेक्ट आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी विद्यार्थियों की शिक्षा से जोड़ा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप कम लागत वाली कई परियोजनाएं विद्यार्थियों के साथ संचालित कीं।
गौरैया संरक्षण के लिए विद्यालय में एक हजार से अधिक स्पैरो हाउस लगाए गए। इसके अलावा स्कूल परिसर में मौजूद पेड़-पौधों की 102 प्रजातियों का QR कोड के माध्यम से डिजिटल मैपिंग की गई। ‘सीडबिन’ और ‘प्लांट इमोशन’ जैसी परियोजनाओं के जरिए विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया।
National Teachers Awards 2026 : विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए किया प्रेरित
डॉ. शुक्ला ने राज्य स्तरीय संसाधन व्यक्ति और मास्टर ट्रेनर के तौर पर भी काम किया है। उन्होंने विशेष रूप से पहली पीढ़ी के विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन दिया।
उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश हासिल किया। इनमें एम्स रायबरेली और आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान भी शामिल हैं। उनके इन प्रयासों को शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण से जोड़कर देखा गया।
शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बदली ग्रामीण विद्यालय की तस्वीर
सीधी जिले के शिक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने सीमित संसाधनों के बीच सामुदायिक भागीदारी को विद्यालय के विकास का माध्यम बनाया। उनके प्रयासों से स्कूल को स्थानीय स्तर पर पांच लाख रुपये से अधिक का सामुदायिक सहयोग प्राप्त हुआ।
उन्होंने विद्यालय के लिए 0.17 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने और नई अधोसंरचना के लिए करीब 76 लाख रुपये की स्वीकृति हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन प्रयासों से स्कूल की सुविधाओं में विस्तार हुआ और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार हुआ।
National Teachers Awards 2026 : विद्यार्थियों की संख्या और उपस्थिति में बड़ा सुधार
शैलेंद्र प्रताप सिंह के प्रयासों का असर विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या और उपस्थिति पर भी दिखाई दिया। उनके कार्यकाल में विद्यार्थियों की संख्या 69 से बढ़कर 202 तक पहुंची, जबकि उपस्थिति 44 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत हो गई।
उन्होंने स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की समस्या पर काम करने के साथ बाल विवाह की रोकथाम और दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए भी पहल की। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल की प्रवेश परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन देना भी उनके कार्यों का हिस्सा रहा।
National Teachers Awards 2026 : मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिक्षकों को दी बधाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम की जानकारी नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण और नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के शिक्षकों को मिलने वाला सम्मान अन्य शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
मध्यप्रदेश के इन दोनों शिक्षकों को National Teachers Awards 2026 मिलना प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे नवाचार, सामुदायिक सहभागिता और शिक्षकों के समर्पण की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।


